कानपुर नगर निगम में आउटसोर्स भर्ती के नाम पर सामने आए फर्जीवाड़े के बाद अब नौकरी कर रहे प्राइवेट कर्मचारियों की भी जांच शुरू कर दी गई है। सभी छह जोन के अधिकारियों से उनके यहां तैनात प्राइवेट और आउटसोर्स कर्मचारियों का पूरा ब्योरा मांगा गया है। इसमें कर्मचारी को किसने रखा, नियुक्ति पत्र दिया गया या नहीं, कितना वेतन तय है और वेतन मिला या नहीं, इसकी जानकारी शामिल है। अगर कर्मचारी किसी कंपनी के माध्यम से काम कर रहा है तो संबंधित कंपनी का विवरण भी मांगा गया है। जांच का फोकस कर्मचारियों की फेस अटेंडेंस पर भी है। जोन से मिलने वाले रिकॉर्ड का फेस अटेंडेंस मशीन में दर्ज कर्मचारियों के डेटा से मिलान किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि रिकॉर्ड में दर्ज कर्मचारी वास्तव में काम कर रहा है या नहीं और उसे वेतन दिया जा रहा है या नहीं। सभी 6 जोन से मांगा ब्योरा दरअसल, डबल पुलिया विजयनगर के रहने वाले सुनील कुमार ने आरोप लगाया था कि उसने जुलाई 2025 में मार्ग प्रकाश विभाग में स्विचमैन के तौर पर जोन-5 में काम करना शुरू किया था। उसका फेस अटेंडेंस पंजीकरण भी आईडी नंबर 65092 के साथ कराया गया, लेकिन उसे सात महीने से वेतन नहीं मिला। सुनील ने मंगलवार को नगर आयुक्त से शिकायत की थी। जांच में सामने आया कि उसके पास नियुक्ति पत्र नहीं था और संबंधित जोन के रिकॉर्ड में भी उसका स्पष्ट ब्योरा नहीं मिला। इस मामले के सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने सभी जोन से प्राइवेट कर्मचारियों का डेटा तलब किया है। अधिकारियों से फेस अटेंडेंस मशीन का रिकॉर्ड भी मांगा गया है। जांच के बाद रिकॉर्ड और मशीन में दर्ज हाजिरी का मिलान किया जाएगा। आधार कार्ड पर कराया गया फेस अटेंडेंस साल 2025 में यूपी डेस्को कंपनी की ओर से नगर निगम में फेस अटेंडेंस मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत सभी छह जोन और 110 वार्डों के कर्मचारियों का पंजीकरण किया जाना था। उस समय करीब 90 प्रतिशत आउटसोर्स कर्मचारियों के पास नियुक्ति पत्र नहीं होने की बात सामने आई थी। जोन के अधिकारी आधार कार्ड के पर कर्मचारी का कोड और अन्य जानकारी भेजते थे, जिसके बाद कंपनी के कर्मचारी मशीन में उसका पंजीकरण कर देते थे। सुनील का पंजीकरण रद्द कराने का दबाव वहीं सुनील के मामले में मार्ग प्रकाश विभाग ने अप्रैल में उसका आधार कार्ड और कर्मचारी कोड भेजा था। इसके बाद जोन-5 में उसका फेस अटेंडेंस पंजीकरण हुआ। आरोप है कि मामला सामने आने के बाद कंपनी के कर्मचारियों पर सुनील का पंजीकरण मशीन से हटाने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, मौजूदा समय में ज्यादातर कर्मचारी फेस अटेंडेंस मशीन पर नियमित हाजिरी नहीं लगाते हैं। मशीन में दर्ज अटेंडेंस के आधार पर सीधे वेतन भी नहीं मिलता, क्योंकि संबंधित जोन के अधिकारी को प्रपत्र पर हस्ताक्षर कर उसे भेजना होता है।

