Jaipur New Sanganer Road Bulldozer Action: जयपुर: त्योहारों की जगमग और खरीदारी की रौनक के बीच जयपुर के न्यू सांगानेर रोड पर इस वक्त सिसकियों का साया गहरा गया है। जिन घरों में दीये जलने चाहिए थे, वहां अब बुलडोजर के खौफ ने नींद उड़ा दी है। 40 से 50 साल पुराने मकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर लगे लाल निशानों ने इलाके के हजारों लोगों की त्योहारी खुशियों को एक झटके में छीन लिया है। प्रभावित परिवारों और दुकानदारों का कहना है कि उनकी पीढ़ियां इन प्रतिष्ठानों में गुजर चुकी हैं।
किसी की दुकान से पूरे परिवार का चूल्हा जल रहा है, तो कोई अपने खून-पसीने की कमाई से बनाए आशियाने की बैंक ईएमआई चुका रहा है। लोगों के पास नगर निगम के वैध पट्टे और दशकों पुराने दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद जेडीए की सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई ने उन्हें ‘अतिक्रमी’ बना दिया है। हालांकि, इनके पास सोसायटी के पट्टे हैं। जेडीए ने नोटिस में इन सभी लोगों को अतिक्रमी माना है। व्यापारियों का कहना है कि ऐसी मनमानी पहले कभी नहीं देखी। यदि कार्रवाई हुई तो सभी व्यापारियों की दिवाली काली हो जाएगी। सबसे ज्यादा दिक्कत बैकुंठ नगर, वेंकटेश्वर कॉलोनी, वेद वाटिका और कुछ हिस्सा अशोकपुरा का है।

बैठक में कुछ कहा… यहां कुछ और किया
प्रभावित लोगों का कहना है कि लाल निशान लगाने से पहले जेडीए ने व्यापारियों की बैठक बुलाई थी। लोगों का कहना है कि वहां अधिकारियों ने डिवाइडर को मिडिल पॉइंट मानते हुए कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था, लेकिन जब मौके पर टीम पहुंची तो गूगल कोऑर्डिनेट की बात कहकर एक ओर ज्यादा और दूसरी ओर कम चौड़ाई नापी है। अधिकारियों ने दोनों ओर नोटिस देने की बात कही थी, लेकिन लाल निशान एक ओर ज्यादा लगाए हैं। इस बात को लेकर स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है।
त्योहार से पहले आ जाएंगे सड़क पर
“हमें जेडीए में दूसरा नक्शा दिखाया गया। जब टीम निशान लगाने के लिए आई तो अलग निशान लगाए हैं। हमारे वर्षों पुराने प्रतिष्ठानों को अतिक्रमण बताया जा रहा है। यदि जेडीए की कार्रवाई हुई तो हम सड़क पर आ जाएंगे।” — बीरबल साहू
“जेडीए कोर्ट में झूठ बोल रहा है। जेडीए में हमारी नहीं सुनी जा रही है। आपत्ति के बाद क्या निस्तारण हुआ, यह कोई बताने को तैयार नहीं है। हमारे पास 1979 का सोसायटी पट्टा है।” — मनीष जैन
“जैसे-तैसे कर्जा लेकर मकान बनवाया है। 32 हजार की ईएमआई जाती है। कार्रवाई हुई तो दुकान टूट जाएगी। परिवार सड़क पर आ जाएगा। सरकार से मांग है कि दुकान की जगह दुकान और मकान की जगह मकान दिया जाए।” — विभा शर्मा
“हम बच्चों को लोन लेकर पढ़ा रहे हैं। रोज कार्रवाई का डर लग रहा है। ऐसी दिवाली पहले कभी नहीं आई। हमारा परिवार यहां 50 वर्ष से रहा है। हम मर जाएंगे, लेकिन अपनी दुकान नहीं छोड़ेंगे।” — पूनम शर्मा

पट्टे वाले अतिक्रमी कैसे?
बैकुंठ नगर में नगर निगम की ओर से पट्टे जारी किए गए हैं। जेडीए ने इनको अतिक्रमी मानते हुए 20 फीट तक सड़क पर अवैध कब्जा माना है। वहीं सामने की ओर निर्माण को जेडीए ने सही माना है। निगम का पट्टा होने और जेडीए से नोटिस मिलने के बाद भूखंडधारी कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं।
टीम बनाई गई है
“जानकारी में आने के बाद टीम बनाई है। इसके अलावा दस्तावेजों का भी मिलान किया जा रहा है। अशोक नगर में निगम की ओर से कुछ पट्टे जारी किए गए हैं। संख्या टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही दे सकते हैं।” — मनोहर लाल जाट, उपायुक्त, सिविल लाइन्स जोन, नगर निगम

