कांग्रेस ने मुद्दा उठाया, फिर CJP क्यों छा गई? शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी को दिखाया आईना

कांग्रेस ने मुद्दा उठाया, फिर CJP क्यों छा गई? शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी को दिखाया आईना

youth politics: युवाओं, छात्रों और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर विपक्ष लंबे समय से सरकार को घेरता रहा है। कांग्रेस ने भी इन मुद्दों को लेकर कई बार आवाज उठाई, लेकिन Cockroach Janta Party यानी CJP को जिस तरह युवाओं का समर्थन और सोशल मीडिया पर चर्चा मिली, उसने कांग्रेस के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी अब माना है कि पार्टी को इस पर आत्ममंथन करने की जरूरत है।

मुंबई में India’s International Movement to Unite Nations (IIMUN) के एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि कांग्रेस ने छात्रों से जुड़े मुद्दे पहले भी उठाए हैं। पार्टी के छात्र संगठन NSUI ने पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन किए और राहुल गांधी ने भी छात्रों के बीच जाकर परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों पर बात की।

इसके बावजूद CJP के आंदोलन ने युवाओं के बीच अलग तरह की पकड़ बनाई। थरूर के मुताबिक कांग्रेस को यह समझने की जरूरत है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।

थरूर ने उठाया बड़ा सवाल

थरूर की बात का सीधा मतलब यह है कि सिर्फ किसी मुद्दे को उठाना काफी नहीं है। यह भी जरूरी है कि युवाओं की भाषा और उनकी सोच को समझा जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस युवाओं, खासकर Gen Z की बेचैनी को सही तरीके से समझ नहीं पाई?

CJP के उभार को लेकर थरूर पहले भी कह चुके हैं कि यह आंदोलन युवाओं में मौजूद नाराजगी और व्यवस्था से उनकी निराशा को दिखाता है। उन्होंने इसे विपक्ष के लिए एक संकेत और मौका भी बताया था।

CJP को कैसे मिली इतनी चर्चा?

पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। आंदोलन में छात्रों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक समेत कई लोग जुड़े। सोशल मीडिया पर भी इस आंदोलन को युवाओं के गुस्से और Gen Z की आवाज के तौर पर खूब चर्चा मिली।

CJP की खास बात यह रही कि उसने सोशल मीडिया की भाषा, मीम और युवाओं के बीच तेजी से फैलने वाले कंटेंट का इस्तेमाल किया। इसी वजह से आंदोलन की चर्चा सिर्फ प्रदर्शन स्थल तक सीमित नहीं रही, बल्कि इंटरनेट पर भी तेजी से पहुंची।

कांग्रेस के सामने अब बड़ी चुनौती

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वह पहले से छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे उठा रही थी, तो CJP को उससे ज्यादा चर्चा क्यों मिली?

राहुल गांधी ने भी छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर ‘छात्रों की गूंज’ जैसे अभियानों के जरिए युवाओं से संवाद किया। लेकिन थरूर के बयान से साफ है कि पार्टी अब सिर्फ मुद्दे उठाने के बजाय यह भी सोच रही है कि युवाओं तक अपनी बात किस तरीके से पहुंचाई जाए।

यानी आने वाले समय में कांग्रेस के सामने चुनौती केवल सरकार को घेरने की नहीं, बल्कि युवाओं की भाषा और उनकी प्राथमिकताओं को समझकर उनसे सीधे जुड़ने की भी है। CJP की लोकप्रियता ने कांग्रेस को कम से कम इतना सोचने पर मजबूर कर दिया है कि युवाओं की आवाज उठाना और युवाओं तक पहुंचना दो अलग-अलग बातें हैं।

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