कलेक्ट्रेट में सैकड़ों अधिवक्ताओं का हल्लाबोल, पुलिस से धक्कामुक्की:डीएम चैंबर के बाहर नारेबाजी, तबादले और लिखित माफी तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

कलेक्ट्रेट में सैकड़ों अधिवक्ताओं का हल्लाबोल, पुलिस से धक्कामुक्की:डीएम चैंबर के बाहर नारेबाजी, तबादले और लिखित माफी तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

बलरामपुर में ऑनलाइन दाखिल-खारिज की व्यवस्था के विरोध और अधिवक्ताओं का ज्ञापन स्वीकार न किए जाने से शुरू हुआ विवाद अब जिला प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच आर-पार की लड़ाई में तब्दील होता दिखाई दे रहा है।बुधवार को सैकड़ों अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट का रुख किया तो परिसर में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। अधिवक्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने प्रयास किया,जिस दौरान पुलिस और वकीलों के बीच धक्कामुक्की भी हुई।इसके बाद आक्रोशित अधिवक्ता डीएम के चैंबर के बाहर धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की।डीएम विपिन जैन के खिलाफ विरोध की आवाज बुलंद करते हुए अधिवक्ताओं ने साफ कर दिया कि अब यह लड़ाई मांगों के निस्तारण,डीएम के तबादले और उनकी लिखित माफी तक थमने वाली नहीं है। बुधवार को सुबह से ही अधिवक्ताओं में उबाल देखने को मिला।संयुक्त बार एसोसिएशन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ता 12:30 बजे एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे।प्रदर्शनकारियों का रुख देखते हुए पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। लेकिन इस दौरान तनातनी बढ़ गई और दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की की स्थिति बन गई। चैंबर के बाहर पहुंचकर धरने पर बैठ गए इसके बावजूद अधिवक्ता पीछे हटने को तैयार नहीं हुए और डीएम के चैंबर के बाहर पहुंचकर धरने पर बैठ गए।चैंबर के बाहर लगातार नारेबाजी के बीच अधिवक्ताओं ने प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। कलेक्ट्रेट में बढ़ते विरोध के बीच डीएम चैंबर से बाहर निकले और अधिवक्ताओं को समझाने-बुझाने का प्रयास किया।हालांकि,उनकी कोशिशों के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी।अधिवक्ता अपनी मांगों पर अड़े रहे और उन्होंने आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया।उनका कहना था कि जब तक ऑनलाइन दाखिल-खारिज से जुड़े मुद्दे का समाधान नहीं होता और अधिवक्ताओं के साथ हुए व्यवहार को लेकर जवाबदेही तय नहीं की जाती,तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अधिवक्ताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल से डीएम ने ज्ञापन स्वीकार करने के बजाय दूरी बना ली थी।इसी घटना ने पहले से चल रहे विरोध को और उग्र कर दिया।अधिवक्ताओं का कहना है कि ज्ञापन न लेना केवल उनकी मांगों की अनदेखी नहीं,बल्कि अधिवक्ता समुदाय के सम्मान से जुड़ा मामला है।इसी के विरोध में अब आंदोलन को लगातार तेज किया जा रहा है।

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