करवा चौथ पर रोहिणी-मृगशिरा नक्षत्र और शिवयोग का संयोग:MP में कहीं 8:01 तो कहीं 8:41 बजे दिखेगा चांद, सिंगरौली में सबसे पहले चंद्रदर्शन

करवा चौथ पर रोहिणी-मृगशिरा नक्षत्र और शिवयोग का संयोग:MP में कहीं 8:01 तो कहीं 8:41 बजे दिखेगा चांद, सिंगरौली में सबसे पहले चंद्रदर्शन

करवा चौथ पर सुहागिनों को चांद के दीदार के लिए इस बार मध्य प्रदेश में अलग-अलग समय तक इंतजार करना होगा। शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद करवे में भरे जल से अर्घ्य देकर महिलाएं व्रत का पारण करेंगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन चंद्रमा की पूजा पति-पत्नी के बीच प्रेम, मानसिक सामंजस्य और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से की जाती है। प्रदेश के पूर्वी छोर पर स्थित सिंगरौली में रात 8:01 बजे चंद्रोदय का अनुमान है, जबकि पश्चिमी छोर के आलीराजपुर में चांद रात 8:41 बजे दिखाई देने की संभावना है। यानी दोनों जिलों के बीच चंद्रोदय के समय में करीब 40 मिनट का अंतर रहेगा। भोपाल में रात 8:26 बजे चांद निकलेगा। ज्योतिष मठ संस्थान के आचार्य पं. विनोद गौतम ने भोपाल में चंद्रोदय का समय रात 8:24 बजे बताया है। इस बार करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र के साथ शिवयोग का संयोग रहेगा और चंद्रमा वृषभ राशि में होगा। करवा, चंद्रमा, गणपति और चौथ माता की पूजा का विधान पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार, करवा मिट्टी का पात्र होता है, जिसमें जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि अर्घ्य देने से चंद्रमा प्रसन्न होते हैं। पूजन में सुगंधित द्रव्य, सफेद पुष्प और चावल आदि का उपयोग किया जाता है। इसके साथ गणपति और चौथ माता की पूजा का भी विधान है। चंद्रमा, गणपति और चौथ माता का संयुक्त पूजन तथा संकल्प के साथ विधि-विधान से पूजा करने पर व्रत की पूर्णता मानी जाती है। बादल और बारिश बढ़ा सकती हैं इंतजार एमपी के कई जिलों में बारिश का अनुमान है। ऐसे में ज्यादातर जगह बादल होंगे। वहीं चंद्रोदय का दिया गया समय चंद्रमा के क्षितिज से ऊपर आने का अनुमान है। वास्तविक चंद्र दर्शन में ऊंची इमारतों, पहाड़ियों, कोहरे या बादलों के कारण 10 से 15 मिनट की देरी हो सकती है। ऐसे में निर्धारित समय पर चांद दिखाई नहीं देने पर कुछ देर इंतजार करना पड़ सकता है। करवा चौथ की पूजा में करवा, चंद्रमा, गणपति और चौथ माता का महत्व नई दुल्हन भी रख सकेंगी व्रत पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार, पहली करवा चौथ पर गुरु के तारा और शुक्र तारे के उदय-अस्त को लेकर किसी तरह का संशय नहीं रखना चाहिए। नवविवाहित महिलाएं भी बिना किसी दोष के व्रत रख सकती हैं। पूजन में गणपति का संकल्प लेकर चंद्रमा, गणेशजी और चौथ माता का संयुक्त पूजन करें। इसके बाद करवे से चंद्रमा को अर्घ्य दें। मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में सुख और सौभाग्य बना रहता है। करवा माता के इकलौते मंदिर में महिलाओं की भीड़ उज्जैन के जीवनखेड़ी स्थित करवा माता मंदिर में सुबह से ही दर्शन के लिए महिलाओं की भीड़ जुटने लगी। उन्हेल बायपास पर स्थित इस मंदिर में चौथ माता के साथ देवी पार्वती, रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ और संतोषी माता विराजमान हैं। महिलाएं अखंड सुहाग की कामना के साथ पूजा-अर्चना कर रही हैं। दावा है कि यह प्रदेश का चौथ माता का इकलौता मंदिर है, जिसे वर्ष में केवल एक बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। ये खबर भी पढ़ें… उज्जैन के 40 मंदिरों में मदिरा का भोग उज्जैन में शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर सोमवार को सदियों पुरानी नगर पूजा की परंपरा निभाई गई। सुबह चौबीस खंबा माता मंदिर में महामाया और महालया माता की पूजा-अर्चना कर मदिरा का भोग लगाया गया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ शासकीय नगर पूजा दल 26 किलोमीटर की यात्रा पर निकला। कोटवार और पटवारी मिट्टी की हांडी से मदिरा की धार चढ़ाते हुए शहर के करीब 40 देवी, भैरव और हनुमान मंदिरों में पहुंचे।पूरी खबर पढ़ें

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *