भारतीय नौसेना में देश सेवा के बाद खेल के मैदान में तिरंगा लहराने वाली कमांडर (डॉ.) गौरी मिश्रा ने मैनचेस्टर में यूसीआई वर्ल्ड मास्टर्स ट्रैक साइक्लिंग चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करने से लेकर ताइवान में आयोजित वर्ल्ड मास्टर्स गेम्स 2025 में 2 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। रांची परिवार से बहू के रूप में जुड़ीं गौरी मिश्रा इन दिनों खेलगांव में चल रही राष्ट्रीय ट्रैक साइक्लिंग चैंपियनशिप में दिल्ली टीम की मैनेजर बनकर शहर आई हैं। उन्होंने रांची, साइक्लिंग और खेल संस्कृति पर अपने विचार साझा किए। कुछ शहरों से रिश्ता एक मुलाकात में नहीं थमता, रांची से मेरा जुड़ाव भी ऐसा ही है कुछ शहर ऐसे होते हैं जिनकी ऊर्जा और लोगों का अपनापन आपको बार-बार लौटने को प्रेरित करता है। सितंबर 2025 में सांसद खेल महोत्सव के दौरान जब मैं रांची आई थी, तब मोरहाबादी से निकली 2 हजार साइकिलों की कतार और शहरवासियों का जज्बा देखकर मैंने कहा था कि रांची देश की साइक्लिंग राजधानी बन सकती है। आज 78वीं सीनियर व जूनियर राष्ट्रीय ट्रैक साइक्लिंग चैंपियनशिप में 600 से अधिक खिलाड़ियों के बीच बतौर टीम मैनेजर खड़े होकर मुझे वह सपना और मजबूत होता दिख रहा है। नौसेना ने सिखाया अनुशासन, साइक्लिंग ने दिया धैर्य और हौसला नेवी की सेवा पूरी करने के बाद मैंने साइक्लिंग शुरू की। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन मैंने सीखा कि जीत केवल रफ्तार से नहीं मिलती। इसके पीछे घंटों का अभ्यास, तकनीक की समझ, मानसिक नियंत्रण और गिरकर दोबारा खड़े होने की जिद होती है। नौसेना ने मुझे अनुशासन और टीम भावना दी, तो ट्रैक ने मुझे धैर्य सिखाया। आज ट्रैक पर पसीना बहाते युवाओं को देखकर मुझे अपना वही संघर्ष याद आता है। बेटियों को मिले भरोसा, तो ट्रैक पर लहराएगा तिरंगा हाल ही में अस्मिता ईस्ट जोन लीग में महिला खिलाड़ियों की भागीदारी देख दिल खुश हो गया। बेटियों को सुरक्षित माहौल और इसे करियर बनाने का भरोसा मिले, तो वे देश का नाम रोशन करेंगी। चैंपियनशिप कुछ दिनों की होती है, मगर चैंपियन वर्षों में गढ़े जाते हैं। रांची शहर के ट्रैक पर सिर्फ पदकों की होड़ ही नहीं है, बल्कि ओलंपिक में पदक जीतने के बड़े-बड़े सपने आकार ले रहे हैं।

