Stenosis Symptoms: स्टेनोसिस मेडिकल साइंस में वह शब्द है, जिसका इस्तेमाल शरीर के अंदर की किसी वाहिका में संकुचन को बताने के लिए किया जाता है। इनके संकरा होने की वजह से खून या अन्य पदार्थ नसों या शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। यहां हम स्पाइनल स्टेनोसिस के बारे में बात करेंगे, लेकिन साफ है कि स्टेनोसिस शरीर के अलग-अलग हिस्सों में हो सकता है। जानते हैं स्टेनोसिस के कारण और बचाव।
स्टेनोसिस क्यों होता है?
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, रीढ़ की हड्डी में उम्र के साथ होने वाले बदलाव इसकी एक बड़ी वजह हो सकते हैं। हड्डियों में अतिरिक्त बढ़ोतरी, स्लिप या हर्नियेटेड डिस्क और रीढ़ की हड्डी के आसपास के लिगामेंट का मोटा होना भी रीढ़ की जगह को संकरा कर सकता है। चोट, फ्रैक्चर और कुछ मामलों में ट्यूमर भी इसकी वजह बन सकते हैं।
स्टेनोसिस शरीर के किन हिस्सों में हो सकता है?
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, स्टेनोसिस केवल रीढ़ तक सीमित नहीं है। यह शरीर के कई हिस्सों में हो सकता है। दिल के वाल्व, खून की नसों, सांस की नली, खाने की नली, आंत और पेशाब की नली जैसे हिस्सों में भी रास्ता संकरा हो सकता है। जैसे, एओर्टिक वाल्व स्टेनोसिस में दिल के एक वाल्व का रास्ता संकरा हो जाता है, जिससे दिल से शरीर की तरफ खून जाने में परेशानी हो सकती है। इसी तरह माइट्रल वाल्व स्टेनोसिस में दिल के दूसरे वाल्व का रास्ता संकरा हो जाता है।
स्पाइनल स्टेनोसिस क्या है?
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, स्पाइनल स्टेनोसिस तब होता है जब रीढ़ की हड्डी के अंदर की जगह संकरी हो जाती है। इस वजह से रीढ़ की नसों या स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव पड़ सकता है। यह समस्या ज्यादातर कमर के निचले हिस्से और गर्दन में होती है।
स्पाइनल स्टेनोसिस के क्या लक्षण होते हैं?
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि रीढ़ के किस हिस्से में जगह संकरी हुई है। आमतौर पर कमर या गर्दन में दर्द, हाथ पैर में सुन्नपन, झनझनाहट और कमजोरी हो सकती है। कमर में स्टेनोसिस होने पर कमर के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है। यह दर्द कूल्हे से होते हुए पैर तक भी जा सकता है। पैरों में भारीपन या ऐंठन और झनझनाहट महसूस हो सकती है। लंबे समय तक खड़े रहने या चलने पर दर्द बढ़ सकता है, जबकि बैठने या आगे की तरफ झुकने पर आराम मिल सकता है। वहीं गर्दन में स्टेनोसिस होने पर गर्दन में दर्द के साथ हाथ, पैर या उंगलियों में सुन्नपन और कमजोरी हो सकती है। चलने और संतुलन बनाने में परेशानी हो सकती है।
स्टेनोसिस से बचाव के लिए क्या करें?
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, उम्र के साथ होने वाले बदलावों की वजह से होने वाले स्टेनोसिस को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। लेकिन रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज करना, वजन को कंट्रोल में रखना, सही पोस्चर रखना और धूम्रपान से दूर रहना मददगार हो सकता है। खाने में पर्याप्त कैल्शियम लेना भी हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

