Gallbladder Cancer: पेट के दाहिने हिस्से में पसलियों के ठीक नीचे एक छोटा सा, नाशपाती (Pear) के आकार का अंग होता है जिसे हम पित्ताशय यानी गॉलब्लैडर (Gallbladder) कहते हैं। इसका मुख्य काम लिवर द्वारा बनाए गए पाचक रस यानी ‘पित्त’ (Bile) को जमा करना होता है, जो हमारे भोजन में मौजूद फैट (वसा) को पचाने में मदद करता है। आमतौर पर लोग गॉलब्लैडर में पत्थरी (Gallstones) की समस्या के बारे में तो बहुत सुनते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी छोटे से अंग में कैंसर भी पनप सकता है? गॉलब्लैडर कैंसर को चिकित्सा विज्ञान में एक साइलेंट किलर माना जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य पेट दर्द या गैस-एसिडिटी जैसे लगते हैं। आइए समझें कि गॉलब्लैडर कैंसर क्या है, यह कैसे विकसित होता है, इसके लक्षण क्या हैं और किन लोगों को इसका सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
गॉलब्लैडर (पित्ताशय) का कैंसर आखिर कैसे विकसित होता है?
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी (American Cancer Society) के अनुसार, हमारा शरीर अनगिनत कोशिकाओं (Cells) से बना है। जब गॉलब्लैडर की अंदरूनी परत की स्वस्थ कोशिकाओं के डीएनए (DNA) में कोई गड़बड़ी या बदलाव (Mutation) आ जाता है, तो वे अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। ये असामान्य कोशिकाएं मरती नहीं हैं, बल्कि एक जगह इकट्ठा होकर गांठ या ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। समय बीतने के साथ अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह कैंसर गॉलब्लैडर की दीवारों से बाहर निकलकर आसपास के अंगों, जैसे कि लिवर, पित्त की नलियों (Bile Ducts) और पेट के अन्य हिस्सों में फैल जाता है।गॉलब्लैडर कैंसर का सबसे आम प्रकार एडेनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma) होता है, जो पित्ताशय की ग्रंथियों जैसी कोशिकाओं से शुरू होता है।
इसके मुख्य लक्षण क्या दिखाई देते हैं?
मेयो क्लिनिक के मुताबिक, गॉलब्लैडर कैंसर की शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देता। जब ट्यूमर बढ़ने लगता है और पित्त की नली में रुकावट डालता है, तब शरीर में ये लक्षण नजर आने लगते हैं;
- पेट के ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द रहना।
- त्वचा और आंखों में पीलिया (Jaundice)।
- त्वचा में तेज खुजली होना।
- पेट का फूलना या भारीपन।
- बिना वजह वजन और भूख कम होना।
- जी मिचलाना और उल्टी होना।
किन लोगों को गॉलब्लैडर कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा रहता है?
- पित्त की पथरी का इतिहास (Gallstones)।
- पोरसिलीन गॉलब्लैडर (Porcelain Gallbladder)।
- महिलाओं में अधिक खतरा।
- बढ़ती उम्र और मोटापा।
- गॉलब्लैडर पॉलिप्स (Gallbladder Polyps)।
डॉक्टर इसकी जांच और इलाज कैसे करते हैं?
- अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)।
- सीटी स्कैन और एमआरआई (CT Scan / MRI)।
- ब्लड टेस्ट (LFT और ट्यूमर मार्कर्स)।
इससे बचाव के लिए क्या करें और डॉक्टर से कब मिलें?
गॉलब्लैडर कैंसर को पूरी तरह से रोकना मुमकिन नहीं है, लेकिन अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करके इसके खतरे को काफी कम किया जा सकता है;
- अपने वजन को नियंत्रित रखें और संतुलित, फाइबर युक्त डाइट लें।
- अगर आपको पित्त की पथरी है और बार-बार दर्द होता है, तो उसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर की सलाह से समय रहते इलाज कराएं।
- यदि आपको पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में लगातार दर्द, अचानक वजन गिरना या पीलिया के लक्षण दिखें, तो बिना देर किए किसी अच्छे गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (पेट रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करें।

