कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकली स्वर्वेद संदेश यात्रा पहुंची औरंगाबाद:श्रद्धालुओं ने किया भव्य स्वागत, सूर्य मंदिर में हुआ आध्यात्मिक कार्यक्रम; सेवा-संकल्प के साथ यात्रा ओडिशा रवाना

कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकली स्वर्वेद संदेश यात्रा पहुंची औरंगाबाद:श्रद्धालुओं ने किया भव्य स्वागत, सूर्य मंदिर में हुआ आध्यात्मिक कार्यक्रम; सेवा-संकल्प के साथ यात्रा ओडिशा रवाना

औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड अंतर्गत दोमुहान सड़सा स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर परिसर में सोमवार को विहंगम योग स्वर्वेद संदेश यात्रा पहुंची। सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के नेतृत्व में कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकली समर्पण दीप स्वर्वेद संदेश यात्रा के औरंगाबाद पहुंचने पर विहंगम योग से जुड़े श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आध्यात्मिक वातावरण के बीच ध्वजारोहण, वैदिक मंत्रोच्चार, अखंड दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। दोमुहान सड़सा सूर्य मंदिर परिसर में हुआ भव्य स्वागत बिहार प्रांत के अध्यक्ष युवा संत समाज सह कार्यवाहक महामंत्री संजय कुमार सिंह ने बताया कि समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद संदेश यात्रा निकाली गई है। यात्रा बिहार के विभिन्न जिलों से होते हुए सोमवार को दोमुहान सड़सा सूर्य मंदिर की पावन भूमि पर पहुंची। यहां बिहार चरण का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसके बाद यात्रा ओडिशा के लिए रवाना हो गई। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण से हुआ। इसके बाद संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने अभ्यास सिद्ध सद्गुरु अनंत श्री सदाफल देव जी महाराज एवं प्रथम परंपरा सद्गुरु श्री धर्मचंद देव जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण किया। वर्तमान सद्गुरु आचार्य श्री स्वतंत्र देव जी महाराज के चरणों में भी पुष्प अर्पित किए गए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अखंड दीप प्रज्ज्वलित किया गया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ। साधना और सेवा से आत्मिक उन्नति का दिया संदेश कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने मानवीय चेतना की सार्थक दिशा और पुरुषार्थ चतुष्टय धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष के गूढ़ मर्म को सहज रूप में समझाया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मिक उन्नति और परम पुरुषार्थ की दिशा में आगे बढ़ना भी आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को साधना और सेवा के महत्व के बारे में बताया। संत प्रवर की दिव्य वाणी सुनकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में अपनाने और समाज में सेवा एवं सद्भाव की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। राष्ट्रव्यापी यात्रा के माध्यम से अध्यात्म, साधना और सेवा का संदेश आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर श्रद्धालुओं को स्वर्वेद के संदेश और मानवीय चेतना के उत्थान से संबंधित जानकारी दी जा रही है। 25 हजार कुंडीय महायज्ञ में शामिल होने का लिया संकल्प राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वैदिक पुरोहित आचार्य मयंक शास्त्री ने बताया कि औरंगाबाद में यात्रा की सार्थक परिणति सेवा-संकल्प के रूप में हुई। उन्होंने बताया कि आगामी 14 एवं 15 दिसंबर 2026 को स्वर्वेद महामंदिर धाम, वाराणसी में वार्षिक उत्सव के अवसर पर 25 हजार कुंडीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने महायज्ञ और समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव के आयोजन के निमित्त सेवा करने तथा अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का संकल्प लिया। औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड अंतर्गत दोमुहान सड़सा स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर परिसर में सोमवार को विहंगम योग स्वर्वेद संदेश यात्रा पहुंची। सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के नेतृत्व में कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकली समर्पण दीप स्वर्वेद संदेश यात्रा के औरंगाबाद पहुंचने पर विहंगम योग से जुड़े श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आध्यात्मिक वातावरण के बीच ध्वजारोहण, वैदिक मंत्रोच्चार, अखंड दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। दोमुहान सड़सा सूर्य मंदिर परिसर में हुआ भव्य स्वागत बिहार प्रांत के अध्यक्ष युवा संत समाज सह कार्यवाहक महामंत्री संजय कुमार सिंह ने बताया कि समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद संदेश यात्रा निकाली गई है। यात्रा बिहार के विभिन्न जिलों से होते हुए सोमवार को दोमुहान सड़सा सूर्य मंदिर की पावन भूमि पर पहुंची। यहां बिहार चरण का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसके बाद यात्रा ओडिशा के लिए रवाना हो गई। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण से हुआ। इसके बाद संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने अभ्यास सिद्ध सद्गुरु अनंत श्री सदाफल देव जी महाराज एवं प्रथम परंपरा सद्गुरु श्री धर्मचंद देव जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण किया। वर्तमान सद्गुरु आचार्य श्री स्वतंत्र देव जी महाराज के चरणों में भी पुष्प अर्पित किए गए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अखंड दीप प्रज्ज्वलित किया गया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ। साधना और सेवा से आत्मिक उन्नति का दिया संदेश कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने मानवीय चेतना की सार्थक दिशा और पुरुषार्थ चतुष्टय धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष के गूढ़ मर्म को सहज रूप में समझाया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मिक उन्नति और परम पुरुषार्थ की दिशा में आगे बढ़ना भी आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को साधना और सेवा के महत्व के बारे में बताया। संत प्रवर की दिव्य वाणी सुनकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में अपनाने और समाज में सेवा एवं सद्भाव की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। राष्ट्रव्यापी यात्रा के माध्यम से अध्यात्म, साधना और सेवा का संदेश आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर श्रद्धालुओं को स्वर्वेद के संदेश और मानवीय चेतना के उत्थान से संबंधित जानकारी दी जा रही है। 25 हजार कुंडीय महायज्ञ में शामिल होने का लिया संकल्प राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वैदिक पुरोहित आचार्य मयंक शास्त्री ने बताया कि औरंगाबाद में यात्रा की सार्थक परिणति सेवा-संकल्प के रूप में हुई। उन्होंने बताया कि आगामी 14 एवं 15 दिसंबर 2026 को स्वर्वेद महामंदिर धाम, वाराणसी में वार्षिक उत्सव के अवसर पर 25 हजार कुंडीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने महायज्ञ और समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव के आयोजन के निमित्त सेवा करने तथा अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का संकल्प लिया।  

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