औरंगाबाद जिले में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से हुई बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अक्टूबर के अंतिम तीन दिनों में हुई झमाझम बारिश से खेतों में तैयार धान की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है। तेज हवा के कारण कई स्थानों पर धान की खड़ी फसल खेतों में गिर गई है। वहीं, लगातार बारिश और खेतों में नमी बने रहने से धान की बालियों में अंकुरण और सड़न की समस्या उत्पन्न होने लगी है। इससे किसानों को उत्पादन के साथ फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने का डर सता रहा है। इस वर्ष अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन मौसम के बदले मिजाज ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है। किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपए खर्च करने के बाद अब लागत निकालना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। सरकार से मुआवजे की मांग की है। तीन दिनों की बारिश ने बिगाड़ा खेती का गणित रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर महीने में जिले में कुल 688 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस दौरान औसत बारिश 62.5 मिलीमीटर रहा। रिपोर्ट में 28 अक्टूबर को 17 मिलीमीटर, 29 अक्टूबर को 176.2 मिलीमीटर और 30 अक्टूबर को 294.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। खासकर 30 अक्टूबर को हुई भारी बारिश ने खेतों में जलजमाव की स्थिति पैदा कर दी। हालांकि जिले में शनिवार को सुबह से ही मौसम साफ रहा। बारिश नहीं हुई है, लेकिन आसमान में दिन भर बादल छाए रहे। प्रखंडवार आंकड़ों के अनुसार दाउदनगर में सर्वाधिक 123.4 मिलीमीटर बारिश हुई। कुटुंबा में 108.2, रफीगंज में 70.2 और औरंगाबाद प्रखंड में 57.6 मिलीमीटर बारिश हुई। वहीं, नवीनगर में 33.4 मिलीमीटर दर्ज किया गया। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल गिरने के साथ कटाई के लिए रखी गई फसल भी प्रभावित हुई है। किसानों को आशंका है कि खेतों में पानी जमा रहने और धान की बालियों में नमी बढ़ने से दाने की गुणवत्ता खराब हो सकती है। बालियों में अंकुरण और गंधी बग कीट का खतरा कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रतिमा कुमारी ने किसानों को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से मध्यम वर्षा, मेघगर्जन, वज्रपात और 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना को देखते हुए किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। धान की तैयार फसल की कटाई में सावधानी बरतें। संभव हो तो मौसम साफ होने के बाद ही कटाई करें। खेतों में जलजमाव से बचने के लिए उचित जलनिकासी की व्यवस्था करें। भारी बारिश और तेज हवा से खड़ी तथा कटी हुई दोनों तरह की फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। कृषि वैज्ञानिक ने विशेष रूप से धान की दुग्धावस्था वाली फसल में गंधी बग कीट के प्रकोप को लेकर सावधान किया। यह कीट धान के दानों को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में किसान नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करें। कीट का प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार जैविक अथवा रासायनिक उपायों से नियंत्रण करें। बिना जानकारी के कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करें। सब्जियों और रबी फसलों को भी नुकसान कुटुंबा प्रखंड के सिमरा गांव के किसान धीरेंद्र पासवान और सोनल कुमार सिंह ने बताया कि अर्नब तूफान के कारण धान के अलावा अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में तैयार धान की फसल गिर गई है। लतर वाली सब्जियों की फसल भी प्रभावित हुई है।
किसानों के अनुसार, कई जगहों पर मसूर और सरसों की बुआई की गई थी, लेकिन अत्यधिक बारिश के कारण इन फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। जिन खेतों में आलू की खेती की गई है, वहां पानी जमा होने से फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
किसानों को इस बार धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद थी। फसल में बालियां निकल चुकी थी और कटाई की तैयारी चल रही थी। खेती में अपनी जमा पूंजी लगाने के बाद उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन ऐन वक्त पर हुई बारिश ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में गिरी फसल को देखकर किसान चिंतित हैं। प्रशासन से राहत की उम्मीद प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के लिए अब मुआवजे की मांग उठने लगी है। प्रगतिशील किसान बृजकिशोर मेहता, संजय सिंह, सुदर्शन पांडेय ने सरकार और जिला प्रशासन से पूरे औरंगाबाद जिले में फसल क्षति का आकलन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चक्रवाती तूफान और लगातार बारिश से जिले के किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन को प्रभावित गांवों में सर्वेक्षण कराकर वास्तविक क्षति का आकलन करना चाहिए, ताकि नुकसान के अनुसार किसानों को उचित मुआवजा और सरकारी सहायता मिल सके। किसानों की आजीविका खेती पर निर्भर है। खेती के लिए किसान कर्ज लेकर या अपनी जमा पूंजी लगाकर फसल तैयार करते हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने पर उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। सरकार और जिला प्रशासन को इस दिशा में शीघ्र पहल करनी चाहिए। औरंगाबाद जिले में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से हुई बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अक्टूबर के अंतिम तीन दिनों में हुई झमाझम बारिश से खेतों में तैयार धान की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है। तेज हवा के कारण कई स्थानों पर धान की खड़ी फसल खेतों में गिर गई है। वहीं, लगातार बारिश और खेतों में नमी बने रहने से धान की बालियों में अंकुरण और सड़न की समस्या उत्पन्न होने लगी है। इससे किसानों को उत्पादन के साथ फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने का डर सता रहा है। इस वर्ष अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन मौसम के बदले मिजाज ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है। किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपए खर्च करने के बाद अब लागत निकालना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। सरकार से मुआवजे की मांग की है। तीन दिनों की बारिश ने बिगाड़ा खेती का गणित रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर महीने में जिले में कुल 688 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस दौरान औसत बारिश 62.5 मिलीमीटर रहा। रिपोर्ट में 28 अक्टूबर को 17 मिलीमीटर, 29 अक्टूबर को 176.2 मिलीमीटर और 30 अक्टूबर को 294.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। खासकर 30 अक्टूबर को हुई भारी बारिश ने खेतों में जलजमाव की स्थिति पैदा कर दी। हालांकि जिले में शनिवार को सुबह से ही मौसम साफ रहा। बारिश नहीं हुई है, लेकिन आसमान में दिन भर बादल छाए रहे। प्रखंडवार आंकड़ों के अनुसार दाउदनगर में सर्वाधिक 123.4 मिलीमीटर बारिश हुई। कुटुंबा में 108.2, रफीगंज में 70.2 और औरंगाबाद प्रखंड में 57.6 मिलीमीटर बारिश हुई। वहीं, नवीनगर में 33.4 मिलीमीटर दर्ज किया गया। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल गिरने के साथ कटाई के लिए रखी गई फसल भी प्रभावित हुई है। किसानों को आशंका है कि खेतों में पानी जमा रहने और धान की बालियों में नमी बढ़ने से दाने की गुणवत्ता खराब हो सकती है। बालियों में अंकुरण और गंधी बग कीट का खतरा कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रतिमा कुमारी ने किसानों को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से मध्यम वर्षा, मेघगर्जन, वज्रपात और 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना को देखते हुए किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। धान की तैयार फसल की कटाई में सावधानी बरतें। संभव हो तो मौसम साफ होने के बाद ही कटाई करें। खेतों में जलजमाव से बचने के लिए उचित जलनिकासी की व्यवस्था करें। भारी बारिश और तेज हवा से खड़ी तथा कटी हुई दोनों तरह की फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। कृषि वैज्ञानिक ने विशेष रूप से धान की दुग्धावस्था वाली फसल में गंधी बग कीट के प्रकोप को लेकर सावधान किया। यह कीट धान के दानों को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में किसान नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करें। कीट का प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार जैविक अथवा रासायनिक उपायों से नियंत्रण करें। बिना जानकारी के कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करें। सब्जियों और रबी फसलों को भी नुकसान कुटुंबा प्रखंड के सिमरा गांव के किसान धीरेंद्र पासवान और सोनल कुमार सिंह ने बताया कि अर्नब तूफान के कारण धान के अलावा अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में तैयार धान की फसल गिर गई है। लतर वाली सब्जियों की फसल भी प्रभावित हुई है।
किसानों के अनुसार, कई जगहों पर मसूर और सरसों की बुआई की गई थी, लेकिन अत्यधिक बारिश के कारण इन फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। जिन खेतों में आलू की खेती की गई है, वहां पानी जमा होने से फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
किसानों को इस बार धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद थी। फसल में बालियां निकल चुकी थी और कटाई की तैयारी चल रही थी। खेती में अपनी जमा पूंजी लगाने के बाद उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन ऐन वक्त पर हुई बारिश ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में गिरी फसल को देखकर किसान चिंतित हैं। प्रशासन से राहत की उम्मीद प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के लिए अब मुआवजे की मांग उठने लगी है। प्रगतिशील किसान बृजकिशोर मेहता, संजय सिंह, सुदर्शन पांडेय ने सरकार और जिला प्रशासन से पूरे औरंगाबाद जिले में फसल क्षति का आकलन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चक्रवाती तूफान और लगातार बारिश से जिले के किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन को प्रभावित गांवों में सर्वेक्षण कराकर वास्तविक क्षति का आकलन करना चाहिए, ताकि नुकसान के अनुसार किसानों को उचित मुआवजा और सरकारी सहायता मिल सके। किसानों की आजीविका खेती पर निर्भर है। खेती के लिए किसान कर्ज लेकर या अपनी जमा पूंजी लगाकर फसल तैयार करते हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने पर उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। सरकार और जिला प्रशासन को इस दिशा में शीघ्र पहल करनी चाहिए।

