औरंगाबाद में दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। शहर से लेकर जिले के अलग-अलग प्रखंड मुख्यालयों और बाजारों में भव्य पूजा पंडाल बनाया जा रहा है, तो कहीं स्थायी मंदिर को ही आकर्षक मंडप का स्वरूप दिया जा रहा है। शहर की कई पुरानी पूजा समितियां अपनी ऐतिहासिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में जुटी हैं। पूजा पंडालों के निर्माण, प्रतिमाओं की तैयारी और विद्युत सजावट का काम तेजी से चल रहा है। इस बार पूजा आयोजनों पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। तेलिया पोखर में समुद्र मंथन की थीम पर बनेगा पंडाल शहर के ब्लॉक मोड़ के पास तेलिया पोखर में इस वर्ष मां शेरावाली पूजा कमेटी की ओर से भव्य दुर्गापूजा का आयोजन किया जा रहा है। यहां श्रद्धालुओं को पूजा पंडाल में समुद्र मंथन का दृश्य देखने को मिलेगा। पंडाल निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। अपने आकर्षक पंडालों के लिए पहचान रखने वाली इस कमेटी की ओर से वर्ष 1999 से दुर्गापूजा का आयोजन किया जा रहा है। कमेटी के अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि इस वर्ष पूजा आयोजन पर करीब आठ लाख रुपये खर्च करने की योजना है। मोहल्लेवासियों और शहर के लोगों के सहयोग से आयोजन किया जा रहा है। डेहरी में मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार की जा रही है। मां दुर्गा के साथ मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और महिषासुर की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी। पूजा पंडाल के अलावा पुरानी जीटी रोड से वन विभाग मोड़ तक आकर्षक विद्युत सजावट की जाएगी। तेलिया पोखर स्थित प्राचीन देवी मंदिर का इसी वर्ष भव्य जीर्णोद्धार कराया गया है। दो मंजिला मंदिर के ऊपरी तल पर ग्राम देवी और निचले तल पर भगवान शिव, गणेश और बजरंगबली की प्रतिमाएं स्थापित हैं। महाअष्टमी पर मंदिर परिसर में निशा पूजा होगी। इस दौरान महिलाएं हजारों दीप जलाकर मां की आराधना करेंगी। सतेंद्र नगर में स्थायी मंदिर को मिलेगा भव्य मंडप का स्वरूप शहर के सतेंद्र नगर मोहल्ले में इस वर्ष दुर्गा पूजा को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है। यहां वर्ष 2001 से मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है। इस बार पूजा समिति ने स्थायी मंदिर को ही भव्य मंडप का स्वरूप देने का निर्णय लिया है। इसके लिए डेहरी के कारीगर मंदिर को आकर्षक रूप देने में जुटे हैं। पूजा समिति ने आयोजन और सजावट के लिए करीब आठ लाख रुपए का बजट निर्धारित किया है। मंदिर से लेकर ब्लॉक मोड़ तक झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजावट की जाएगी। मंदिर के समीप तीन स्टेज बनाए जा रहे हैं। इन पर स्प्रिंग की मदद से ऐसी मूर्तियां तैयार की जा रही हैं, जो चलती हुई दिखाई देंगी।मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थायी रूप से स्थापित है। इसलिए पूजा के अवसर पर मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और महिषासुर की प्रतिमाएं तैयार कर स्थापित की जाती हैं। डेहरी के मूर्ति कलाकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं। पूजा समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि पहले मंदिर को केवल लाइटों से सजाया जाता था, लेकिन इस बार मंदिर को ही आकर्षक मंडप का रूप दिया जा रहा है। षष्ठी से नवमी तक प्रतिदिन भव्य आरती होगी। इसमें सतेंद्र नगर सहित आसपास के मोहल्लों के श्रद्धालु शामिल होंगे। मोहल्ले की कई गलियों को भी सजाने की तैयारी है। काली क्लब में 1930 से दुर्गा पूजा की परंपरा शहर की पुरानी दुर्गापूजा समितियों में काली क्लब का विशेष स्थान है। यहां वर्ष 1930 से मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है। आजादी से पहले से चली आ रही परंपरा के तहत मां दुर्गा के साथ मां भारती और मां काली की भी आराधना की जाती है। क्लब के सचिव शैलेंद्र कुमार सिंह, पूर्व सचिव शमशेर सिंह, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश, कार्यक्रम प्रमुख वीरेंद्र कुमार सिन्हा और अमिताभ कुमार सिंह के अनुसार पूजा का आयोजन मंदिर के सदस्यों, मंदिर की आमदनी और श्रद्धालुओं के सहयोग से किया जाता है। इस वर्ष भी मंदिर परिसर में करीब 10 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार की गई है। इसके साथ मां भारती, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी। कलश स्थापना के लिए अत्री नदी सूर्य मंदिर घाट से जल लाया जाएगा। सप्तमी को अखाड़ा पूजा होगी। काली क्लब की एक पुरानी पहचान दुर्गा पूजा के दौरान नाटक मंचन की परंपरा रही है। समय के साथ यह परंपरा समाप्त हो गई और उसकी जगह भक्ति जागरण ने ले ली। अब धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जोड़ा जाता है। पूजा के अवसर पर क्लब के पास स्थित महावीर क्लब और महावीर मंदिर को भी सजाया जाएगा। मंदिर से माली मोहल्ला होते हुए पुरानी जीटी रोड के कारगिल चौक तक आकर्षक विद्युत सजावट की तैयारी है। समिति के सदस्यों का कहना है कि आयोजन में आधुनिक सजावट के साथ पारंपरिक धार्मिक संस्कारों को प्राथमिकता दी जाती है। 1921 से चली आ रही परंपरा धर्मशाला परिसर में होने वाली दुर्गापूजा धार्मिक आस्था के साथ देशभक्ति की भावना का भी प्रतीक है। यहां वर्ष 1921 से मां दुर्गा के साथ भारत माता की पूजा की परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष आयोजन 105वें वर्ष में प्रवेश करेगा। आर्यन महाजन नाट्य परिषद और सरस्वती आराध्या समिति संयुक्त रूप से आयोजन करती हैं। परिषद की ओर से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना, पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक कार्यक्रम और दशमी का जुलूस निकाला जाता है। वहीं, सरस्वती आराध्या समिति सजावट और रावण वध का आयोजन करती है। धर्मशाला परिसर में शहर के विभिन्न अखाड़ों के महावीरी झंडे पहुंचते हैं। देव प्रखंड के कुंडा सहित कई गांवों के अखाड़े भी इसमें शामिल होते हैं। सप्तमी को अखाड़ों के उस्तादों को सम्मानित करने की पुरानी परंपरा है। दशमी को महावीरी झंडों के साथ भव्य जुलूस निकाला जाएगा। सरस्वती आराध्य समिति की ओर से धर्मशाला चौक से पुरानी डीपी रोड और पुरानी जीटी रोड तक आकर्षक सजावट की जाएगी। सप्तमी, अष्टमी और नवमी को भक्ति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। आर्यन महाजन नाट्य परिषद के अध्यक्ष राहुल राज ने बताया कि मां दुर्गा, काली माता और भारत माता की प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारी चल रही है। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को इस बार भी श्रद्धा और उत्साह के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। नवरात्र पर विशेष पूजा-अर्चना शहर के विराटपुर-नावाडीह मोहल्ले में स्थित प्राचीन बुढ़िया देवी माई मंदिर नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब शहर का विस्तार मुख्य रूप से विराटपुर और नावाडीह तक सीमित था, तब से बुढ़िया देवी माई को शहर की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता रहा है। मंदिर की प्राचीनता की कोई प्रमाणित तिथि उपलब्ध नहीं है। मुख्य पुजारी जयकिशोर मिश्रा बताते हैं कि उनके दादा भरोसा मिश्रा आजादी से पहले से मंदिर में पूजा करते थे। इसके बाद उनके पिता श्रीकांत मिश्रा ने पूजा की जिम्मेदारी संभाली और अब वह स्वयं मां की सेवा कर रहे हैं।स्थानीय अनुश्रुति के अनुसार, महाभारत काल में यह क्षेत्र राजा विराट से जुड़ा था। मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने यहां मां की पूजा की थी। हालांकि, इस मान्यता की पुष्टि करने वाले प्रमाणित ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। मंदिर परिसर में बुढ़िया देवी माई के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। नवरात्र के दौरान नौ लोगों द्वारा श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ किया जा रहा है। कथा वाचिका मंदाकिनी मिश्रा कथा सुना रही हैं। परिसर में भगवान शिव और बजरंगबली के मंदिर भी हैं। स्थानीय लोगों के सहयोग से कभी झोपड़ीनुमा रहे इस मंदिर का धीरे-धीरे भव्य निर्माण कराया गया। मंदिर की विशेष परंपरा यह है कि इसका कोई न कोई दरवाजा खुला रखा जाता है। नवरात्र में यहां सुबह-शाम श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। मां भारती क्लब में दिखेगा देवघर मंदिर का स्वरूप मां भारती क्लब में इस वर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर देवघर मंदिर का स्वरूप देखने को मिलेगा। मंदिर परिसर में मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार की गई है। प्रतिमा के रंग-रोगन के बाद सजावट का काम किया जा रहा है। क्लब में वर्ष 1983 में सरस्वती पूजा से धार्मिक आयोजनों की शुरुआत हुई थी। बाद में यहां दुर्गापूजा का आयोजन शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह शहर के प्रमुख पूजा आयोजनों में शामिल हो गया। क्लब ने पंडाल निर्माण और सड़कों को सजाने की परंपरा को आगे बढ़ाया। इस वर्ष मंदिर परिसर से कारगिल चौक होते हुए महाकाल मंदिर तक तथा महाराजगंज रोड में मलेशिया अस्पताल तक विद्युत सजावट की जाएगी। रमेश चौक को भी आकर्षक तरीके से सजाने की तैयारी है। क्लब के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने बताया कि इस वर्ष पूजा आयोजन पर करीब 10 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्लब के सदस्य सक्रिय रहेंगे। उन्होंने बताया कि प्रशासन के सहयोग और समिति के सदस्यों के समन्वय से प्रत्येक वर्ष पूजा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई जाती है। औरंगाबाद में दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। शहर से लेकर जिले के अलग-अलग प्रखंड मुख्यालयों और बाजारों में भव्य पूजा पंडाल बनाया जा रहा है, तो कहीं स्थायी मंदिर को ही आकर्षक मंडप का स्वरूप दिया जा रहा है। शहर की कई पुरानी पूजा समितियां अपनी ऐतिहासिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में जुटी हैं। पूजा पंडालों के निर्माण, प्रतिमाओं की तैयारी और विद्युत सजावट का काम तेजी से चल रहा है। इस बार पूजा आयोजनों पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। तेलिया पोखर में समुद्र मंथन की थीम पर बनेगा पंडाल शहर के ब्लॉक मोड़ के पास तेलिया पोखर में इस वर्ष मां शेरावाली पूजा कमेटी की ओर से भव्य दुर्गापूजा का आयोजन किया जा रहा है। यहां श्रद्धालुओं को पूजा पंडाल में समुद्र मंथन का दृश्य देखने को मिलेगा। पंडाल निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। अपने आकर्षक पंडालों के लिए पहचान रखने वाली इस कमेटी की ओर से वर्ष 1999 से दुर्गापूजा का आयोजन किया जा रहा है। कमेटी के अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि इस वर्ष पूजा आयोजन पर करीब आठ लाख रुपये खर्च करने की योजना है। मोहल्लेवासियों और शहर के लोगों के सहयोग से आयोजन किया जा रहा है। डेहरी में मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार की जा रही है। मां दुर्गा के साथ मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और महिषासुर की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी। पूजा पंडाल के अलावा पुरानी जीटी रोड से वन विभाग मोड़ तक आकर्षक विद्युत सजावट की जाएगी। तेलिया पोखर स्थित प्राचीन देवी मंदिर का इसी वर्ष भव्य जीर्णोद्धार कराया गया है। दो मंजिला मंदिर के ऊपरी तल पर ग्राम देवी और निचले तल पर भगवान शिव, गणेश और बजरंगबली की प्रतिमाएं स्थापित हैं। महाअष्टमी पर मंदिर परिसर में निशा पूजा होगी। इस दौरान महिलाएं हजारों दीप जलाकर मां की आराधना करेंगी। सतेंद्र नगर में स्थायी मंदिर को मिलेगा भव्य मंडप का स्वरूप शहर के सतेंद्र नगर मोहल्ले में इस वर्ष दुर्गा पूजा को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है। यहां वर्ष 2001 से मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है। इस बार पूजा समिति ने स्थायी मंदिर को ही भव्य मंडप का स्वरूप देने का निर्णय लिया है। इसके लिए डेहरी के कारीगर मंदिर को आकर्षक रूप देने में जुटे हैं। पूजा समिति ने आयोजन और सजावट के लिए करीब आठ लाख रुपए का बजट निर्धारित किया है। मंदिर से लेकर ब्लॉक मोड़ तक झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजावट की जाएगी। मंदिर के समीप तीन स्टेज बनाए जा रहे हैं। इन पर स्प्रिंग की मदद से ऐसी मूर्तियां तैयार की जा रही हैं, जो चलती हुई दिखाई देंगी।मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थायी रूप से स्थापित है। इसलिए पूजा के अवसर पर मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और महिषासुर की प्रतिमाएं तैयार कर स्थापित की जाती हैं। डेहरी के मूर्ति कलाकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं। पूजा समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि पहले मंदिर को केवल लाइटों से सजाया जाता था, लेकिन इस बार मंदिर को ही आकर्षक मंडप का रूप दिया जा रहा है। षष्ठी से नवमी तक प्रतिदिन भव्य आरती होगी। इसमें सतेंद्र नगर सहित आसपास के मोहल्लों के श्रद्धालु शामिल होंगे। मोहल्ले की कई गलियों को भी सजाने की तैयारी है। काली क्लब में 1930 से दुर्गा पूजा की परंपरा शहर की पुरानी दुर्गापूजा समितियों में काली क्लब का विशेष स्थान है। यहां वर्ष 1930 से मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है। आजादी से पहले से चली आ रही परंपरा के तहत मां दुर्गा के साथ मां भारती और मां काली की भी आराधना की जाती है। क्लब के सचिव शैलेंद्र कुमार सिंह, पूर्व सचिव शमशेर सिंह, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश, कार्यक्रम प्रमुख वीरेंद्र कुमार सिन्हा और अमिताभ कुमार सिंह के अनुसार पूजा का आयोजन मंदिर के सदस्यों, मंदिर की आमदनी और श्रद्धालुओं के सहयोग से किया जाता है। इस वर्ष भी मंदिर परिसर में करीब 10 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार की गई है। इसके साथ मां भारती, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी। कलश स्थापना के लिए अत्री नदी सूर्य मंदिर घाट से जल लाया जाएगा। सप्तमी को अखाड़ा पूजा होगी। काली क्लब की एक पुरानी पहचान दुर्गा पूजा के दौरान नाटक मंचन की परंपरा रही है। समय के साथ यह परंपरा समाप्त हो गई और उसकी जगह भक्ति जागरण ने ले ली। अब धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जोड़ा जाता है। पूजा के अवसर पर क्लब के पास स्थित महावीर क्लब और महावीर मंदिर को भी सजाया जाएगा। मंदिर से माली मोहल्ला होते हुए पुरानी जीटी रोड के कारगिल चौक तक आकर्षक विद्युत सजावट की तैयारी है। समिति के सदस्यों का कहना है कि आयोजन में आधुनिक सजावट के साथ पारंपरिक धार्मिक संस्कारों को प्राथमिकता दी जाती है। 1921 से चली आ रही परंपरा धर्मशाला परिसर में होने वाली दुर्गापूजा धार्मिक आस्था के साथ देशभक्ति की भावना का भी प्रतीक है। यहां वर्ष 1921 से मां दुर्गा के साथ भारत माता की पूजा की परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष आयोजन 105वें वर्ष में प्रवेश करेगा। आर्यन महाजन नाट्य परिषद और सरस्वती आराध्या समिति संयुक्त रूप से आयोजन करती हैं। परिषद की ओर से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना, पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक कार्यक्रम और दशमी का जुलूस निकाला जाता है। वहीं, सरस्वती आराध्या समिति सजावट और रावण वध का आयोजन करती है। धर्मशाला परिसर में शहर के विभिन्न अखाड़ों के महावीरी झंडे पहुंचते हैं। देव प्रखंड के कुंडा सहित कई गांवों के अखाड़े भी इसमें शामिल होते हैं। सप्तमी को अखाड़ों के उस्तादों को सम्मानित करने की पुरानी परंपरा है। दशमी को महावीरी झंडों के साथ भव्य जुलूस निकाला जाएगा। सरस्वती आराध्य समिति की ओर से धर्मशाला चौक से पुरानी डीपी रोड और पुरानी जीटी रोड तक आकर्षक सजावट की जाएगी। सप्तमी, अष्टमी और नवमी को भक्ति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। आर्यन महाजन नाट्य परिषद के अध्यक्ष राहुल राज ने बताया कि मां दुर्गा, काली माता और भारत माता की प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारी चल रही है। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को इस बार भी श्रद्धा और उत्साह के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। नवरात्र पर विशेष पूजा-अर्चना शहर के विराटपुर-नावाडीह मोहल्ले में स्थित प्राचीन बुढ़िया देवी माई मंदिर नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब शहर का विस्तार मुख्य रूप से विराटपुर और नावाडीह तक सीमित था, तब से बुढ़िया देवी माई को शहर की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता रहा है। मंदिर की प्राचीनता की कोई प्रमाणित तिथि उपलब्ध नहीं है। मुख्य पुजारी जयकिशोर मिश्रा बताते हैं कि उनके दादा भरोसा मिश्रा आजादी से पहले से मंदिर में पूजा करते थे। इसके बाद उनके पिता श्रीकांत मिश्रा ने पूजा की जिम्मेदारी संभाली और अब वह स्वयं मां की सेवा कर रहे हैं।स्थानीय अनुश्रुति के अनुसार, महाभारत काल में यह क्षेत्र राजा विराट से जुड़ा था। मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने यहां मां की पूजा की थी। हालांकि, इस मान्यता की पुष्टि करने वाले प्रमाणित ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। मंदिर परिसर में बुढ़िया देवी माई के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। नवरात्र के दौरान नौ लोगों द्वारा श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ किया जा रहा है। कथा वाचिका मंदाकिनी मिश्रा कथा सुना रही हैं। परिसर में भगवान शिव और बजरंगबली के मंदिर भी हैं। स्थानीय लोगों के सहयोग से कभी झोपड़ीनुमा रहे इस मंदिर का धीरे-धीरे भव्य निर्माण कराया गया। मंदिर की विशेष परंपरा यह है कि इसका कोई न कोई दरवाजा खुला रखा जाता है। नवरात्र में यहां सुबह-शाम श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। मां भारती क्लब में दिखेगा देवघर मंदिर का स्वरूप मां भारती क्लब में इस वर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर देवघर मंदिर का स्वरूप देखने को मिलेगा। मंदिर परिसर में मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार की गई है। प्रतिमा के रंग-रोगन के बाद सजावट का काम किया जा रहा है। क्लब में वर्ष 1983 में सरस्वती पूजा से धार्मिक आयोजनों की शुरुआत हुई थी। बाद में यहां दुर्गापूजा का आयोजन शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह शहर के प्रमुख पूजा आयोजनों में शामिल हो गया। क्लब ने पंडाल निर्माण और सड़कों को सजाने की परंपरा को आगे बढ़ाया। इस वर्ष मंदिर परिसर से कारगिल चौक होते हुए महाकाल मंदिर तक तथा महाराजगंज रोड में मलेशिया अस्पताल तक विद्युत सजावट की जाएगी। रमेश चौक को भी आकर्षक तरीके से सजाने की तैयारी है। क्लब के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने बताया कि इस वर्ष पूजा आयोजन पर करीब 10 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्लब के सदस्य सक्रिय रहेंगे। उन्होंने बताया कि प्रशासन के सहयोग और समिति के सदस्यों के समन्वय से प्रत्येक वर्ष पूजा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई जाती है।

