ओडिशा में Bauxite Mining विरोध पर Congress का BJP पर हमला, पेसा और वनाधिकार उल्लंघन का आरोप

ओडिशा में Bauxite Mining विरोध पर Congress का BJP पर हमला, पेसा और वनाधिकार उल्लंघन का आरोप

कांग्रेस ने ओडिशा में खनन परियोजनाओं का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं और स्थानीय समुदायों के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर बुधवार को भाजपा की केंद्र एवं राज्य सरकारों पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि आदिवासी समुदायों को उनके अधिकारों से वंचित करना ‘‘डबल इंजन मॉडल’’ का उदाहरण है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि 16 अक्टूबर को ओडिशा पुलिस ने चिकित्सक एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रैंडल सेक्वेरा और दलित कार्यकर्ता लक्ष्मण नाइक को हिरासत में लिया। उन्होंने कहा कि दोनों कार्यकर्ता बॉक्साइट खनन परियोजनाओं के खिलाफ दलित और आदिवासी समुदायों के प्रदर्शनों का समर्थन करते रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई ओडिशा में जारी ‘‘दमन’’ का हिस्सा है, जिसके तहत पिछले तीन वर्षों में 43 पुलिस मामले दर्ज किए गए हैं और 100 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि ओडिशा कांग्रेस और कोरापुट से कांग्रेस सांसद सप्तगिरि उलाका गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को सहायता मुहैया करा रहे हैं। रमेश ने आरोप लगाया कि सिजीमाली, कुटरुमाली और नियामगिरि में बॉक्साइट खनन परियोजनाओं को पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा), 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का ‘‘खुला उल्लंघन’’ करते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि ये इलाके संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आते हैं।

उन्होंने दावा किया कि यह नियामगिरि से संबंधित उच्चतम न्यायालय के 2013 के फैसले के भी विपरीत है, जिसमें खनन गतिविधियों के लिए सहमति नहीं देने के ग्राम सभाओं के अधिकार को बरकरार रखा गया था। कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि सिजीमाली में ग्राम सभा की सहमति से जुड़े दस्तावेजों में जालसाजी के गंभीर आरोप हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भाजपा शासित राज्यों में ऐसे कथित मामलों को ‘‘अंगूठा चोरी’’ (अंगूठे का निशान लेने में फर्जीवाड़ा) के रूप में दस्तावेजबद्ध किया है।

रमेश ने एक प्रस्तावित खदान को ‘‘मोदानी परियोजना’’ करार देते हुए केंद्र और उद्योगपति गौतम अदाणी के बीच कथित निकटता की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मई 2026 में सिजीमाली परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी दी थी। रमेश के मुताबिक, पिछले महीने ओडिशा के मुख्यमंत्री ने ऐसी परियोजनाओं को ‘‘हर संभव सहयोग’’ देने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद कार्यकर्ताओं और स्थानीय समुदायों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘आदिवासी समुदायों को उनके अधिकारों से वंचित करने वाला डबल इंजन मॉडल इसी तरह काम करता है।’’

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