लद्दाख के उपराज्यपाल (एलजी) विनय कुमार सक्सेना ने वर्ष 2025 में लेह में हुई हिंसा के सिलसिले में 10 और लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लिए जाने को मंजूरी दी है। एलजी ने बुधवार को एक्स पर एक पोस्ट कर इस संबंध में जानकारी दी। इस नवीनतम फैसले के साथ ही पिछले तीन महीनों में 87 मामलों में आरोपी कुल 55 लोगों को राहत मिल चुकी है।
ये मामले केंद्रशासित प्रदेश को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची का विस्तार करने की मांग को लेकर पिछले साल 24 सितंबर को हुए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा से जुड़े हैं। आपराधिक मामले वापस लेना नागरिक समाज संगठनों ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) और ‘करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ (केडीए) की प्रमुख मांग रही है। ये संगठन केंद्रशासित प्रदेश के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों और राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर पिछले पांच वर्षों से केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं।
लेह में हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। उपराज्यपाल ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘लद्दाख में एकता, आपसी सौहार्द और स्थायी शांति को बढ़ावा देने की हमारी निरंतर प्रतिबद्धता के तहत मैंने 10 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने को मंजूरी दे दी है, जो पिछले साल 24 सितंबर को लेह में भड़की दुर्भाग्यपूर्ण हिंसा से जुड़े थे।’’
उन्होंने कहा कि यह मंजूरी लद्दाख पुलिस की सिफारिश पर दी गई है। सक्सेना ने कहा, ‘‘इस फैसले से इन लोगों को अपने करियर और जीवन में आगे बढ़ने का सकारात्मक अवसर मिलेगा।
यह लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय न्याय, उपचार और पुनर्वास को प्राथमिकता देता है, जिससे पूरे क्षेत्र में शांति, एकता और सामाजिक सद्भाव की भावना मजबूत होगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पीड़ितों और उनके परिवारों से जुड़े मामलों में सहानुभूतिपूर्ण और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने के लिए मैं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।’’
सितंबर में उपराज्यपाल ने 20 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने की घोषणा की थी। इससे पहले, अगस्त में प्रशासन ने 25 लोगों के खिलाफ मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की योजना की घोषणा की थी, जिनके खिलाफ हिंसा के सिलसिले में मामला दर्ज किए गए थे।

