गोंडा में माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन काम में लापरवाही पर डीआईओएस डॉ. रामचंद्र ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार शाम 4:30 बजे उन्होंने सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्त विहीन हाईस्कूल-इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को नोटिस जारी किया। लंबित ऑनलाइन काम तत्काल शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। डीआईओएस ने जिले की रैंकिंग 75वें नंबर पर होने पर नाराजगी जताई है। सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रधानाचार्यों का वेतन रोकने की चेतावनी डीआईओएस ने कहा कि विभागीय योजनाओं का काम ऑनलाइन पूरा किया जाना है। विद्यालयों की लापरवाही के कारण जिले की रैंकिंग खराब है। इसे उच्चाधिकारियों और विभागीय निर्देशों की अवहेलना माना गया है। आदेश में कहा गया है कि सहायता प्राप्त विद्यालयों में काम अधूरा मिलने पर संबंधित प्रधानाचार्य का वेतन अग्रिम आदेश तक रोका जा सकता है। इन ऑनलाइन कामों को पूरा करने के निर्देश विद्यालयों को एसएचवीआर पर नामांकन और सर्वेक्षण पूरा करना होगा। प्रशस्त एप पर शिक्षकों के 10 संवेदनशीलता वीडियो पूरे करने होंगे। यूपीएमएसपी पर शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों की शत-प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसके अलावा ईको क्लब की गतिविधियां संचालित करनी होंगी। मिशन कर्मयोगी के निर्धारित कोर्स पूरे करने होंगे। छात्र-छात्राओं के अलग-अलग शौचालय की जानकारी दर्ज करनी होगी। यू-डायस प्लस और यूपीएमएसपी में विद्यार्थियों के आंकड़ों का अंतर भी शून्य करना होगा। सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रधानाचार्यों की जिम्मेदारी बढ़ाई डीआईओएस ने सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को अपने स्कूल के साथ आसपास के विद्यालयों का काम भी पूरा कराने की जिम्मेदारी दी है। उन्होंने सभी लंबित कार्यों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। वित्त विहीन स्कूलों पर भी होगी कार्रवाई वित्त विहीन विद्यालयों में काम अधूरा मिलने पर प्रबंधन समिति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। संबंधित स्कूल को बोर्ड परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भी भेजा जाएगा। डीआईओएस बोले- इस बार आखिरी नोटिस डीआईओएस डॉ. रामचंद्र ने बताया कि विद्यालयों को पहले भी कई बार नोटिस दिए जा चुके हैं। इस बार आखिरी नोटिस दिया गया है। लापरवाही करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। शिक्षकों और छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है। जिले की रैंकिंग काफी खराब है। इसे सुधारने के लिए सभी विद्यालयों को गंभीरता से काम करना होगा।

