गोपालगंज में बंजारी बाईपास पर पूर्व सांसद स्व. काली प्रसाद पांडेय की प्रतिमा लगाने की मांग को लेकर उनकी पत्नी मंजू माला देवी बुधवार को धरने पर बैठ गईं। मामले की जानकारी मिलने के बाद भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। प्रतिमा लगाने को लेकर यहां विवाद की स्थिति बनी हुई है। मंजू माला देवी ने प्रतिमा स्थापित करने की मांग को लेकर सदर SDO डॉ. प्रेरणा सिंह को पत्र सौंपा। उन्होंने प्रशासन से बंजारी बाईपास पर प्रतिमा लगाने की अनुमति देने की मांग की। प्रशासन की ओर से उनकी मांग को जिला के वरीय अधिकारियों के पास भेजकर नियमानुसार विचार करने का आश्वासन दिया गया। मामले से जुड़ी 2 तस्वीरें… फोटो हटाए जाने के विरोध में धरने पर बैठीं धरने के दौरान मंजू माला देवी ने कहा कि उनके कार्यकर्ताओं ने मंगलवार रात बंजारी बाईपास पर काली प्रसाद पांडेय का फोटो लगाया था, जिसे बुधवार को हटा दिया गया। फोटो हटाए जाने के विरोध में वह धरने पर बैठी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि काली प्रसाद पांडेय केवल एक राजनीतिक दल के नेता नहीं थे, बल्कि सभी दलों के नेताओं से उनके संबंध रहे थे। वहीं, प्रशासन की ओर से वरीय अधिकारियों के स्तर पर मामले पर विचार करने की बात कही गई है। गोपालगंज में बंजारी बाईपास पर पूर्व सांसद स्व. काली प्रसाद पांडेय की प्रतिमा लगाने की मांग को लेकर उनकी पत्नी मंजू माला देवी बुधवार को धरने पर बैठ गईं। मामले की जानकारी मिलने के बाद भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। प्रतिमा लगाने को लेकर यहां विवाद की स्थिति बनी हुई है। मंजू माला देवी ने प्रतिमा स्थापित करने की मांग को लेकर सदर SDO डॉ. प्रेरणा सिंह को पत्र सौंपा। उन्होंने प्रशासन से बंजारी बाईपास पर प्रतिमा लगाने की अनुमति देने की मांग की। प्रशासन की ओर से उनकी मांग को जिला के वरीय अधिकारियों के पास भेजकर नियमानुसार विचार करने का आश्वासन दिया गया। मामले से जुड़ी 2 तस्वीरें… फोटो हटाए जाने के विरोध में धरने पर बैठीं धरने के दौरान मंजू माला देवी ने कहा कि उनके कार्यकर्ताओं ने मंगलवार रात बंजारी बाईपास पर काली प्रसाद पांडेय का फोटो लगाया था, जिसे बुधवार को हटा दिया गया। फोटो हटाए जाने के विरोध में वह धरने पर बैठी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि काली प्रसाद पांडेय केवल एक राजनीतिक दल के नेता नहीं थे, बल्कि सभी दलों के नेताओं से उनके संबंध रहे थे। वहीं, प्रशासन की ओर से वरीय अधिकारियों के स्तर पर मामले पर विचार करने की बात कही गई है।

