एशियन पैरा गेम्स 2026 में बिहार के जमुई जिले के पैरा एथलीट शैलेश कुमार ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। उन्होंने गुरुवार को पुरुषों की हाई जंप टी-63 स्पर्धा में 1.89 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। इससे पहले बुधवार को शैलेश ने पुरुषों की लॉन्ग जंप टी- 42/टी- 61/ टी- 63 स्पर्धा में 5.57 मीटर छलांग के साथ कांस्य पदक हासिल किया था। इस तरह शैलेश कुमार ने एशियाई पैरा खेलों में अब तक दो पदक अपने नाम कर लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें बधाई दे चुके हैं। मुकाबले जापान में हो रहे हैं। बचपन से ही दाहिने पैर में पोलियो पैरा एथलेटिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले शैलेश कुमार का जन्म जमुई के इस्लामनगर गांव में हुआ था। उन्हें बचपन से दाहिने पैर में पोलियो है। वे एक किसान परिवार से आते हैं। माता-पिता उन्हें अफसर बनाना चाहते थे। लेकिन, उन्हें स्पोर्ट्स में अपना करियर बनाना था। उन्होंने खेत में नंगे पांव प्रैक्टिस शुरू की। परिवार वालों ने उनके लिए कर्ज लिया। पिता को खेत भी गिरवी रखनी पड़ी थी। शैलेश कहते हैं ‘लोग ताने मारते थे। कहते थे लंगड़ाते हुए ओलिंपिक मेडल कैसे हासिल करोगे। मैंने अपनी मेहनत से सबका मुंह बंद कर दिया है।’ नंगे पांव दौड़ते हुए नेशनल चैंपियनशिप में मेडल जीता शैलेश ने बताया कि ‘स्कूल में जब प्रतियोगिता होती थी तो उनका नाम किसी ने बिना पूछे दे दिया था। अपना नाम सुनकर काफी आश्चर्य हुआ, लेकिन तीनों प्रतियोगिता में उन्होंने भाग लिया और अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद से स्पोर्ट्स के लिए रुचि जाग गई।’ वे 2011 से स्पोर्ट्स में एक्टिव हैं। जब फैमिली से स्पोर्ट्स में करियर बनाने की बात कही तो सभी ने मना कर दिया। उनका कहना था कि पढ़ाई करके अफसर बनो, लेकिन बड़े भाई ने काफी सपोर्ट किया। शैलेश नंगे पांव खेत में दौड़कर प्रैक्टिस करते थे। प्रोपर स्पोर्ट्स शू के लिए पैसे तक नहीं थे। 2017 में जयपुर में आयोजित नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नंगे पांव खेलते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
बाल विकास प्रोजेक्ट ऑफिसर भी हैं शैलेश कुमार एशियन पैरा गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता हैं। इस उपलब्धि और योग्यता के आधार पर बिहार सरकार ने ‘मेडल लाओ नौकरी पाओ’ के तहत उन्हें क्लास वन की सरकारी नौकरी देकर सम्मानित किया है। शैलेश अभी समाज कल्याण विभाग में बाल विकास प्रोजेक्ट ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं। एशियन पैरा गेम्स 2026 में बिहार के जमुई जिले के पैरा एथलीट शैलेश कुमार ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। उन्होंने गुरुवार को पुरुषों की हाई जंप टी-63 स्पर्धा में 1.89 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। इससे पहले बुधवार को शैलेश ने पुरुषों की लॉन्ग जंप टी- 42/टी- 61/ टी- 63 स्पर्धा में 5.57 मीटर छलांग के साथ कांस्य पदक हासिल किया था। इस तरह शैलेश कुमार ने एशियाई पैरा खेलों में अब तक दो पदक अपने नाम कर लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें बधाई दे चुके हैं। मुकाबले जापान में हो रहे हैं। बचपन से ही दाहिने पैर में पोलियो पैरा एथलेटिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले शैलेश कुमार का जन्म जमुई के इस्लामनगर गांव में हुआ था। उन्हें बचपन से दाहिने पैर में पोलियो है। वे एक किसान परिवार से आते हैं। माता-पिता उन्हें अफसर बनाना चाहते थे। लेकिन, उन्हें स्पोर्ट्स में अपना करियर बनाना था। उन्होंने खेत में नंगे पांव प्रैक्टिस शुरू की। परिवार वालों ने उनके लिए कर्ज लिया। पिता को खेत भी गिरवी रखनी पड़ी थी। शैलेश कहते हैं ‘लोग ताने मारते थे। कहते थे लंगड़ाते हुए ओलिंपिक मेडल कैसे हासिल करोगे। मैंने अपनी मेहनत से सबका मुंह बंद कर दिया है।’ नंगे पांव दौड़ते हुए नेशनल चैंपियनशिप में मेडल जीता शैलेश ने बताया कि ‘स्कूल में जब प्रतियोगिता होती थी तो उनका नाम किसी ने बिना पूछे दे दिया था। अपना नाम सुनकर काफी आश्चर्य हुआ, लेकिन तीनों प्रतियोगिता में उन्होंने भाग लिया और अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद से स्पोर्ट्स के लिए रुचि जाग गई।’ वे 2011 से स्पोर्ट्स में एक्टिव हैं। जब फैमिली से स्पोर्ट्स में करियर बनाने की बात कही तो सभी ने मना कर दिया। उनका कहना था कि पढ़ाई करके अफसर बनो, लेकिन बड़े भाई ने काफी सपोर्ट किया। शैलेश नंगे पांव खेत में दौड़कर प्रैक्टिस करते थे। प्रोपर स्पोर्ट्स शू के लिए पैसे तक नहीं थे। 2017 में जयपुर में आयोजित नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नंगे पांव खेलते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
बाल विकास प्रोजेक्ट ऑफिसर भी हैं शैलेश कुमार एशियन पैरा गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता हैं। इस उपलब्धि और योग्यता के आधार पर बिहार सरकार ने ‘मेडल लाओ नौकरी पाओ’ के तहत उन्हें क्लास वन की सरकारी नौकरी देकर सम्मानित किया है। शैलेश अभी समाज कल्याण विभाग में बाल विकास प्रोजेक्ट ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं।

