एशियन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट हरियाणवी कुशल की कहानी:3 खेल छोड़ आर्चरी चुनी, बॉक्सिंग पर कहा था-चोट नहीं मार सकता; ट्रेनिंग कराते-कराते मां अकाउंटेंट बनीं

एशियन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट हरियाणवी कुशल की कहानी:3 खेल छोड़ आर्चरी चुनी, बॉक्सिंग पर कहा था-चोट नहीं मार सकता; ट्रेनिंग कराते-कराते मां अकाउंटेंट बनीं

जापान में चल रहे एशियन गेम्स में बुधवार का दिन भारतीय आर्चरी (तीरंदाजी) के इतिहास में सुनहरा पल रहा है। चार में से 3 गोल्ड आर्चरी में आए। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले 21 वर्षीैय कुशल दलाल का नाम भी चमका, जिसने कंपाउंड टीम इवेंट में गोल्ड पर अचूक निशाना लगाया। एशियन गेम्स के इस ‘गोल्डन बॉय’ की यह कामयाबी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। कभी गांव के शुद्ध दूध-घी के चक्कर में इतना ओवरवेट हो गया था कि घरवालों को उसकी सेहत की फिक्र सताने लगी थी। फिटनेस सुधारने के लिए पिता ने पहले रेसर और फिर पहलवान बनाने अखाड़े भेजा, तो मां को लगा पढ़ाई छूट जाएगी। फिर बॉक्सिंग में हाथ आजमाने रोहतक पहुंचे, तो नन्हे कुशल ने मासूमियत से कहा- मां, मुझसे किसी को पंच नहीं मारा जाएगा, मैं किसी को चोट नहीं पहुंचा सकता। दूसरों को नुकसान न पहुंचाने वाले इसी कोमल स्वभाव के लड़के ने जब तीरंदाजी जॉइन की तो निशाना सीधे एशियन गेम्स के गोल्ड पर लगा। कुशल की इस सफलता में उनकी मां गीता ने अहम भूमिका निभाई। रोचक बातें ये भी कि बेटे की ट्रेनिंग के वक्त मां स्टेडियम में ही बैठकर सरकारी नौकरी की तैयारी करतीं और इसी मेहनत के दम पर अकाउंटेंट बन गईं। वहीं, कुशल की फैमिली काफी बड़ी है। परिवार में उसके 17 दादा और 25 चाचा हैं। पढ़िए दैनिक भास्कर की पूरी रिपोर्ट… सोनीपत से एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचने की कहानी… 2018 में पहला गोल्ड, यूथ वर्ल्ड में डबल धमाल कुशल ने 2018 में अंडर-14 वर्ग में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में पहला गोल्ड मेडल जीता। मां के अनुसार, इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। खेलो इंडिया में चयन हुआ और हरियाणा की खेल नीति का भी उसे लाभ मिला। इसके बाद नेशनल स्कूल गेम्स में सिल्वर मेडल सहित अलग-अलग प्रतियोगिताओं में लगातार पदक हासिल करता रहा। कुशल ने 2021 में पोलैंड में हुई यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल हासिल किए। वह अब तक सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर तीनों कैटेगरी में 15 से ज्यादा मेडल जीत चुका है। हर प्रतियोगिता के साथ उसका लक्ष्य भी बड़ा होता गया और अब एशियन गेम्स में देश के लिए गोल्ड जीतकर उसने परिवार और सोनीपत का नाम रोशन किया है। वीडियो कॉल पर कुशल ने बताईं जीत तक पहुंचने की ट्रिक.. कुशल की फैमिली और हॉबी के बारे में जानिए… —————————– ये खबर भी पढ़ें…. ‘लड़कों से बात करती है, गलत जा रही है’:घरवालों ने खेल छुड़वाया, कोच के जूते पहनकर भी दौड़ीं; जानें गोल्ड मेडलिस्ट किरण की कहानी हरियाणा के सोनीपत की एथलीट किरण पहल मंगलवार को एशियन गेम्स के रिले इवेंट में गोल्ड और टीम इवेंट में सिल्वर जीतकर सुर्खियों में आ गईं। किरण 1 अक्टूबर को गांव पहुंचेंगी। यहां उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा। (पूरी खबर पढ़ें) जापान में चल रहे एशियन गेम्स में बुधवार का दिन भारतीय आर्चरी (तीरंदाजी) के इतिहास में सुनहरा पल रहा है। चार में से 3 गोल्ड आर्चरी में आए। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले 21 वर्षीैय कुशल दलाल का नाम भी चमका, जिसने कंपाउंड टीम इवेंट में गोल्ड पर अचूक निशाना लगाया। एशियन गेम्स के इस ‘गोल्डन बॉय’ की यह कामयाबी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। कभी गांव के शुद्ध दूध-घी के चक्कर में इतना ओवरवेट हो गया था कि घरवालों को उसकी सेहत की फिक्र सताने लगी थी। फिटनेस सुधारने के लिए पिता ने पहले रेसर और फिर पहलवान बनाने अखाड़े भेजा, तो मां को लगा पढ़ाई छूट जाएगी। फिर बॉक्सिंग में हाथ आजमाने रोहतक पहुंचे, तो नन्हे कुशल ने मासूमियत से कहा- मां, मुझसे किसी को पंच नहीं मारा जाएगा, मैं किसी को चोट नहीं पहुंचा सकता। दूसरों को नुकसान न पहुंचाने वाले इसी कोमल स्वभाव के लड़के ने जब तीरंदाजी जॉइन की तो निशाना सीधे एशियन गेम्स के गोल्ड पर लगा। कुशल की इस सफलता में उनकी मां गीता ने अहम भूमिका निभाई। रोचक बातें ये भी कि बेटे की ट्रेनिंग के वक्त मां स्टेडियम में ही बैठकर सरकारी नौकरी की तैयारी करतीं और इसी मेहनत के दम पर अकाउंटेंट बन गईं। वहीं, कुशल की फैमिली काफी बड़ी है। परिवार में उसके 17 दादा और 25 चाचा हैं। पढ़िए दैनिक भास्कर की पूरी रिपोर्ट… सोनीपत से एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचने की कहानी… 2018 में पहला गोल्ड, यूथ वर्ल्ड में डबल धमाल कुशल ने 2018 में अंडर-14 वर्ग में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में पहला गोल्ड मेडल जीता। मां के अनुसार, इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। खेलो इंडिया में चयन हुआ और हरियाणा की खेल नीति का भी उसे लाभ मिला। इसके बाद नेशनल स्कूल गेम्स में सिल्वर मेडल सहित अलग-अलग प्रतियोगिताओं में लगातार पदक हासिल करता रहा। कुशल ने 2021 में पोलैंड में हुई यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल हासिल किए। वह अब तक सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर तीनों कैटेगरी में 15 से ज्यादा मेडल जीत चुका है। हर प्रतियोगिता के साथ उसका लक्ष्य भी बड़ा होता गया और अब एशियन गेम्स में देश के लिए गोल्ड जीतकर उसने परिवार और सोनीपत का नाम रोशन किया है। वीडियो कॉल पर कुशल ने बताईं जीत तक पहुंचने की ट्रिक.. कुशल की फैमिली और हॉबी के बारे में जानिए… —————————– ये खबर भी पढ़ें…. ‘लड़कों से बात करती है, गलत जा रही है’:घरवालों ने खेल छुड़वाया, कोच के जूते पहनकर भी दौड़ीं; जानें गोल्ड मेडलिस्ट किरण की कहानी हरियाणा के सोनीपत की एथलीट किरण पहल मंगलवार को एशियन गेम्स के रिले इवेंट में गोल्ड और टीम इवेंट में सिल्वर जीतकर सुर्खियों में आ गईं। किरण 1 अक्टूबर को गांव पहुंचेंगी। यहां उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा। (पूरी खबर पढ़ें)

​स्पोर्ट्स | दैनिक भास्कर

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