अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवादों के समाधान में भाषा की भूमिका को रेखांकित करते हुए एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के कार्यक्रम हुआ। यहां एमिटी लॉ स्कूल द्वारा स्टूडेंट वेलफेयर विभाग के सहयोग से ‘अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में हिंदी की भूमिका: अवसर एवं चुनौतियां’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रो. (डॉ.) अमर पाल सिंह उपस्थित रहे। प्रो वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ, उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के रजिस्ट्रार-कम-प्रिंसिपल बेंच सेक्रेटरी महेंद्र प्रताप अवस्थी, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. राजीव वर्मा तथा एमिटी लॉ स्कूल के निदेशक प्रो. (डॉ.) तपन कुमार चंडोला सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। समापन सत्र में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंगनाथ पांडे, पूर्व न्यायाधीश एवं गवर्नर के कानूनी सलाहकार एस.एस. उपाध्याय शामिल हुए। प्रो वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ ने कहा कि वर्तमान दौर संचार का दौर है और संचार का मूल आधार भाषा है। भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। प्रो. (डॉ.) अमर पाल सिंह ने कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं को अधिक सुगम, समावेशी और व्यापक बनाने के लिए निरंतर संवाद आवश्यक है। समापन सत्र में मुख्य अतिथि जस्टिस रंगनाथ पांडे ने कहा कि हमें हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए। कोई भी कार्य कठिन हो सकता है, लेकिन असंभव नहीं। समापन पर एमिटी लॉ स्कूल की संकाय सदस्य डा. मुद्रा सिंह, डा. कुमकुम श्रीवास्तव, डॉ शोभा देवी सम्मेलन का संचालन एवं समन्वय किया।

