नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के मुख्य परिसर में गुरुवार को पीजी सत्र 2024-26 के छात्र-छात्राओं ने परिणाम जारी करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी। कुलपति प्रोफेसर रवीन्द्र कुमार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का सीधा आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही और सुस्त कार्यप्रणाली के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से एसटीईटी 2026 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसकी अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित है। समय पर पीजी का रिजल्ट घोषित नहीं होने के कारण सैकड़ों परीक्षार्थी इस महत्वपूर्ण पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं, जिसके चलते छात्र-छात्राओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। एसटीईटी और शिक्षक बहाली से बाहर होने का सता रहा डर यूनिवर्सिटी परिसर में प्रदर्शन कर रहे अक्षय कुमार का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से शिक्षक बनने का सपना संजोए लगातार तैयारी कर रहे हैं। एसटीईटी परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए स्नातकोत्तर उत्तीर्ण होना अनिवार्य शर्त है। यदि 31 अगस्त तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अंतिम परीक्षा परिणाम प्रकाशित नहीं किया जाता है, तो वे सीधे तौर पर एसटीईटी के आवेदन से बाहर हो जाएंगे। इसके साथ ही आगामी बीपीएससी टीआरई 4 शिक्षक भर्ती परीक्षा में भी उच्च माध्यमिक शिक्षक (कक्षा 11-12) के पद पर आवेदन करने का उनका अवसर हमेशा के लिए छिन जाएगा। छात्रों ने बताया कि कई अभ्यर्थियों का स्नातक स्तर पर विषय संयोजन सही नहीं होने की वजह से वे कक्षा 6 से 8 या 9 से 10 के शिक्षक पदों के लिए योग्य नहीं हैं, ऐसे में उनके पास केवल पीजी के आधार पर कक्षा 11-12 में शिक्षक बनने का ही एकमात्र रास्ता शेष है। परीक्षा और रिजल्ट में देरी का आरोप प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर नियमों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एडमिशन के वक्त मिले प्रॉस्पेक्टस के अनुसार परीक्षाएं मई माह में संपन्न हो जानी चाहिए थी। जुलाई तक परिणाम घोषित किए जाने का स्पष्ट प्रावधान था। विश्वविद्यालय की लचर व्यवस्था के चलते परीक्षाएं ही काफी विलंब से आयोजित की गईं। जुलाई के अंतिम सप्ताह में परीक्षाएं समाप्त होने के बावजूद लगभग एक माह बीत जाने पर भी मूल्यांकन कार्य पूरा नहीं किया जा सका। छात्रों का तर्क है कि जब परीक्षा में देरी विश्वविद्यालय प्रशासन की वजह से हुई है, तो उसका खामियाजा निर्दोष और गरीब छात्र क्यों भुगतें। अन्य विश्वविद्यालयों ने शिक्षक बहाली की गंभीरता को समझते हुए आपातकालीन स्तर पर कॉपियों की जांच करवाकर परिणाम जारी कर दिए हैं, लेकिन नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी का प्रशासन छात्रों के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। भूख हड़ताल और आत्मदाह की दी चेतावनी विश्वविद्यालय कैंपस में नालंदा जिले के अलावा पटना, वैशाली, बिहटा, महुआ, सुपौल और हाजीपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंचे थे। कई छात्र अपनी निजी नौकरियों और जरूरी कार्यों को छोड़कर केवल अपना भविष्य बचाने की गुहार लगाने आए थे। प्रदर्शन में शामिल आक्रोशित छात्रों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 31 अगस्त से पहले आधिकारिक नोटिस जारी कर रिजल्ट प्रकाशित नहीं किया गया, तो वे विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। छात्रों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकांश परीक्षार्थी साधारण और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं, जिनके पास रोजगार ही जीवन-यापन का एकमात्र सहारा है। यदि विश्वविद्यालय ने उनकी गुहार नहीं सुनी और उनका करियर बर्बाद हुआ, तो वे कैंपस में आत्मदाह जैसे अतिवादी कदम उठाने को विवश होंगे, जिसकी पूरी जवाबदेही कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। शिक्षक बनने की आखिरी उम्मीद पर संकट प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं ने अपनी व्यक्तिगत परेशानियां साझा करते हुए कहा कि मनोविज्ञान, भौतिकी, रसायन शास्त्र, जूलॉजी, गणित, हिंदी और वाणिज्य समेत तमाम विभागों के छात्र रिजल्ट के इंतजार में दर-दर भटक रहे हैं। कई छात्रों ने बताया कि वे बीते तीन-चार सालों से टीआरई की अगली बहाली का इंतजार कर रहे थे। अब जब अवसर सामने आया है, तो विश्वविद्यालय की लेटलतीफी उनके पैरों की बेड़ी बन गई है। साक्षी गुप्ता ने बताया कि पूर्व में भी टीआरई 2 के दौरान उत्पन्न हुई ऐसी ही स्थिति में त्वरित निर्णय लेकर रिजल्ट प्रकाशित किया गया था, लेकिन इस बार अधिकारी ठोस कदम उठाने के बजाय केवल आश्वासन दे रहे हैं। छात्रों ने मांग की कि कुलपति तत्काल आपात बैठक बुलाकर मूल्यांकन प्रक्रिया को युद्धस्तर पर पूरा करवाएं और एसटीईटी की अंतिम तिथि से पूर्व अंकपत्र जारी कराएं। गोपनीयता और कोडिंग व्यवस्था के कारण लग रहा समय छात्रों के हंगामे और तालाबंदी के बाद कुलपति प्रोफेसर रवीन्द्र कुमार ने पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट की। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रत्येक सत्र पूरी तरह नियमित है और सभी परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता व निष्ठा के साथ संचालित की जाती हैं। पीजी की परीक्षाएं 22 और 26 जुलाई के आसपास समाप्त हुई हैं और वर्तमान में प्रायोगिक परीक्षाएं भी चल रही हैं। विश्वविद्यालय में पीजी संकाय में विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है। परीक्षा की शुचिता, गोपनीयता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं की विशेष कोडिंग कराई जाती है, जिसके उपरांत डिकोडिंग और मार्क्स फाइलिंग की एक लंबी प्रक्रिया होती है। बिना भौतिक मूल्यांकन के गुणवत्ताविहीन तरीके से जल्दबाजी में रिजल्ट देना विश्वविद्यालय के नियमों के खिलाफ होगा। सितंबर में रिजल्ट का कैलेंडर, 50 से 60 फीसदी कॉपियों की जांच पूरी कुलपति प्रो. रवीन्द्र कुमार ने आगे बताया कि परीक्षा कैलेंडर के तहत राजभवन को पहले ही लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है कि सत्र 2024-26 का अंतिम परीक्षा परिणाम सितंबर माह में प्रकाशित किया जाएगा। एसटीईटी की अचानक आई अधिसूचना के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। इसके बावजूद छात्र हित को ध्यान में रखते हुए परीक्षकों को इसी माह के अंत तक मूल्यांकन कार्य पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया गया है। गणित, भौतिकी, प्राणि विज्ञान, वाणिज्य और भूगोल जैसे प्रमुख विषयों में परीक्षार्थियों की भारी संख्या होने के बावजूद लगभग 50 से 60 प्रतिशत कॉपियों का मूल्यांकन संपन्न कराया जा चुका है। जिन विषयों की जांच पूरी हो रही है, उनके प्राप्तांकों की टीआर पोस्टिंग का कार्य भी समानांतर रूप से जारी है। मूल्यांकन समाप्त होते ही दो से तीन दिनों के भीतर परिणाम जारी करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कुलपति ने छात्रों के प्रति पूर्ण सहानुभूति जताते हुए शांति बनाए रखने और विश्वविद्यालय कार्य में सहयोग करने की अपील की। नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के मुख्य परिसर में गुरुवार को पीजी सत्र 2024-26 के छात्र-छात्राओं ने परिणाम जारी करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी। कुलपति प्रोफेसर रवीन्द्र कुमार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का सीधा आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही और सुस्त कार्यप्रणाली के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से एसटीईटी 2026 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसकी अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित है। समय पर पीजी का रिजल्ट घोषित नहीं होने के कारण सैकड़ों परीक्षार्थी इस महत्वपूर्ण पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं, जिसके चलते छात्र-छात्राओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। एसटीईटी और शिक्षक बहाली से बाहर होने का सता रहा डर यूनिवर्सिटी परिसर में प्रदर्शन कर रहे अक्षय कुमार का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से शिक्षक बनने का सपना संजोए लगातार तैयारी कर रहे हैं। एसटीईटी परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए स्नातकोत्तर उत्तीर्ण होना अनिवार्य शर्त है। यदि 31 अगस्त तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अंतिम परीक्षा परिणाम प्रकाशित नहीं किया जाता है, तो वे सीधे तौर पर एसटीईटी के आवेदन से बाहर हो जाएंगे। इसके साथ ही आगामी बीपीएससी टीआरई 4 शिक्षक भर्ती परीक्षा में भी उच्च माध्यमिक शिक्षक (कक्षा 11-12) के पद पर आवेदन करने का उनका अवसर हमेशा के लिए छिन जाएगा। छात्रों ने बताया कि कई अभ्यर्थियों का स्नातक स्तर पर विषय संयोजन सही नहीं होने की वजह से वे कक्षा 6 से 8 या 9 से 10 के शिक्षक पदों के लिए योग्य नहीं हैं, ऐसे में उनके पास केवल पीजी के आधार पर कक्षा 11-12 में शिक्षक बनने का ही एकमात्र रास्ता शेष है। परीक्षा और रिजल्ट में देरी का आरोप प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर नियमों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एडमिशन के वक्त मिले प्रॉस्पेक्टस के अनुसार परीक्षाएं मई माह में संपन्न हो जानी चाहिए थी। जुलाई तक परिणाम घोषित किए जाने का स्पष्ट प्रावधान था। विश्वविद्यालय की लचर व्यवस्था के चलते परीक्षाएं ही काफी विलंब से आयोजित की गईं। जुलाई के अंतिम सप्ताह में परीक्षाएं समाप्त होने के बावजूद लगभग एक माह बीत जाने पर भी मूल्यांकन कार्य पूरा नहीं किया जा सका। छात्रों का तर्क है कि जब परीक्षा में देरी विश्वविद्यालय प्रशासन की वजह से हुई है, तो उसका खामियाजा निर्दोष और गरीब छात्र क्यों भुगतें। अन्य विश्वविद्यालयों ने शिक्षक बहाली की गंभीरता को समझते हुए आपातकालीन स्तर पर कॉपियों की जांच करवाकर परिणाम जारी कर दिए हैं, लेकिन नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी का प्रशासन छात्रों के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। भूख हड़ताल और आत्मदाह की दी चेतावनी विश्वविद्यालय कैंपस में नालंदा जिले के अलावा पटना, वैशाली, बिहटा, महुआ, सुपौल और हाजीपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंचे थे। कई छात्र अपनी निजी नौकरियों और जरूरी कार्यों को छोड़कर केवल अपना भविष्य बचाने की गुहार लगाने आए थे। प्रदर्शन में शामिल आक्रोशित छात्रों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 31 अगस्त से पहले आधिकारिक नोटिस जारी कर रिजल्ट प्रकाशित नहीं किया गया, तो वे विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। छात्रों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकांश परीक्षार्थी साधारण और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं, जिनके पास रोजगार ही जीवन-यापन का एकमात्र सहारा है। यदि विश्वविद्यालय ने उनकी गुहार नहीं सुनी और उनका करियर बर्बाद हुआ, तो वे कैंपस में आत्मदाह जैसे अतिवादी कदम उठाने को विवश होंगे, जिसकी पूरी जवाबदेही कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। शिक्षक बनने की आखिरी उम्मीद पर संकट प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं ने अपनी व्यक्तिगत परेशानियां साझा करते हुए कहा कि मनोविज्ञान, भौतिकी, रसायन शास्त्र, जूलॉजी, गणित, हिंदी और वाणिज्य समेत तमाम विभागों के छात्र रिजल्ट के इंतजार में दर-दर भटक रहे हैं। कई छात्रों ने बताया कि वे बीते तीन-चार सालों से टीआरई की अगली बहाली का इंतजार कर रहे थे। अब जब अवसर सामने आया है, तो विश्वविद्यालय की लेटलतीफी उनके पैरों की बेड़ी बन गई है। साक्षी गुप्ता ने बताया कि पूर्व में भी टीआरई 2 के दौरान उत्पन्न हुई ऐसी ही स्थिति में त्वरित निर्णय लेकर रिजल्ट प्रकाशित किया गया था, लेकिन इस बार अधिकारी ठोस कदम उठाने के बजाय केवल आश्वासन दे रहे हैं। छात्रों ने मांग की कि कुलपति तत्काल आपात बैठक बुलाकर मूल्यांकन प्रक्रिया को युद्धस्तर पर पूरा करवाएं और एसटीईटी की अंतिम तिथि से पूर्व अंकपत्र जारी कराएं। गोपनीयता और कोडिंग व्यवस्था के कारण लग रहा समय छात्रों के हंगामे और तालाबंदी के बाद कुलपति प्रोफेसर रवीन्द्र कुमार ने पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट की। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रत्येक सत्र पूरी तरह नियमित है और सभी परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता व निष्ठा के साथ संचालित की जाती हैं। पीजी की परीक्षाएं 22 और 26 जुलाई के आसपास समाप्त हुई हैं और वर्तमान में प्रायोगिक परीक्षाएं भी चल रही हैं। विश्वविद्यालय में पीजी संकाय में विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है। परीक्षा की शुचिता, गोपनीयता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं की विशेष कोडिंग कराई जाती है, जिसके उपरांत डिकोडिंग और मार्क्स फाइलिंग की एक लंबी प्रक्रिया होती है। बिना भौतिक मूल्यांकन के गुणवत्ताविहीन तरीके से जल्दबाजी में रिजल्ट देना विश्वविद्यालय के नियमों के खिलाफ होगा। सितंबर में रिजल्ट का कैलेंडर, 50 से 60 फीसदी कॉपियों की जांच पूरी कुलपति प्रो. रवीन्द्र कुमार ने आगे बताया कि परीक्षा कैलेंडर के तहत राजभवन को पहले ही लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है कि सत्र 2024-26 का अंतिम परीक्षा परिणाम सितंबर माह में प्रकाशित किया जाएगा। एसटीईटी की अचानक आई अधिसूचना के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। इसके बावजूद छात्र हित को ध्यान में रखते हुए परीक्षकों को इसी माह के अंत तक मूल्यांकन कार्य पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया गया है। गणित, भौतिकी, प्राणि विज्ञान, वाणिज्य और भूगोल जैसे प्रमुख विषयों में परीक्षार्थियों की भारी संख्या होने के बावजूद लगभग 50 से 60 प्रतिशत कॉपियों का मूल्यांकन संपन्न कराया जा चुका है। जिन विषयों की जांच पूरी हो रही है, उनके प्राप्तांकों की टीआर पोस्टिंग का कार्य भी समानांतर रूप से जारी है। मूल्यांकन समाप्त होते ही दो से तीन दिनों के भीतर परिणाम जारी करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कुलपति ने छात्रों के प्रति पूर्ण सहानुभूति जताते हुए शांति बनाए रखने और विश्वविद्यालय कार्य में सहयोग करने की अपील की।

