एटा में बालश्रम और बाल भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने के लिए मंगलवार को संयुक्त अभियान चलाया गया। थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) की टीम ने सकीट कस्बे में होटल, ढाबों, कारखानों, दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की। इस दौरान अलग-अलग दुकानों पर काम करते मिले दो नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू किए गए दोनों बच्चों को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को सौंप दिया गया। अभियान का उद्देश्य बालश्रम के साथ-साथ बाल भिक्षावृत्ति की रोकथाम और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना था। एसएसपी के निर्देश पर चला अभियान अभियान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा के आदेश पर अपर पुलिस अधीक्षक एवं नोडल अधिकारी एएचटी के निर्देशन में चलाया गया। क्षेत्राधिकारी सदर के पर्यवेक्षण में गठित संयुक्त टीम में श्रम परिवर्तन अधिकारी राजबाबू, सहायक श्रम परिवर्तन अधिकारी बबलू सिंह व दीपेंद्र शर्मा, बाल संरक्षण इकाई के पंकज यादव और थाना एएचटी प्रभारी निरीक्षक दलवीर सिंह शामिल रहे। 18 साल से कम उम्र के बच्चों से काम कराना अपराध जांच के दौरान टीम ने प्रतिष्ठान संचालकों और दुकानदारों को बालश्रम कानून के बारे में जागरूक किया। उन्हें बताया गया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना कानूनन दंडनीय है। टीम ने लोगों से बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनके सुरक्षित भविष्य के निर्माण में सहयोग करने की अपील की। नशे से दूर रहने और बचपन बचाने का संदेश अभियान के दौरान बाल भिक्षावृत्ति की रोकथाम, नशे के खिलाफ जागरूकता और ‘बचपन बचाओ’ जैसे संदेश भी दिए गए। टीम ने लोगों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और जरूरतमंद बच्चों को इनका लाभ दिलाने के लिए प्रेरित किया। हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी अधिकारियों ने आम लोगों को आपातकालीन सहायता के लिए 1090, 1098, 108, 112, 1076 और 181 हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि बालश्रम और बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

