शिवपुरी में मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने सरकारी स्कूलों में लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर अधिकारियों की ओर से जारी किए जा रहे अलग-अलग आदेशों पर आपत्ति जताई है। सोमवार को शिवपुरी पहुंचे संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. छत्रवीर सिंह राठौर ने कहा कि आयुक्त लोक शिक्षण के निर्देशों के बावजूद कुछ जिलों और संभागों में शिक्षकों के लिए अलग समय निर्धारित किया जा रहा है। संघ ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आयुक्त के निर्देशों के खिलाफ अलग समय तय करने का आरोप डॉ. राठौर ने बताया कि कुछ जिलों और संभाग स्तर पर शिक्षकों को सुबह 10 बजे से 10.15 बजे तक लॉग-इन करने की बाध्यता संबंधी आदेश जारी किए गए हैं। उनका कहना है कि ई-अटेंडेंस पोर्टल पर लॉग-इन और लॉग-आउट की समय सीमा पहले से तय है। इसके बावजूद कुछ संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारियों की ओर से अलग से समय निर्धारित करना आयुक्त लोक शिक्षण के निर्देशों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि संघ ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगा, जो उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी कर इस तरह के आदेश जारी कर रहे हैं। तकनीकी परेशानियों को लेकर अधिकारियों से चर्चा राठौर ने बताया कि ई-अटेंडेंस की तकनीकी और व्यवहारिक परेशानियों को लेकर संघ शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह से कई बार मुलाकात कर चुका है। संगठन का प्रयास है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था के कारण शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने शिक्षकों से ई-अटेंडेंस को लेकर मानसिक तनाव नहीं लेने की अपील की। उनका कहना है कि यदि कोई शिक्षक स्कूल में मौजूद है, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण लॉग-इन या लॉग-आउट नहीं कर पाता है, तो उसका वेतन नहीं काटा जाएगा। बाढ़ में जान जोखिम में डालकर अटेंडेंस की जरूरत नहीं डॉ. राठौर ने कहा कि बाढ़ या किसी अन्य गंभीर प्राकृतिक आपदा की स्थिति में शिक्षक ई-अटेंडेंस लगाने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें। उन्होंने बताया कि अधिकारियों और शिक्षा मंत्री की ओर से भी आश्वासन दिया गया है कि अकारण किसी शिक्षक का वेतन नहीं काटा जाएगा। पोर्टल में नई सुविधाएं जोड़ने पर काम जारी राठौर के अनुसार, ई-अटेंडेंस सिस्टम में अर्जित अवकाश, महिलाओं के विशेष अवकाश, दूसरे स्कूल में आकस्मिक व्यवस्था के दौरान अटेंडेंस और हाफ टाइम ऑन ड्यूटी जैसी सुविधाएं जोड़ने पर तकनीकी टीम काम कर रही है। उम्मीद है कि ये विकल्प जल्द ही पोर्टल पर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी ई-अटेंडेंस सिस्टम की खामियां दूर नहीं होती हैं, तो संघ इसके स्थायी समाधान के लिए प्रयास करेगा। टीईटी परीक्षा को लेकर भी संघ ने रखा पक्ष टीईटी परीक्षा को लेकर डॉ. राठौर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा आयोजित की जानी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने वर्ष 2005 के बाद व्यापम परीक्षा उत्तीर्ण कर नौकरी में आए शिक्षकों को टीईटी से राहत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की है। उन्होंने अन्य शिक्षकों से भी परीक्षा को लेकर घबराने की जरूरत नहीं होने की बात कही। उनके अनुसार, वर्ष 2028 तक परीक्षा के पर्याप्त अवसर मिलेंगे और पाठ्यक्रम वही रहेगा, जो शिक्षक स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। कंप्यूटर में दक्ष नहीं शिक्षकों के लिए ऑफलाइन परीक्षा की मांग ऑनलाइन टीईटी परीक्षा को लेकर राठौर ने कहा कि समय डिजिटल क्रांति का है और शिक्षकों को भी तकनीक के साथ अपडेट होना होगा। हालांकि, कंप्यूटर में दक्ष नहीं होने वाले शिक्षकों की परेशानी को देखते हुए संघ ने सरकार से ऑफलाइन परीक्षा कराने की मांग भी रखी है। विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी पहुंचे डॉ. राठौर से मिलने मध्य प्रदेश शिक्षक संघ सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी भी पहुंचे। इनमें राजेंद्र पिपलौदा, डॉ. कौशल गौतम, स्नेह रघुवंशी, नीरज सरैया, पवन अवस्थी, तारिक सिद्धकी, विपिन पचौरी, राजकुमार सरैया, अनिल गुप्ता, अरविंद सरैया, रामेश्वर गुप्ता, रामकृष्ण रघुवंशी, अवधेश सिंह तोमर और भरत धाकड़ सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

