उन्नाव में गंगा का जलस्तर लगातार गिर रहा है। मंगलवार को केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, जलस्तर 111.510 मीटर रिकॉर्ड किया गया। यह चेतावनी बिंदु 112 मीटर से 49 सेंटीमीटर नीचे है, जबकि खतरे का निशान 113 मीटर है। जलस्तर घटने से प्रशासन और बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को राहत मिली है। हालांकि, नदी किनारे के इलाकों में बाढ़ का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई जगह पानी भरा होने, कीचड़ और गंदगी के कारण लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतें अभी बनी हुई हैं। पिछले सप्ताह गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। तब पश्चिमी गंगाघाट क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी। कर्बला, गोताखोर, हुसैननगर, सैय्यद कंपाउंड, तेजीपुरवा और मनसाखेड़ा जैसे कई इलाकों में घरों और रास्तों के आसपास पानी भर गया था। कई स्थानों पर आने-जाने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ा था। अब जलस्तर कम होने के साथ पानी भी घट रहा है, लेकिन कई रास्तों पर अभी भी पानी भरा हुआ है। पश्चिमी गंगाघाट के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी कम होने के बाद अब कीचड़ और गंदगी की दिक्कत बढ़ गई है। कर्बला, गोताखोर, हुसैननगर, सैय्यद कंपाउंड और तेजीपुरवा में कई रास्तों पर कीचड़ जमा है, जिससे पैदल चलना मुश्किल हो रहा है। कुछ स्थानों पर ज्यादा पानी होने के कारण दोपहिया वाहनों का आना-जाना भी प्रभावित है। स्थानीय लोगों को जरूरी सामान लाने और अन्य कामों के लिए ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। जरूरत के हिसाब से नावों का संचालन भी जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बाढ़ का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गजियाखेड़ा, पीपरखेड़ा और गड़रियन पीपरखेड़ा समेत आसपास के गांवों में जलस्तर घटने से लोगों को राहत मिली है, लेकिन कई संपर्क मार्गों पर अब भी पानी भरा है। ग्रामीणों के मुताबिक, पानी कम होने के साथ रास्तों पर कीचड़ और गंदगी जमा हो गई है।

