उदयपुर जिले में गांवों की सरकार चुनने के लिए गुरुवार को पहले चरण का मतदान हुआ। इस चरण में जिले की 10 पंचायत समितियों के सदस्यों और इन क्षेत्रों में आने वाले जिला परिषद सदस्यों के लिए वोट डाले गए। इन सभी 10 पंचायत समितियों में कुल 66.88 फीसदी मतदान हुआ है। चुनाव में नई बनी नाई पंचायत समिति 81.05 फीसदी वोटिंग के साथ पूरे जिले में टॉप पर रही। वहीं, कुराबड़ पंचायत समिति में सबसे कम 58.97 फीसदी वोट पड़े। पहले चरण के 160 निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 7,33,784 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 4,90,757 मतदाताओं ने बूथ पर पहुंचकर वोट डाले। अभी जिले में दो और चरणों में पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के लिए वोटिंग होनी बाकी है। नई पंचायत समितियों में पहली बार वोटिंग, मतदाताओं में दिखा उत्साह इस बार नाई, ओगणा और घासा को नई पंचायत समिति बनाया गया है। इन तीनों जगहों पर पहली बार पंचायत समिति सदस्यों के लिए चुनाव हुए हैं। पहली बार वोटिंग होने से यहां के ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा गया। नाई में सबसे अधिक 81.05 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। इसी तरह ओगणा में 74.77 फीसदी और घासा में 65.51 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। आदिवासी इलाकों में बढ़ा मतदान, 4 समितियों में गिरा ग्राफ इस बार आदिवासी बहुल इलाकों में वोटिंग का प्रतिशत बढ़ा है, जबकि मैदानी क्षेत्रों की चार पंचायत समितियों में मतदान कम हुआ है। झाड़ोल में पिछली बार 74.04 फीसदी वोट पड़े थे, जो इस बार 1.32 फीसदी बढ़कर 75.36 फीसदी हो गए। फलासिया में भी वोटिंग 69.51 फीसदी से बढ़कर 73.57 फीसदी पर पहुंच गई। यहां 4.06 फीसदी का उछाल आया है। गिर्वा में भी मतदान 68.8 फीसदी से मामूली बढ़कर 69.41 फीसदी रहा। दूसरी तरफ, भींडर में सबसे ज्यादा 6.47 फीसदी की गिरावट आई है। यहां पिछली बार 66.65 फीसदी वोटिंग हुई थी, जो इस बार घटकर 60.18 फीसदी ही रह गई। कुराबड़ में भी मतदान 63.8 फीसदी से गिरकर 58.97 फीसदी पर आ गया। इसी तरह मावली में वोटिंग 66.79 से घटकर 62.15 फीसदी और वल्लभनगर में 63.13 से घटकर 61.29 फीसदी रही। पिछली बार 63.97% वोटिंग हुई थी, इस बार 4 वार्ड बढ़े छह साल पहले वर्ष 2020 में हुए चुनावों में उदयपुर जिला परिषद के सभी वार्डों को मिलाकर औसत 63.97 फीसदी मतदान हुआ था। उस समय जिला परिषद में कुल 43 वार्ड थे। इस बार 4 नए वार्ड बढ़ने से जिला परिषद में कुल 47 वार्ड हो गए हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में 43 में से 27 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। वहीं कांग्रेस को 15 सीटें मिली थीं और 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता था। तब जिला परिषद में बोर्ड बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 22 सीट का था। बहुमत से 5 सीट ज्यादा जीतने पर भाजपा का बोर्ड बना था और ममता कुंवर पंवार को जिला प्रमुख बनाया गया था। 10 पंचायत समितियों में 2020 और 2026 के मतदान की तुलना चुनाव की तस्वीर देखें…

