उगते चांद को अर्घ्य देकर आज मनेगा चौठ चंद्र, पर्व को लेकर बाजार में बढ़ी रौनक

उगते चांद को अर्घ्य देकर आज मनेगा चौठ चंद्र, पर्व को लेकर बाजार में बढ़ी रौनक

भास्कर न्यूज|मधुबनी मिथिला का लोकपर्व चौठ चंद्र सोमवार को जिलेभर में श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाएगा। व्रती महिलाएं शाम में उगते चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करेंगी और इसके बाद व्रत खोलेंगी। पर्व को लेकर रविवार को जिले के ग्रामीण हाटों और बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। मिट्टी और बांस से बने पारंपरिक सामान के साथ फल, फूल, दही, मिठाई और विभिन्न पकवानों की जमकर खरीदारी हुई। पर्व को देखते हुए सामान्य दिनों की तुलना में फल और मिट्टी के सामान के दाम भी बढ़े रहे। चौठ चंद्र की खासियत यह है कि सामान्य दिनों में जिस उगते चंद्रमा के दर्शन को अशुभ माना जाता है, मिथिला में इसी दिन चंद्रमा के दर्शन कर पूजा की जाती है। मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा पर लगे कलंक से जुड़ी कथा के कारण इस दिन विशेष पूजा का विधान बना। गणेश और चंद्रदेव से जुड़ी लोकमान्यता के अनुसार चौठ चंद्र की पूजा करने से झूठे कलंक से मुक्ति मिलती है। पंडित संतोष चंद्र प्रभाकर ने बताया कि व्रती दही, फल, मिठाई और पकवान से चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य भी फल हाथ में लेकर चंद्रमा का दर्शन करते हुए सुखी जीवन की कामना करते हैं। पूजा में घर के पुरुष सदस्य खीर के विशेष प्रसाद ‘मरर’ को हाथ से काटकर दो भाग करते हैं। मिथिला के लोग देश के दूसरे हिस्सों में रहकर भी इस परंपरा को पूरी श्रद्धा से निभाते हैं। भास्कर न्यूज|मधुबनी मिथिला का लोकपर्व चौठ चंद्र सोमवार को जिलेभर में श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाएगा। व्रती महिलाएं शाम में उगते चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करेंगी और इसके बाद व्रत खोलेंगी। पर्व को लेकर रविवार को जिले के ग्रामीण हाटों और बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। मिट्टी और बांस से बने पारंपरिक सामान के साथ फल, फूल, दही, मिठाई और विभिन्न पकवानों की जमकर खरीदारी हुई। पर्व को देखते हुए सामान्य दिनों की तुलना में फल और मिट्टी के सामान के दाम भी बढ़े रहे। चौठ चंद्र की खासियत यह है कि सामान्य दिनों में जिस उगते चंद्रमा के दर्शन को अशुभ माना जाता है, मिथिला में इसी दिन चंद्रमा के दर्शन कर पूजा की जाती है। मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा पर लगे कलंक से जुड़ी कथा के कारण इस दिन विशेष पूजा का विधान बना। गणेश और चंद्रदेव से जुड़ी लोकमान्यता के अनुसार चौठ चंद्र की पूजा करने से झूठे कलंक से मुक्ति मिलती है। पंडित संतोष चंद्र प्रभाकर ने बताया कि व्रती दही, फल, मिठाई और पकवान से चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य भी फल हाथ में लेकर चंद्रमा का दर्शन करते हुए सुखी जीवन की कामना करते हैं। पूजा में घर के पुरुष सदस्य खीर के विशेष प्रसाद ‘मरर’ को हाथ से काटकर दो भाग करते हैं। मिथिला के लोग देश के दूसरे हिस्सों में रहकर भी इस परंपरा को पूरी श्रद्धा से निभाते हैं।  

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