प्लेटफॉर्म का बड़ा हिस्सा खाली:प्लेटफॉर्म-9 पर जहां न शेड और न ही स्टॉल, वहीं से पटना-टाटा वंदे भारत खुल रही

प्लेटफॉर्म का बड़ा हिस्सा खाली:प्लेटफॉर्म-9 पर जहां न शेड और न ही स्टॉल, वहीं से पटना-टाटा वंदे भारत खुल रही

पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 9 से दोपहर 2:05 बजे खुलने वाली पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस को प्लेटफॉर्म का बड़ा हिस्सा खाली रहने के बावजूद मीठापुर की तरफ बिल्कुल अंतिम छोर पर खड़ा किया जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि यात्रियों, खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को 400 मीटर तक भारी लगेज घसीटकर दौड़ लगानी पड़ रही है। हैरानी की बात यह है कि प्लेटफॉर्म के जिस हिस्से में ट्रेन की बोगियां रुकती हैं, वहां न तो धूप-बारिश से बचने के लिए शेड है, न बैठने की व्यवस्था और न ही कोई खान-पान स्टॉल। प्लेटफॉर्म के अंतिम छोर पर बुनियादी यात्री सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। महावीर मंदिर की ओर से आने वाले यात्रियों को करीब 400 मीटर पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद जब वे अपनी बोगी के पास पहुंचते हैं, तो सिर पर शेड तक नहीं मिलता। चिलचिलाती धूप या मूसलधार बारिश के दौरान यात्रियों को खुले आसमान के नीचे खड़े होकर ट्रेन खुलने का इंतजार करना पड़ता है। सबसे ज्यादा फजीहत बीमार, बुजुर्ग और बच्चों के साथ चलने वाले परिवारों की होती है। आधुनिक और महंगी वंदे भारत ट्रेन का टिकट कटाने के बावजूद प्लेटफॉर्म पर यह बदहाली यात्रियों के गुस्से को बढ़ा रही है। प्लेटफॉर्म के बीच में रोकी जाए ट्रेन दैनिक यात्री संघ के महासचिव शोएब कुरैशी का कहना है कि प्रीमियम ट्रेन का किराया देने के बाद भी यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं न मिलना रेलवे की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। यात्रियों और दैनिक रेल यात्री संघ ने मांग की है कि परिचालन विभाग इस समस्या का तुरंत समाधान निकाले। 8 या 16 कोच वाली इस ट्रेन को प्लेटफॉर्म के अंतिम छोर (आउटर साइड) पर लगाने के बजाय प्लेटफॉर्म नंबर 9 के मध्य भाग में रोका जाए। मध्य भाग में रुकने से यात्रियों को दोनों फुट ओवरब्रिज (एफओबी) पास पड़ेंगे, शेड की छांव मिलेगी और बेवजह 400 मीटर की दौड़ से भी निजात मिल सकेगी। ये भी समस्याएं वंदे भारत का किराया प्लेटफॉर्म 8-9 से खुलती हैं ये ट्रेनें यात्री बोले- भारी समान लेकर पहुंचने में होती है परेशानी मीठापुर छोर पर ट्रेन रुकने से 200-400 मीटर पैदल चलना पड़ता है, भारी सामान के साथ बुजुर्गों और बच्चों को बहुत परेशानी होती है।-सुनील कुमार महावीर मंदिर की तरफ से आने पर पूर्वी एफओबी से उतरकर वंदे भारत तक पहुंचना किसी लंबी कसरत से कम नहीं लगता।-राजेश सिंह प्लेटफॉर्म पर शेड न होने से धूप और बारिश में खुले आसमान के नीचे खड़े रहना पड़ता है। रेलवे को इस व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।-अनीता देवी प्लेटफॉर्म का बीच का हिस्सा खाली रहता है, फिर भी ट्रेन को बिल्कुल आखिरी छोर पर क्यों रोका जा रहा है, यह समझ से परे है।-डॉ. राकेश रंजन वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन में सफर करने के बाद पटना जंक्शन पर ऐसी बुनियादी असुविधा मिलना बेहद निराशाजनक अनुभव है।-प्रियंका सिन्हा पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 9 से दोपहर 2:05 बजे खुलने वाली पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस को प्लेटफॉर्म का बड़ा हिस्सा खाली रहने के बावजूद मीठापुर की तरफ बिल्कुल अंतिम छोर पर खड़ा किया जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि यात्रियों, खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को 400 मीटर तक भारी लगेज घसीटकर दौड़ लगानी पड़ रही है। हैरानी की बात यह है कि प्लेटफॉर्म के जिस हिस्से में ट्रेन की बोगियां रुकती हैं, वहां न तो धूप-बारिश से बचने के लिए शेड है, न बैठने की व्यवस्था और न ही कोई खान-पान स्टॉल। प्लेटफॉर्म के अंतिम छोर पर बुनियादी यात्री सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। महावीर मंदिर की ओर से आने वाले यात्रियों को करीब 400 मीटर पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद जब वे अपनी बोगी के पास पहुंचते हैं, तो सिर पर शेड तक नहीं मिलता। चिलचिलाती धूप या मूसलधार बारिश के दौरान यात्रियों को खुले आसमान के नीचे खड़े होकर ट्रेन खुलने का इंतजार करना पड़ता है। सबसे ज्यादा फजीहत बीमार, बुजुर्ग और बच्चों के साथ चलने वाले परिवारों की होती है। आधुनिक और महंगी वंदे भारत ट्रेन का टिकट कटाने के बावजूद प्लेटफॉर्म पर यह बदहाली यात्रियों के गुस्से को बढ़ा रही है। प्लेटफॉर्म के बीच में रोकी जाए ट्रेन दैनिक यात्री संघ के महासचिव शोएब कुरैशी का कहना है कि प्रीमियम ट्रेन का किराया देने के बाद भी यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं न मिलना रेलवे की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। यात्रियों और दैनिक रेल यात्री संघ ने मांग की है कि परिचालन विभाग इस समस्या का तुरंत समाधान निकाले। 8 या 16 कोच वाली इस ट्रेन को प्लेटफॉर्म के अंतिम छोर (आउटर साइड) पर लगाने के बजाय प्लेटफॉर्म नंबर 9 के मध्य भाग में रोका जाए। मध्य भाग में रुकने से यात्रियों को दोनों फुट ओवरब्रिज (एफओबी) पास पड़ेंगे, शेड की छांव मिलेगी और बेवजह 400 मीटर की दौड़ से भी निजात मिल सकेगी। ये भी समस्याएं वंदे भारत का किराया प्लेटफॉर्म 8-9 से खुलती हैं ये ट्रेनें यात्री बोले- भारी समान लेकर पहुंचने में होती है परेशानी मीठापुर छोर पर ट्रेन रुकने से 200-400 मीटर पैदल चलना पड़ता है, भारी सामान के साथ बुजुर्गों और बच्चों को बहुत परेशानी होती है।-सुनील कुमार महावीर मंदिर की तरफ से आने पर पूर्वी एफओबी से उतरकर वंदे भारत तक पहुंचना किसी लंबी कसरत से कम नहीं लगता।-राजेश सिंह प्लेटफॉर्म पर शेड न होने से धूप और बारिश में खुले आसमान के नीचे खड़े रहना पड़ता है। रेलवे को इस व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।-अनीता देवी प्लेटफॉर्म का बीच का हिस्सा खाली रहता है, फिर भी ट्रेन को बिल्कुल आखिरी छोर पर क्यों रोका जा रहा है, यह समझ से परे है।-डॉ. राकेश रंजन वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन में सफर करने के बाद पटना जंक्शन पर ऐसी बुनियादी असुविधा मिलना बेहद निराशाजनक अनुभव है।-प्रियंका सिन्हा  

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