‘आपदा में घबराएं नहीं, समझदारी से लें फैसला’:जमुई में NDRF ने छात्रों को बताए तरीके, मॉक ड्रिल-भूकंप, आग से बचाव की ट्रेनिंग

‘आपदा में घबराएं नहीं, समझदारी से लें फैसला’:जमुई में NDRF ने छात्रों को बताए तरीके, मॉक ड्रिल-भूकंप, आग से बचाव की ट्रेनिंग

जमुई में आपदा कभी बताकर नहीं आती, लेकिन समय रहते की गई तैयारी जान बचाने में अहम भूमिका निभाती है। इसी उद्देश्य से बिहार विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत चकाई प्रखंड स्थित प्लस टू एसके उच्च विद्यालय में 9वीं बटालियन एनडीआरएफ की टीम ने मॉक ड्रिल का आयोजन किया। जिला प्रशासन के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करने की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी गई। आपदा से बचाव के बताए तरीके मॉक ड्रिल के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने भूकंप, आग, वज्रपात और डूबने जैसी आपदाओं से बचाव के तरीके बताए। विद्यार्थियों को समझाया गया कि आपात स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए। सुरक्षित निकासी का किया प्रदर्शन एनडीआरएफ टीम ने आपदा आने पर सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों को बताया गया कि आपात स्थिति में भगदड़ मचाने के बजाय शांत रहकर निर्धारित सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलना चाहिए। फर्स्ट एड की दी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग टीम ने प्राथमिक उपचार यानी फर्स्ट एड के जरूरी तरीकों का भी प्रदर्शन किया। घायल या प्रभावित व्यक्ति तक सुरक्षित तरीके से पहुंचने, उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने और आपात स्थिति में तत्काल सहायता देने के तरीके बताए गए। वज्रपात में इन जगहों से रहें दूर बिजली गिरने के दौरान खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभे के आसपास नहीं रहने की सलाह दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि वज्रपात के समय सुरक्षित स्थान पर रहना बेहद जरूरी है। भूकंप और आग से बचाव के उपाय भूकंप के समय सुरक्षित स्थान का चुनाव करने और इमारत से बाहर निकलते समय सावधानी बरतने की जानकारी दी गई। आग लगने पर धुएं से बचने, सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलने और घबराकर गलत दिशा में भागने से बचने के उपाय भी बताए गए। सही फैसला बचा सकता है जान एनडीआरएफ टीम ने कहा कि आपदा के दौरान कुछ सेकंड में लिया गया सही फैसला किसी की जान बचा सकता है। इसलिए बच्चों और शिक्षकों को पहले से आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देना जरूरी है। मॉक ड्रिल का उद्देश्य स्कूल स्तर पर आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ाना और विद्यार्थियों को आपात स्थिति के लिए तैयार करना है। जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य स्कूलों में भी जागरूकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल आयोजित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी आपदा के समय खुद को सुरक्षित रखने के साथ जरूरत पड़ने पर दूसरों की भी मदद कर सकें। जमुई में आपदा कभी बताकर नहीं आती, लेकिन समय रहते की गई तैयारी जान बचाने में अहम भूमिका निभाती है। इसी उद्देश्य से बिहार विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत चकाई प्रखंड स्थित प्लस टू एसके उच्च विद्यालय में 9वीं बटालियन एनडीआरएफ की टीम ने मॉक ड्रिल का आयोजन किया। जिला प्रशासन के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करने की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी गई। आपदा से बचाव के बताए तरीके मॉक ड्रिल के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने भूकंप, आग, वज्रपात और डूबने जैसी आपदाओं से बचाव के तरीके बताए। विद्यार्थियों को समझाया गया कि आपात स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए। सुरक्षित निकासी का किया प्रदर्शन एनडीआरएफ टीम ने आपदा आने पर सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों को बताया गया कि आपात स्थिति में भगदड़ मचाने के बजाय शांत रहकर निर्धारित सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलना चाहिए। फर्स्ट एड की दी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग टीम ने प्राथमिक उपचार यानी फर्स्ट एड के जरूरी तरीकों का भी प्रदर्शन किया। घायल या प्रभावित व्यक्ति तक सुरक्षित तरीके से पहुंचने, उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने और आपात स्थिति में तत्काल सहायता देने के तरीके बताए गए। वज्रपात में इन जगहों से रहें दूर बिजली गिरने के दौरान खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभे के आसपास नहीं रहने की सलाह दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि वज्रपात के समय सुरक्षित स्थान पर रहना बेहद जरूरी है। भूकंप और आग से बचाव के उपाय भूकंप के समय सुरक्षित स्थान का चुनाव करने और इमारत से बाहर निकलते समय सावधानी बरतने की जानकारी दी गई। आग लगने पर धुएं से बचने, सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलने और घबराकर गलत दिशा में भागने से बचने के उपाय भी बताए गए। सही फैसला बचा सकता है जान एनडीआरएफ टीम ने कहा कि आपदा के दौरान कुछ सेकंड में लिया गया सही फैसला किसी की जान बचा सकता है। इसलिए बच्चों और शिक्षकों को पहले से आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देना जरूरी है। मॉक ड्रिल का उद्देश्य स्कूल स्तर पर आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ाना और विद्यार्थियों को आपात स्थिति के लिए तैयार करना है। जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य स्कूलों में भी जागरूकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल आयोजित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी आपदा के समय खुद को सुरक्षित रखने के साथ जरूरत पड़ने पर दूसरों की भी मदद कर सकें।  

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