यूएन की चेतावनी, मुंबई-कोलकाता पर मंडराया समुद्री जलस्तर का खतरा, 1.4 करोड़ लोग जोखिम में

यूएन की चेतावनी, मुंबई-कोलकाता पर मंडराया समुद्री जलस्तर का खतरा, 1.4 करोड़ लोग जोखिम में

UN Report Sea Level: मुंबई और कोलकाता जैसे भारत के दो बड़े महानगरों में बढ़ते समुद्री जलस्तर के खतरे को संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने रेखांकित किया है। यूएन के मुताबिक मुंबई, कोलकाता और ढाका के निचले इलाकों में 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग स्थायी जलभराव के कारण घर खोने के खतरे में हैं। इसी बढ़ते जोखिम के बीच बीएमसी ने मुंबई की 149 किमी लंबी तटरेखा का नया क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट शुरू किया है। पांच साल में यह दूसरा बड़ा आकलन है।

इसमें बदलते मौसम, तटीय विकास, जमीन के इस्तेमाल और समुद्र के बढ़ते स्तर के आधार पर शहर के सबसे संवेदनशील इलाकों की मैपिंग की जाएगी। रिपोर्ट अगले साल आने की उम्मीद है। बीएमसी के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में मुंबई की तटरेखा का भूगोल भी बदला है। कोस्टल रोड के लिए 100 हेक्टेयर से ज्यादा समुद्री क्षेत्र में रिक्लेमेशन हुआ है, जबकि पूर्वी हिस्से में साल्ट पैन की जमीनों के विकास की योजनाएं हैं।

यह है चुनौती

मुंबई की चुनौती सिर्फ समुद्र का बढ़ता पानी नहीं है। जमीन धंसना, खारे पानी का भूजल में प्रवेश और तूफानी लहरें जोखिम बढ़ा सकते हैं। भारी बारिश के दौरान ऊंची ज्वार और बढ़े समुद्री जलस्तर के साथ जल निकासी और शहरी बाढ़ की समस्या गंभीर हो सकती है। कोलकाता भी निचले डेल्टा क्षेत्र में होने के कारण समुद्री जलस्तर बढ़ने और जमीन धंसने के दोहरे जोखिम में है।

2024 में समुद्र बढ़ने की रफ्तार रिकॉर्ड

यूएन के मुताबिक 2024 में वैश्विक समुद्री जलस्तर करीब 5.9 मिलीमीटर बढ़ा, जो रिकॉर्ड सालाना वृद्धि है। दुनिया में करीब 77 करोड़ लोग हाई टाइड स्तर से पांच मीटर से कम ऊंचाई वाले तटीय इलाकों में रहते हैं। बहुत कम उत्सर्जन वाले परिदृश्य में भी 2050 तक वैश्विक औसत समुद्री जलस्तर करीब 23 सेंटीमीटर बढ़ने का अनुमान है। बढ़ता समुद्र सिर्फ बाढ़ का खतरा नहीं बढ़ाएगा। इससे तटीय कटाव, भूजल में खारापन, पेयजल संकट और सड़क-रेल, बिजली, बंदरगाह व सीवेज जैसी सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। मुंबई और कोलकाता जैसे आर्थिक केंद्रों में इसका असर कारोबार और रोजगार तक पहुंच सकता है।

खतरा सिर्फ बाढ़ का नहीं

यूएन ने चेताया है कि समुद्री जलस्तर बढ़ने का असर रहने की जगह, पानी, भोजन, स्वास्थ्य और आजीविका तक पहुंचेगा। तत्काल अनुकूलन उपाय नहीं किए गए तो 2050 तक 1.2 अरब लोग विस्थापन के खतरे में आ सकते हैं। तटीय बुनियादी ढांचे को होने वाला नुकसान अभी ही करीब 1.8 लाख करोड़ डॉलर आंका गया है।

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