आजमगढ़ के मंदिरों और आश्रमों में होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम:महर्षि वाल्मीकि जयंती पर रामायण पाठ और भजनों की सजेगी महफिल

आजमगढ़ के मंदिरों और आश्रमों में होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम:महर्षि वाल्मीकि जयंती पर रामायण पाठ और भजनों की सजेगी महफिल

आजमगढ़ जिले में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर 26 अक्टूबर को आजमगढ़ जनपद के विभिन्न मंदिरों एवं आश्रमों में भव्य भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का अखंड पाठ, भजन और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके लिए जिला, तहसील और विकासखंड स्तर पर समितियों का गठन किया गया है, जो कार्यक्रमों को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराएंगी। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने बताया कि शासन के निर्देश पर प्रदेश के सभी जनपदों में 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी। इसका उद्देश्य आदि कवि महर्षि वाल्मीकि के महान योगदान को स्मरण करने के साथ ही रामायण में निहित मानवीय, सामाजिक और राष्ट्रीय मूल्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार करना है।
उन्होंने बताया कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित विश्वप्रसिद्ध रामायण भारतीय संस्कृति और मानवीय आदर्शों का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें वर्णित सामाजिक एवं मानवीय मूल्य समाज को सद्भाव, नैतिकता और आदर्श जीवन की प्रेरणा देते हैं।राम-जानकी मार्ग और राम वन गमन मार्ग से जुड़े अनेक स्थल आज भी भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। जिले के 10 प्रमुख धार्मिक स्थलों पर होंगे कार्यक्रम
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर जनपद के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर चयनित कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके तहत अलंकार सिंह भैरव बाबा मंदिर, संतोष मिश्रा हनुमान मंदिर हरिहरपुर, राजेश कुमार प्रजापति श्री चन्द्रमा ऋषि आश्रम, आदर्श मिश्रा श्री रामजानकी मंदिर ब्रह्मस्थान, विकास चौरसिया श्री रामजानकी मंदिर गुरूटोला और अर्पित मिश्रा श्री बड़ा गणेश मंदिर आजमगढ़ में कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। इसी क्रम में तुषार सिंह पातालेश्वर मंदिर बेलईसा, शीतला मिश्रा हनुमान मंदिर बिलरियागंज, चन्द्रशेखर यादव दुर्वासा ऋषि आश्रम फूलपुर तथा आदित्य मिश्रा श्री दत्तात्रेय आश्रम निजामाबाद में भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे। रामायण के आदर्शों का होगा प्रचार-प्रसार
इन सभी धार्मिक स्थलों पर रामायण का अखंड पाठ, भजन-कीर्तन और अन्य भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रशासन का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि के विचारों तथा रामायण में निहित मानवीय और सामाजिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है। शासन के निर्देशों के अनुरूप सभी कार्यक्रमों को व्यवस्थित, सकुशल संपन्न कराने के लिए संबंधित समितियों के माध्यम से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की बात कही है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *