आगरा में शुक्रवार रात हुई बारिश में जलभराव के चलते एक बुजुर्ग खुले नाले में जा गिरे। वहां मौजूद एक युवक ने उन्हें गिरते देख लिया। लोगों की मदद से नाले से निकाला। बुजुर्ग के पेट में पानी भर गया। परिजन उन्हें घर ले गए। थोड़ी देर में तबियत बिगड़ी। अस्पताल में उनकी मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने बिना शिकायत किए अंतिम संस्कार कर दिया। उनका कहना है कि सिस्टम की लापरवाही से उनके पिता की मौत हुई है। केदार नगर निवासी ओमप्रकाश देवानी शुक्रवार रात को काम से साइकिल से लौट रहे थे। बारिश होने के चलते वो रास्ते में रूक गए। जब बारिश बंद हुई तो वो घर के लिए निकले। सवा 11 बजे राजकमल इंटरकॉलेज के पास सड़क पर जलभराव था। पानी के चलते ओमप्रकाश को खुला हुआ नाला दिखाई नहीं दिया। वो साइकिल समेत नाले में समा गए युवक ने नाले से निकाला
वहां मौजूद समीर नाम के युवक ने उन्हें नाले में गिरते देख लिया। उसने तत्काल शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। ओमप्रकाश को नाले से निकाला। उनको होश नहीं था। पेट दबाकर पानी निकाला। थोड़ी देर में होश आ गया। ओमप्रकाश ने बेटे आशीष को फोन कर बुलाया। परिजन उन्हें घर ले गए। उनके लिए चाय बनाई। थोड़ी देर में उनकी तबियत बिगड़ गई। परिजन उन्हें करीब 12 बजे अस्पताल ले गए। जहां उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने शनिवार को अंतिम संस्कार किया। बेटे का दर्द- “सिस्टम से कैसे लड़ते?”
ओम प्रकाश के बेटे ने हादसे के बाद व्यवस्था को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की। उनका कहना है कि परिवार के सामने सबसे बड़ा दुख अपने सदस्य को खोने का है। सिस्टम से शिकायत या लड़ाई करने की स्थिति में परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा है। बेटे के मुताबिक, “सिस्टम से कैसे लड़ते?” इसी पीड़ा के बीच परिवार ने बिना किसी शिकायत के ओम प्रकाश का अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार का यह दर्द बताता है कि हादसे के बाद सिर्फ मुआवजा या जांच ही सवाल नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिससे भविष्य में किसी दूसरे परिवार को इसी तरह का दर्द न झेलना पड़े। खुले नाले पर जिम्मेदार कौन?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजकमल इंटर कॉलेज के पास खुले नाले की स्थिति क्या थी? यदि नाला खुला था तो वहां सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? बारिश के दौरान पानी भरने की स्थिति में राहगीरों को चेतावनी देने के लिए बैरिकेडिंग, ढक्कन या संकेतक क्यों नहीं लगाए गए? नगर निगम की जिम्मेदारी शहर के नालों की सफाई और जल निकासी तक ही सीमित नहीं है। जहां खुले नाले लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं, वहां उनकी सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। अब हादसे के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या नगर निगम या संबंधित विभाग ने इस खुले नाले को पहले कभी चिन्हित किया था? अगर किया था तो सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं हुए और अगर नहीं किया था तो शहर के ऐसे स्थानों का सर्वे कब होगा?

