‘हर साल हमलोगों को दुख होता है। घर को कटते हमने देखा है। एक आट चक्की था वो भी गंगा में समा गया। घर में कमर भर पानी है। छत पर रहने को मजबूर हैं। विभाग पहले से तैयारी करता तो कटाव की समस्या नहीं होती। अभी जो बचाव के कार्य किए जा रहे हैं वे काफी नहीं हैं।’ ये बातें भागलपुर की अंजना देवी ने कही है। दरअसल, नवगछिया के राघोपुर में पिछले कटाव हो रहा है। गंगा सबौर प्रखंड के इंग्लिश फरक्का तक पहुंच गई है। यहां महज 8 घर गंगा में समा चुके हैं। जल संसाधन विभाग कटावरोधी कार्य कर रहा है, वह नाकाफी साबित हो रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि जहां 25 फीट गहरा पानी है, वहां 12 बोरी के पैकेट डाले जा रहे हैं, जो तेज बहाव में ही बह जा रहे हैं। जिले में कितनी की आबादी प्रभावित है, जल संसाधन विभाग के काम पर ग्रामीणों की प्रतिक्रिया, मंत्री-डीएम ने क्या कहा, पढ़ें रिपोर्ट…. पहले कुछ तस्वीरें… ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल समेत 40,000 की आबादी भागलपुर में ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल समेत 40,000 की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। यह हाल तब है जब जल संसाधन विभाग ने पहले से तैयारी की थी और काम भी करवाया था, लेकिन कटाव नहीं रुका। उसके बाद भी बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र कह रहे हैं कि जल संसाधन विभाग अच्छा काम कर रहा है। 3 दिन पहले संजू देवी का घर गंगा में बह गया था। इतना समय तक नहीं मिला कि घर का सामान ऊंचे स्थान पर ले जाए। कपड़े और खाने-पीने की चीजें गंगा में चली गई। यह सिर्फ संजू देवी की परेशानी नहीं है। इंग्लिश फरक्का के ऐसे और परिवार हैं, जिनके घर अब तक पानी में समा गए। ग्रामीणों ने क्या कहा, उन्हें किस तरह की हो रही परेशानियां… हर साल परेशानी झेलनी पड़ती है ग्रामीण अंजना देवी ने कहा कि 5 रूम वाला मेरे घर था। हर साल हमलोगों को कटाव की परेशानी से जूझना पड़ता है। बचाव के लिए जो काम जल संसाधन विभाग की तरफ से कराया जा रहा है। वो काफी नहीं है। इससे कुछ नहीं होने वाला है। कटावरोधी काम 4 महीने पहले होना चाहिए था ग्रामीण विजेंद्र कुमार यादव ने कहा कि जल संसाधन विभाग कटाव रोकने के लिए जो काम कर रहा है, उससे कटाव नहीं रुक सकता है। पानी इतना है कि पता ही नहीं चलता है कि बोरियां कहां डाली जा रही है। विभाग से मैं कहना चाहता हूं कि 4 महीना पहले अगर काम करवाया होता तो शायद यह कटाव नहीं होता, लोग इतने मजबूर नहीं होते। जब 4 महीना पहले हम लोगों को अंदाजा हुआ तो हम लोगों ने खुद से बोरी डाली, ताकि कटाव न हो और हमारा घर बच सके। जब घर कटना शुरू हुआ, तब मरम्मत का कार्य भी शुरू कराया गया। सिर्फ पैसा बर्बाद किया जा रहा ग्रामीण मंटू कुमार ने कहा कि घर कट कर गंगा में समा रहे हैं। हम लोग मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मांग करते हैं कि यहां पर पत्थर का काम करवाएं। यह बालू मिक्स मिट्टी से काम संभव नहीं है। इससे यह गांव विलीन हो जाएगा। सिर्फ पैसा बर्बाद होगा। शादी के 2 महीने बाद बेटी का घर कट गया शुकुंतला देवी ने कहा कि मेरी बेटी का घर गंगा में कटकर चला गया। मैं अपनी बेटी के पास आई हूं। 2 महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी। शादी में घर का सारा समान दिया था। सब गंगा में समा गया है। पथ निर्माण मंत्री और डीएम क्या बोले, आगे की क्या है प्लानिंग… नदी की धारा बदल गई है बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने बताया कि नदी की धारा शिफ्ट हो गई है और उसका प्रवाह कंट्रीसाइड (क्षेत्र) की ओर मूव कर गया है। नदी के बीच में जो गहराई होनी चाहिए, वह फिलहाल किनारे की ओर आ गई है। यहां करीब 30 से 40 मीटर की गहराई है, जबकि यह गहराई नदी के बीच में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धारा टेढ़ी होने के कारण नदी नया रास्ता तलाश रही है। दूसरी ओर नदी का क्षेत्र काफी ऊंचा हो गया है, जिससे पूरा दबाव इस तरफ बन गया है। कटाव को रोकने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। विशेषज्ञ भी मौके पर पहुंच रहे हैं। खरीक ब्लॉक में विशेषज्ञों के साथ बैठक कर कटाव को रोकने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। खुद इंजीनियर होने के नाते मैं भी तकनीकी पहलुओं पर अपनी राय दूंगा। पहले किसी को पता नहीं था कि नदी की धारा बदल जाएगी सरकार और संबंधित विभाग की ओर से पूरी ताकत के साथ प्रयास किया जा रहा है। विभाग के काम पर असंतोष की बात को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित विभाग बहुत अच्छा काम कर रहा है, लेकिन अभी और प्रयास करने के लिए विभाग को निर्देश दिए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों की ओर से शुरुआती दौर में लापरवाही बरते जाने के सवाल पर इंजीनियर शैलेंद्र ने कहा कि किसी को पहले से यह पता नहीं था कि नदी की धारा इस तरह शिफ्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में पहले भी कटाव होता रहा है। इंजीनियर शैलेंद्र ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी आभार जताते हुए कहा कि फरक्का बैराज के सभी गेट खुलवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल में आई बड़ी त्रासदी के बाद वहां से पानी आने के बावजूद गंगा का जलस्तर फिलहाल स्थिर है और बढ़ नहीं रहा है। फरक्का बैराज के गेट खोले जाने से पानी के दबाव को कम करने में मदद मिली है। अभी पैनिक स्थिति नहीं है- डीएम जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने बताया कि कटाव नियंत्रण को लेकर जल संसाधन विभाग (WRD) की टॉप टीम मौके पर मौजूद है। तकनीकी रूप से किन-किन बिंदुओं पर किस तरह के कार्य की आवश्यकता है, इसका आकलन विभाग के अभियंता कर रहे हैं। तटबंध पर जहां भी अतिक्रमण था, उसे हटवा दिया गया है और कार्य में किसी तरह का अवरोध नहीं है। उन्होंने बताया कि काम को और सुदृढ़ करने के लिए अन्य जगहों से भी कार्यपालक अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति की गई है। साथ ही बाहर से अतिरिक्त मजदूर और सामग्री मंगाकर काम में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल ऐसी कोई पैनिक स्थिति नहीं है। मैनपावर की कमी के सवाल पर उन्होंने कहा कि WRD के इंजीनियरों की ओर से इसकी जानकारी दी गई थी। इसके लिए अतिरिक्त मैनपावर की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जा रहा है। ‘हर साल हमलोगों को दुख होता है। घर को कटते हमने देखा है। एक आट चक्की था वो भी गंगा में समा गया। घर में कमर भर पानी है। छत पर रहने को मजबूर हैं। विभाग पहले से तैयारी करता तो कटाव की समस्या नहीं होती। अभी जो बचाव के कार्य किए जा रहे हैं वे काफी नहीं हैं।’ ये बातें भागलपुर की अंजना देवी ने कही है। दरअसल, नवगछिया के राघोपुर में पिछले कटाव हो रहा है। गंगा सबौर प्रखंड के इंग्लिश फरक्का तक पहुंच गई है। यहां महज 8 घर गंगा में समा चुके हैं। जल संसाधन विभाग कटावरोधी कार्य कर रहा है, वह नाकाफी साबित हो रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि जहां 25 फीट गहरा पानी है, वहां 12 बोरी के पैकेट डाले जा रहे हैं, जो तेज बहाव में ही बह जा रहे हैं। जिले में कितनी की आबादी प्रभावित है, जल संसाधन विभाग के काम पर ग्रामीणों की प्रतिक्रिया, मंत्री-डीएम ने क्या कहा, पढ़ें रिपोर्ट…. पहले कुछ तस्वीरें… ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल समेत 40,000 की आबादी भागलपुर में ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल समेत 40,000 की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। यह हाल तब है जब जल संसाधन विभाग ने पहले से तैयारी की थी और काम भी करवाया था, लेकिन कटाव नहीं रुका। उसके बाद भी बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र कह रहे हैं कि जल संसाधन विभाग अच्छा काम कर रहा है। 3 दिन पहले संजू देवी का घर गंगा में बह गया था। इतना समय तक नहीं मिला कि घर का सामान ऊंचे स्थान पर ले जाए। कपड़े और खाने-पीने की चीजें गंगा में चली गई। यह सिर्फ संजू देवी की परेशानी नहीं है। इंग्लिश फरक्का के ऐसे और परिवार हैं, जिनके घर अब तक पानी में समा गए। ग्रामीणों ने क्या कहा, उन्हें किस तरह की हो रही परेशानियां… हर साल परेशानी झेलनी पड़ती है ग्रामीण अंजना देवी ने कहा कि 5 रूम वाला मेरे घर था। हर साल हमलोगों को कटाव की परेशानी से जूझना पड़ता है। बचाव के लिए जो काम जल संसाधन विभाग की तरफ से कराया जा रहा है। वो काफी नहीं है। इससे कुछ नहीं होने वाला है। कटावरोधी काम 4 महीने पहले होना चाहिए था ग्रामीण विजेंद्र कुमार यादव ने कहा कि जल संसाधन विभाग कटाव रोकने के लिए जो काम कर रहा है, उससे कटाव नहीं रुक सकता है। पानी इतना है कि पता ही नहीं चलता है कि बोरियां कहां डाली जा रही है। विभाग से मैं कहना चाहता हूं कि 4 महीना पहले अगर काम करवाया होता तो शायद यह कटाव नहीं होता, लोग इतने मजबूर नहीं होते। जब 4 महीना पहले हम लोगों को अंदाजा हुआ तो हम लोगों ने खुद से बोरी डाली, ताकि कटाव न हो और हमारा घर बच सके। जब घर कटना शुरू हुआ, तब मरम्मत का कार्य भी शुरू कराया गया। सिर्फ पैसा बर्बाद किया जा रहा ग्रामीण मंटू कुमार ने कहा कि घर कट कर गंगा में समा रहे हैं। हम लोग मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मांग करते हैं कि यहां पर पत्थर का काम करवाएं। यह बालू मिक्स मिट्टी से काम संभव नहीं है। इससे यह गांव विलीन हो जाएगा। सिर्फ पैसा बर्बाद होगा। शादी के 2 महीने बाद बेटी का घर कट गया शुकुंतला देवी ने कहा कि मेरी बेटी का घर गंगा में कटकर चला गया। मैं अपनी बेटी के पास आई हूं। 2 महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी। शादी में घर का सारा समान दिया था। सब गंगा में समा गया है। पथ निर्माण मंत्री और डीएम क्या बोले, आगे की क्या है प्लानिंग… नदी की धारा बदल गई है बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने बताया कि नदी की धारा शिफ्ट हो गई है और उसका प्रवाह कंट्रीसाइड (क्षेत्र) की ओर मूव कर गया है। नदी के बीच में जो गहराई होनी चाहिए, वह फिलहाल किनारे की ओर आ गई है। यहां करीब 30 से 40 मीटर की गहराई है, जबकि यह गहराई नदी के बीच में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धारा टेढ़ी होने के कारण नदी नया रास्ता तलाश रही है। दूसरी ओर नदी का क्षेत्र काफी ऊंचा हो गया है, जिससे पूरा दबाव इस तरफ बन गया है। कटाव को रोकने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। विशेषज्ञ भी मौके पर पहुंच रहे हैं। खरीक ब्लॉक में विशेषज्ञों के साथ बैठक कर कटाव को रोकने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। खुद इंजीनियर होने के नाते मैं भी तकनीकी पहलुओं पर अपनी राय दूंगा। पहले किसी को पता नहीं था कि नदी की धारा बदल जाएगी सरकार और संबंधित विभाग की ओर से पूरी ताकत के साथ प्रयास किया जा रहा है। विभाग के काम पर असंतोष की बात को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित विभाग बहुत अच्छा काम कर रहा है, लेकिन अभी और प्रयास करने के लिए विभाग को निर्देश दिए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों की ओर से शुरुआती दौर में लापरवाही बरते जाने के सवाल पर इंजीनियर शैलेंद्र ने कहा कि किसी को पहले से यह पता नहीं था कि नदी की धारा इस तरह शिफ्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में पहले भी कटाव होता रहा है। इंजीनियर शैलेंद्र ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी आभार जताते हुए कहा कि फरक्का बैराज के सभी गेट खुलवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल में आई बड़ी त्रासदी के बाद वहां से पानी आने के बावजूद गंगा का जलस्तर फिलहाल स्थिर है और बढ़ नहीं रहा है। फरक्का बैराज के गेट खोले जाने से पानी के दबाव को कम करने में मदद मिली है। अभी पैनिक स्थिति नहीं है- डीएम जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने बताया कि कटाव नियंत्रण को लेकर जल संसाधन विभाग (WRD) की टॉप टीम मौके पर मौजूद है। तकनीकी रूप से किन-किन बिंदुओं पर किस तरह के कार्य की आवश्यकता है, इसका आकलन विभाग के अभियंता कर रहे हैं। तटबंध पर जहां भी अतिक्रमण था, उसे हटवा दिया गया है और कार्य में किसी तरह का अवरोध नहीं है। उन्होंने बताया कि काम को और सुदृढ़ करने के लिए अन्य जगहों से भी कार्यपालक अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति की गई है। साथ ही बाहर से अतिरिक्त मजदूर और सामग्री मंगाकर काम में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल ऐसी कोई पैनिक स्थिति नहीं है। मैनपावर की कमी के सवाल पर उन्होंने कहा कि WRD के इंजीनियरों की ओर से इसकी जानकारी दी गई थी। इसके लिए अतिरिक्त मैनपावर की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जा रहा है।

