‘अर्नब’ का असर, बारिश से धान की फसल खराब:जिले में 33 प्रतिशत से अधिक का नुकसान; किसान बोले- लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा

‘अर्नब’ का असर, बारिश से धान की फसल खराब:जिले में 33 प्रतिशत से अधिक का नुकसान; किसान बोले- लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा

नालंदा जिले में चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण तेज हवा और बेमौसम मूसलाधार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। जबकि कटाई के बाद खेतों में सूखने के लिए छोड़ा गया धान पानी में भींगकर सड़ने की कगार पर पहुंच गया है। इस आपदा को देखते हुए कृषि विभाग ने नुकसान के आकलन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने जिले के सभी अंचलाधिकारियों और प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को स्थलीय मुआयना कर जल्द से जल्द रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। ताकि पीड़ित किसानों को आपदा प्रबंधन के तहत मुआवजा मिल सके। शून्य नुकसान पर भी देना होगा ब्योरा आपदा प्रबंधन विभाग के तय मानकों के अनुसार केवल उन्हीं खेतों का ब्योरा तैयार किया जाएगा, जहां फसलों को 33 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ है। अधिकारियों को 28 से 30 अक्टूबर के बीच हुई बारिश और तेज आंधी से प्रभावित फसलों का भौतिक सत्यापन कर प्रपत्र-एक और प्रपत्र-दो में विस्तृत रिपोर्ट संकलित करने का निर्देश दिया गया है। जिला कृषि पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट विभागीय ईमेल पर अतिशीघ्र भेजी जाए। साथ ही, यदि किसी प्रखंड या पंचायत में फसलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, तो वहां के पदाधिकारियों को ‘शून्य क्षति’ का प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से भेजना होगा। अनुमंडल कृषि पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों से समय पर रिपोर्ट तैयार कराकर जमा कराने की जिम्मेदारी दी गई है। धूप के बाद फिर लौटी बारिश शनिवार सुबह धूप निकलने से किसानों को लगा कि अब मौसम साफ हो जाएगा। बची हुई फसल को संभाल सकेंगे, लेकिन शाम होते ही आसमान में दोबारा बादल घिर आए और बारिश शुरू हो गई। पिछले चार दिनों से रुक-रुककर हो रही इस बारिश से खेतों में जलजमाव हो गया है। सरदार बिगहा के धनंजय कुमार, अस्थावां के प्रेम रंजन और रहुई के सरोज कुमार का कहना है कि जलमग्न होने से धान के दाने काले पड़ जाएंगे। अगर आने वाले दिनों में तेज धूप निकली, तो नमी के कारण बालियों में ही अंकुरण शुरू हो जाएगा। जिससे धान का वजन और गुणवत्ता दोनों बुरी तरह घटेंगे। बाजार में उचित दाम नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा, जमीन पर गिरी फसलों की कटाई कंबाइन हार्वेस्टर से नहीं हो सकेगी, जिससे मजदूरों पर होने वाला खर्च दोगुना हो जाएगा। टाल में रबी और सब्जियों पर संकट किसानों के मुताबिक जिले में लगभग 20 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की फसल प्रभावित हुई है। शुद्ध उपज और बाजार मूल्य के आधार पर केवल धान उत्पादकों को ही 6 करोड़ रुपए से अधिक की क्षति का अनुमान है। वहीं, लगभग 600 हेक्टेयर में लगी राई और सरसों की खेती को भी जबर्दस्त झटका लगा है, जिससे किसानों को करीब 7.65 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान झेलना पड़ सकता है। इस आपदा ने रबी की खेती और सब्जी उत्पादकों को भी गहरे संकट में डाल दिया है। सरमेरा, इसुआ और बढ़िया के टाल इलाकों में जलभराव के कारण रबी की बुआई पूरी तरह ठप हो गई है। खेतों में पहले से डाले गए बीज सड़ने और फंगस लगने की कगार पर हैं। एकंगरसराय और अस्थावां में पानी भरने से आलू, गोभी, टमाटर, बैंगन और मिर्च की जड़ें गलने लगी है। जिससे किसानों की महीनों की पूंजी डूब गई है। इधर, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी सरकार से अविलंब क्षतिपूर्ति की जांच कराकर किसानों को आर्थिक सहायता देने की मांग तेज हो गई है। नालंदा जिले में चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण तेज हवा और बेमौसम मूसलाधार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। जबकि कटाई के बाद खेतों में सूखने के लिए छोड़ा गया धान पानी में भींगकर सड़ने की कगार पर पहुंच गया है। इस आपदा को देखते हुए कृषि विभाग ने नुकसान के आकलन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने जिले के सभी अंचलाधिकारियों और प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को स्थलीय मुआयना कर जल्द से जल्द रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। ताकि पीड़ित किसानों को आपदा प्रबंधन के तहत मुआवजा मिल सके। शून्य नुकसान पर भी देना होगा ब्योरा आपदा प्रबंधन विभाग के तय मानकों के अनुसार केवल उन्हीं खेतों का ब्योरा तैयार किया जाएगा, जहां फसलों को 33 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ है। अधिकारियों को 28 से 30 अक्टूबर के बीच हुई बारिश और तेज आंधी से प्रभावित फसलों का भौतिक सत्यापन कर प्रपत्र-एक और प्रपत्र-दो में विस्तृत रिपोर्ट संकलित करने का निर्देश दिया गया है। जिला कृषि पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट विभागीय ईमेल पर अतिशीघ्र भेजी जाए। साथ ही, यदि किसी प्रखंड या पंचायत में फसलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, तो वहां के पदाधिकारियों को ‘शून्य क्षति’ का प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से भेजना होगा। अनुमंडल कृषि पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों से समय पर रिपोर्ट तैयार कराकर जमा कराने की जिम्मेदारी दी गई है। धूप के बाद फिर लौटी बारिश शनिवार सुबह धूप निकलने से किसानों को लगा कि अब मौसम साफ हो जाएगा। बची हुई फसल को संभाल सकेंगे, लेकिन शाम होते ही आसमान में दोबारा बादल घिर आए और बारिश शुरू हो गई। पिछले चार दिनों से रुक-रुककर हो रही इस बारिश से खेतों में जलजमाव हो गया है। सरदार बिगहा के धनंजय कुमार, अस्थावां के प्रेम रंजन और रहुई के सरोज कुमार का कहना है कि जलमग्न होने से धान के दाने काले पड़ जाएंगे। अगर आने वाले दिनों में तेज धूप निकली, तो नमी के कारण बालियों में ही अंकुरण शुरू हो जाएगा। जिससे धान का वजन और गुणवत्ता दोनों बुरी तरह घटेंगे। बाजार में उचित दाम नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा, जमीन पर गिरी फसलों की कटाई कंबाइन हार्वेस्टर से नहीं हो सकेगी, जिससे मजदूरों पर होने वाला खर्च दोगुना हो जाएगा। टाल में रबी और सब्जियों पर संकट किसानों के मुताबिक जिले में लगभग 20 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की फसल प्रभावित हुई है। शुद्ध उपज और बाजार मूल्य के आधार पर केवल धान उत्पादकों को ही 6 करोड़ रुपए से अधिक की क्षति का अनुमान है। वहीं, लगभग 600 हेक्टेयर में लगी राई और सरसों की खेती को भी जबर्दस्त झटका लगा है, जिससे किसानों को करीब 7.65 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान झेलना पड़ सकता है। इस आपदा ने रबी की खेती और सब्जी उत्पादकों को भी गहरे संकट में डाल दिया है। सरमेरा, इसुआ और बढ़िया के टाल इलाकों में जलभराव के कारण रबी की बुआई पूरी तरह ठप हो गई है। खेतों में पहले से डाले गए बीज सड़ने और फंगस लगने की कगार पर हैं। एकंगरसराय और अस्थावां में पानी भरने से आलू, गोभी, टमाटर, बैंगन और मिर्च की जड़ें गलने लगी है। जिससे किसानों की महीनों की पूंजी डूब गई है। इधर, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी सरकार से अविलंब क्षतिपूर्ति की जांच कराकर किसानों को आर्थिक सहायता देने की मांग तेज हो गई है।  

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