अमित शाह ने दी चेतावनी, भारत Drug Trafficking नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करेगा

अमित शाह ने दी चेतावनी, भारत Drug Trafficking नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करेगा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि भारत मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों को नेस्तनाबूद कर देगा। उन्होंने इसके साथ ही ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ की सराहना की जिसके तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ की गई छापेमारी में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। इस कार्रवाई में 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ।

इसके साथ ही गृह मंत्री ने कहा कि इस साल की शुरुआत में म्यांमा स्थित मादक पदार्थ तस्करी गिरोह के सरगना की गिरफ्तारी से उसकी वित्तीय और परिचालन संबंधी रीढ़ तोड़ दी गई। शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत, म्यांमा और बांग्लादेश में सक्रिय मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह को ध्वस्त करने के लिए 23 अक्टूबर को ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ चलाया गया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ, 17.82 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गईं और 500 डेटोनेटर तथा 12 लाख रुपये नकद जब्त किए गए।

शाह ने कहा कि यह गिरोह ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ के जरिए भारत, म्यांमा और बांग्लादेश की सीमाओं के पार मादक पदार्थों की तस्करी करता था। केंद्रीय गृह मंत्री ने तीनों राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की मादक पदार्थ रोधी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह अभियान 31 दिसंबर 2029 तक मादक पदार्थों के हर नेटवर्क को खत्म करने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “भारत मादक पदार्थ की तस्करी करने वाले गिरोहों के ताबूत में आखिरी कील ठोकने तक प्रहार करता रहेगा।”
‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी और वित्तीय गिरोह को निशाना बनाते हुए असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।

इस अभियान में 38 टीमों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी गिरोह के परिचालन और वित्तीय तंत्र को ध्वस्त करना था। इस गिरोह का नेतृत्व म्यांमा स्थित सरगना थांगसिंतुआंग उर्फ चिंतुआंग उर्फ त्लुआंगा कर रहा था।

वह म्यांमा-मिजोरम-मणिपुर-असम-त्रिपुरा गलियारे के जरिए मेथामफेटामाइन और हेरोइन की खेप भारत के मुख्य भूभाग और बांग्लादेश तक पहुंचाने की व्यवस्था करता था। उसे इस साल मई में गिरफ्तार किया गया था। सरकार की ओर से एक बयान में कहा गया, “स्वापक नियंत्रण पर दृष्टि दस्तावेज (2026-2029) के अनुरूप यह अभियान जब्ती-केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर नेटवर्क-केंद्रित कार्रवाई और वित्तीय तंत्र को बाधित करने की रणनीति की ओर बदलाव का उदाहरण है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय गिरोहों को जड़ से उखाड़ना है।”
इसमें कहा गया कि केंद्रीय और राज्य प्रवर्तन एजेंसियों के बीच कई दिनों तक गोपनीय खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त रूप से लक्ष्यों की पहचान और उच्चस्तरीय रणनीतिक बैठकों के बाद इस अभियान की सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई थी।

इसका उद्देश्य गिरोहों के रसद केंद्रों और अवैध वित्तीय नेटवर्क पर एक साथ प्रहार करना था। बयान के अनुसार यह बहुराज्यीय अभियान एनसीबी, मिजोरम पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से शुरू की गई खुफिया सूचनाओं पर आधारित विस्तृत जांच का नतीजा है। इन एजेंसियों ने संबंधित मामलों में नेटवर्क की आगे और पीछे की कड़ियों का पता लगाने के लिए व्यापक जांच शुरू की थी।

एकीकृत कमान के तहत 38 बहु-एजेंसी संयुक्त टीमों को तीनों राज्यों के पहले से चिह्नित 38 स्थानों पर एक साथ तैनात किया गया। बयान में कहा गया कि समन्वित कार्रवाई में प्रमुख शहरी केंद्रों और संवेदनशील सीमावर्ती गलियारों को शामिल किया गया। इनमें मिजोरम के आइजोल, चम्फाई और भारत-म्यांमा सीमा पर स्थित रणनीतिक व्यापारिक कस्बे जोखावथर के अलावा मणिपुर के चुराचांदपुर और असम के कछार जिले तथा वहां से गुजरने वाला परिवहन गलियारा शामिल था।

बयान में कहा गया कि इन कार्रवाइयों के बाद विस्तृत वित्तीय जांच और डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण से बिचौलियों, मुखौटा कंपनियों और धन हस्तांतरण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फर्जी खातों का व्यापक नेटवर्क सामने आया। इसी के मद्देनजर ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत बड़े पैमाने पर समन्वित कार्रवाई की गई।

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