अदालतों में मुकदमों के वर्षों तक लटके रहने और तारीख-पर-तारीख के सिलसिले पर अब प्रभावी रोक लगने जा रही है। किसी केस का ट्रायल शुरू होने के बाद तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का नया सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत हर केस का कैलेंडर तैयार किया जा रहा है, जिसमें गवाह, जांच अधिकारी, डॉक्टर और एफएसएल एक्सपर्ट की गवाही की तारीखें पहले से तय होंगी। तय दिन पर कोई गवाह उपस्थित नहीं हो पाता है तो उसके लिए एक दिन रिजर्व रखा जाता है। जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में फौजदारी के 18.40 लाख मामले लंबित हैं। इनमें सबसे अधिक 5.54 लाख केस उत्पाद अधिनियम से जुड़े हैं। यह कैलेंडर हत्या, लूट, डकैती, आर्म्स एक्ट, दुष्कर्म, पॉक्सो, एससी-एसटी अत्याचार और दंगा समेत सभी तरह के आपराधिक मामलों में तैयार किया जा रहा है। ये फायदे होंगे गवाह पलट नहीं सकते हैं। साक्ष्य नष्ट नहीं होगा। पीड़ितों को जल्द न्याय मिलेगा। आरोपी को फायदा नहीं मिलेगा। आरोपियों को जल्द सजा मिलेगी। पीड़ितों को कोर्ट का ज्यादा चक्कर लगाना नहीं होगा। पटना हाईकोर्ट के वकील प्रभात भारद्वाज ने कहा-कैलेंडर बन जाने के बाद केस में तेजी से फैसला आएगा। इससे अपराधियों में भय पैदा होगा। कोर्ट में लंबित केसों का बोझ कम होगा। पीड़ितों को न्याय जल्द मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के बाद पटना हाईकोर्ट ने सभी निचली अदालतों को आदेश दिया था कि हर केस का ट्रायल तेजी से हो। गवाही जब होने लगे तो डे-टू-डे बेसिस पर सभी गवाहों को बुलाकर गवाही कराई जाए। अगर कोई गवाह नहीं आता है तो उसकी वजह लिखवानी है। अदालतों में मुकदमों के वर्षों तक लटके रहने और तारीख-पर-तारीख के सिलसिले पर अब प्रभावी रोक लगने जा रही है। किसी केस का ट्रायल शुरू होने के बाद तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का नया सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत हर केस का कैलेंडर तैयार किया जा रहा है, जिसमें गवाह, जांच अधिकारी, डॉक्टर और एफएसएल एक्सपर्ट की गवाही की तारीखें पहले से तय होंगी। तय दिन पर कोई गवाह उपस्थित नहीं हो पाता है तो उसके लिए एक दिन रिजर्व रखा जाता है। जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में फौजदारी के 18.40 लाख मामले लंबित हैं। इनमें सबसे अधिक 5.54 लाख केस उत्पाद अधिनियम से जुड़े हैं। यह कैलेंडर हत्या, लूट, डकैती, आर्म्स एक्ट, दुष्कर्म, पॉक्सो, एससी-एसटी अत्याचार और दंगा समेत सभी तरह के आपराधिक मामलों में तैयार किया जा रहा है। ये फायदे होंगे गवाह पलट नहीं सकते हैं। साक्ष्य नष्ट नहीं होगा। पीड़ितों को जल्द न्याय मिलेगा। आरोपी को फायदा नहीं मिलेगा। आरोपियों को जल्द सजा मिलेगी। पीड़ितों को कोर्ट का ज्यादा चक्कर लगाना नहीं होगा। पटना हाईकोर्ट के वकील प्रभात भारद्वाज ने कहा-कैलेंडर बन जाने के बाद केस में तेजी से फैसला आएगा। इससे अपराधियों में भय पैदा होगा। कोर्ट में लंबित केसों का बोझ कम होगा। पीड़ितों को न्याय जल्द मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के बाद पटना हाईकोर्ट ने सभी निचली अदालतों को आदेश दिया था कि हर केस का ट्रायल तेजी से हो। गवाही जब होने लगे तो डे-टू-डे बेसिस पर सभी गवाहों को बुलाकर गवाही कराई जाए। अगर कोई गवाह नहीं आता है तो उसकी वजह लिखवानी है।

