एक कलाकार किसी जगह को केवल देखता नहीं, बल्कि उसे अपनी संवेदनशील नजरों से महसूस करके कैनवास पर उकेरता है। कुछ ऐसा ही अनोखा नजारा डीएवी यूनिवर्सिटी में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आर्ट वर्कशॉप ‘रंगोत्सव-2’ में देखने को मिला। ‘कलाकार संघ पंजाब’ और ‘इंटरनेशनल रोएरिच मेमोरियल ट्रस्ट’ द्वारा डीएवी यूनिवर्सिटी के सहयोग से आयोजित इस वर्कशॉप के इंट्रो में मुख्य आकर्षण रूस से आए कलाकार रहे। उन्होंने पंजाब भ्रमण के दौरान देखे और महसूस किए गए अपने जीवंत अनुभवों को अपनी कला का माध्यम बनाया। इस अंतरराष्ट्रीय कला संवाद में कलाकारों ने न केवल एक-दूसरे की कलाकृतियों को समझा, बल्कि ऑन-स्पॉट कार्य करते हुए अपने यात्रा अनुभवों और आसपास के वातावरण को पेंटिंग्स में ढाला।
इस आयोजन में रूस की अन्ना स्मोलिना, नादेज्दा कोबजिस्तोवा, एलेना याकोवलेवा और इलमिरा फरीदोनोवा के साथ भारतीय कलाकारों डॉ. रीना सिंह, वरिंदर कुमार, डॉ. रोहिता शर्मा, योगेश के. प्रजापति, अंकुश अट्ठी, डॉ. एचएस भट्टी, नीतू गौतम, बबिता, ज्योति, ममता देवड़ा, डॉ. प्रवीण के. सैनी, डॉ. ममता राजपूत, नवीन, राजीव सेमवाल और राजेश रावत ने अपने हुनर का प्रदर्शन कर भारतीय व रूसी संस्कृति के सेतु को और मजबूत किया। रूस की कलाकार अन्ना स्मोलिना ने पंजाब की प्राकृतिक सुंदरता से प्रभावित होकर पेड़ों के बीच से छनती सुबह की रोशनी और सूर्योदय के दृश्य को उकेरा। एलेना याकोवलेवा की कलाकृति में चित्रकार निकोलस रोएरिच की शैली की छाप दिखी, जिसमें बर्फीली चोटियों और रोशनी के अद्भुत खेलों का संयोजन था। रूस के येकातेरिनबर्ग से आईं इलमिरा फरीदोनोवा अमृतसर के गोल्डन टेंपल (श्री हरिमंदिर साहिब) के दर्शन किए और इसे अपनी पेंटिंग का मुख्य विषय बना दिया। इसके अलावा, जालंधर पहुंचने पर भारतीय परंपरा के तहत हवन में शामिल हुईं रूसी कलाकार नादेज्दा कोबजिस्तोवा ने इस सांस्कृतिक अनुभव को अनूठे थ्री-डी आर्ट के रूप में प्रस्तुत किया।

