अमेरिका में 50 साल बाद नई रिफाइनरी बनेगी:मार्को रुबियो और मुकेश अंबानी की मुलाकात आज, वेनेजुएला का कच्चा-तेल रिफाइन करने पर बात होगी

अमेरिका में 50 साल बाद नई रिफाइनरी बनेगी:मार्को रुबियो और मुकेश अंबानी की मुलाकात आज, वेनेजुएला का कच्चा-तेल रिफाइन करने पर बात होगी

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो आज जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का दौरा करेंगे। इस दौरान वे रिलायंस के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी से भी मिलेंगे। रूबियो रिलायंस के साथ वेनेजुएला का कच्चा तेल रिफाइन करने पर बातचीत करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो रिलायंस इंडस्ट्रीज अमेरिका के टेक्सास में एक ऑइल रिफाइनरी में बड़ा निवेश करने की तैयारी में है, जो 50 साल में अमेरिका में बनने वाली पहली रिफाइनरी होगी।इसी वजह से यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। रूबियो का जामनगर दौरा 3 वजहों से अहम… 1. अमेरिका में डीजल 155 रुपए के पार 2. वेनेजुएला से और तेल खरीदे रिलायंस 3. अमेरिका में रिलायंस का 300 अरब डॉलर का निवेश दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है जामनगर रिलायंस के मुताबिक, जामनगर रिफाइनरी एक ही जगह पर बनी दुनिया की सबसे बड़ी और आधुनिक रिफाइनरी है। यहां हर दिन 14 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता है। रूबियो बोले- भारत रिफाइनिंग सुपरपावर मंगलवार को मुंबई पहुंचे रुबियो ने भारत को ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’ बताया। उन्होंने कहा, ‘भारत में वेनेजुएला के हैवी क्रूड ऑयल को रिफाइन करने की बड़ी क्षमता है। दुनिया में तेल संकट कम करने में भारतीय रिफाइनरीज अहम भूमिका निभा सकती हैं। तेल सप्लाई में आ रही कानूनी और प्रतिबंधों से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए भारत और अमेरिका मिलकर काम करेंगे।’ मई के बाद रुबियो का दूसरा भारत दौरा मार्को रुबियो का मई में हुए पिछले दौरे के बाद यह दूसरा भारत दौरा है। मई में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। इसके अलावा, क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था। रूबियो के दौरे से क्या भारत-अमेरिका के रिश्ते पटरी पर लौटेंगे? बीते कुछ महीनों में भारत-अमेरिका के रिश्तों में कड़वाहट आई है। फिर चाहे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने वाला लिंडसे ग्राहम एक्ट पास करना हो या फिर इंफोसिस, TCS, विप्रो और HCL जैसी भारतीय कंपनियों के कर्मचारियों को ग्रीन कार्ड में मिलने वाली छूट खत्म करना हो। हालांकि रूबियो के भारत दौरे से पहले 16 अक्टूबर को ट्रम्प ने इस पर अस्थायी रोक लगा दी और कहा कि इससे अमेरिका को फायदा होगा। भारतीय थिंकटैंक ‘द इमेजइंडिया इंस्टीट्यूट’ के सीनियर जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट रोबिंदर सचदेवा मानते हैं कि रूबियो का फोकस नई दिल्ली की पारंपरिक राजनीति के बजाय मुंबई और जामनगर जैसे कारोबारी केंद्रों पर है। इसका मकसद कॉर्पोरेट सौदों, रिफाइनरी सेक्टर में साझेदारी, निवेश और दोनों देशों के बीच बिजनेस-टू-बिजनेस रिश्ते बढ़ाना है। पॉलिटिकल कॉलमिस्ट प्रताप भानु मेहता लिखते हैं कि रूबियो के दिल्ली के बजाय मुंबई-जामनगर जाने से इशारा हो सकता है कि अमेरिका भारत के कारोबारी केंद्रों से जुड़ रहा है और राजनीतिक केंद्र को कम तवज्जो दे रहा है। लेकिन सिर्फ कारोबारी सौदों पर टिका रिश्ता रणनीतिक साझेदारी को टिकाए रखने के लिए काफी नहीं हो सकता। अडाणी और टाटा ग्रुप के चेयरमैन से भी मिलेंगे गुजरात निकलने से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री की भारत के दूसरे बड़े उद्योगपतियों से भी मुलाकात होनी है। वे उद्योगपति गौतम अडाणी और टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन से भी बातचीत करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर चर्चा होगी। ———————— ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर: मार्को रूबियो का 6 महीने में दूसरा भारत दौरा; दिल्ली नहीं आएंगे, मुंबई-जामनगर क्यों जाएंगे; राहुल गांधी ने क्या सवाल उठाए
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 6 महीने में दूसरी बार भारत दौरे पर आ रहे हैं। लेकिन वे दिल्ली के बजाय मुंबई और जामनगर जाएंगे। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मुंबई जाकर उनसे मिलेंगे। इस पर राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा- ‘रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है।’ पूरी खबर पढ़ें…

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