रायपुर नगर निगम के गौठानों में क्षमता से ज्यादा गोवंश रखे जाने को लेकर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने निगम प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि निगम के रिकॉर्ड और गौठानों की जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गौठानों में जगह, चारा, पानी और इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है तो वहां गोवंश कैसे सुरक्षित रहेंगे? चार गौठानों में क्षमता से ज्यादा गोवंश आकाश तिवारी ने निगम के चार गौठानों की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि कई जगह क्षमता से ज्यादा गोवंश रखे गए हैं। गोकुल नगर गौठान, जोन-8: यहां 600 से ज्यादा गाय और भैंस होने का दावा किया गया है। क्षमता से ज्यादा संख्या के कारण व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही गई है। इसका संचालन अग्र सेवा समिति कर रही है। हीरापुर जरवाए गौठान, जोन-8: यहां करीब 160 गाय, भैंस और बछड़े हैं। नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक यह संख्या भी गौठान की क्षमता से ज्यादा है। अटारी गौठान, जोन-8: यहां करीब 290 से 300 गोवंश होने की बात कही गई है। तिवारी ने दावा किया कि यहां हर सप्ताह 1 से 2 गोवंश की मौत हो रही है। फुंडहर गौठान, वार्ड-51, जोन-9: निगम रिकॉर्ड में यहां 260 गोवंश रखने की व्यवस्था बताई गई है, जबकि वर्तमान में करीब 680 गाय, बछड़े और अन्य गोवंश रखे जाने का दावा किया गया है। 27.50 रुपए रोज के चारे पर सवाल नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नगर निगम की ओर से एक गोवंश के चारे के लिए प्रतिदिन करीब 27.50 रुपए दिए जाते हैं। उनका कहना है कि यह राशि गोवंश की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई गौठानों में पर्याप्त पानी, शेड और पशु चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। कुछ जगह व्यवस्था ठीक होने की बात कहते हुए उन्होंने अधिकांश गौठानों की स्थिति को चिंताजनक बताया। बोले- सड़कों से हटाकर गौठान लाने का उद्देश्य ही विफल आकाश तिवारी ने कहा कि सड़कों से गोवंश को हटाकर गौठानों में रखने का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब वहां उनकी पर्याप्त देखभाल हो। अगर गौठानों में ही चारा, पानी और इलाज की व्यवस्था नहीं होगी तो बेजुबान पशुओं की सुरक्षा कैसे होगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति नगर निगम की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। समय रहते सुधार नहीं किया गया तो गौठानों में गोवंश के जीवन को बचाना मुश्किल होगा। नेता प्रतिपक्ष ने रखी 3 मांगें सभी गौठानों की तत्काल थर्ड पार्टी जांच कराई जाए। गौठानों में क्षमता के अनुसार ही गोवंश रखे जाएं और जरूरत के मुताबिक नए गौठान बनाए जाएं। संचालन समितियों की जवाबदेही तय कर नियमित निगरानी की जाए।

