Types Of Organ Donation: अंगदान किसी जरूरतमंद मरीज की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। बहुत से लोग अंगदान करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इसकी प्रक्रिया और नियम की सही जानकारी नहीं होती। इसलिए अंगदान से पहले यह जानना जरूरी है कि इसके लिए क्या करना होता है और कौन व्यक्ति अंगदान कर सकता है। आइए जानते हैं अंगदान से जुड़ी जरूरी जानकारी और प्रक्रिया।
अंगदान कितने तरह का होता है
अंगदान मुख्य रूप से दो तरह का होता है। एक होता है मौत के बाद अंगदान (Deceased Donation) और दूसरा जिंदा रहते हुए अंगदान (Living Donation)। दोनों में सबसे बड़ा फर्क यह है कि मौत के बाद अंगदान में व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंग लिए जाते हैं, जबकि जिंदा रहते हुए अंगदान में व्यक्ति अपनी जिंदगी के दौरान कुछ खास अंग या उनके हिस्से दान करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक ट्रांसप्लांट के लिए अंग, टिश्यू या कोशिकाएं किसी व्यक्ति के जिंदा रहते या उसकी मौत के बाद प्राप्त की जा सकती हैं।
मौत के बाद कैसे होता है अंगदान
मौत के बाद अंगदान में व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके उन अंगों और टिश्यू को ट्रांसप्लांट के लिए लिया जाता है, जो किसी दूसरे मरीज के काम आ सकते हैं। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS )के मुताबिक किसी व्यक्ति के अंग ट्रांसप्लांट के लिए सही हैं या नहीं, यह उसकी मेडिकल स्थिति देखकर तय किया जाता है। इसके लिए डोनर की मेडिकल हिस्ट्री और दूसरी जरूरी जानकारी भी देखी जाती है।
जिंदा रहते हुए कौन से अंग दान कर सकते हैं
जिंदा रहते हुए व्यक्ति एक किडनी, लिवर का एक हिस्सा और कुछ खास मामलों में फेफड़े का एक हिस्सा, पैंक्रियाज या आंत का कुछ हिस्सा दान कर सकता है। कुछ टिश्यू जैसे बोन मैरो, ब्लड और प्लेटलेट्स भी दान किए जा सकते हैं।
भारत में कौन कर सकता है अंगदान
भारत में अगर कोई व्यक्ति अंगदान करने की इच्छा रखता है तो वह राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की वेबसाइट पर जाकर अपना Donor Pledge दर्ज कर सकता है। NOTTO के अनुसार, भारत में 18 साल या उससे ज्यादा उम्र का कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से अंग और टिश्यू डोनेशन के लिए प्लेज कर सकता है। इसके लिए व्यक्ति को लिखित रूप में अपनी सहमति देनी होती है कि उसकी मौत के बाद उसके अंग या टिश्यू जरूरतमंद मरीजों के इलाज के लिए दान किए जा सकते हैं। राजस्थान से सबसे ज्यादा लोगों ने Donor Pldege दर्ज किया है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

