Atypical Chest Pain Symptoms: सीने में जब भी दर्द होता है, तो सबसे पहला ख्याल दिल के दौरे (हार्ट अटैक) का आता है। सीने में भारीपन या दबाव वाला दर्द तो हम आसानी से पहचान लेते हैं। लेकिन कई बार सीने में ऐसा दर्द होता है जो काफी अलग महसूस होता है। इसे मेडिकल की भाषा में एटीपिकल चेस्ट पेन (Atypical Chest Pain) कहते हैं। अक्सर लोग इसे गैस, एसिडिटी या मांसपेशियों का खिंचाव समझकर टाल देते हैं। पर यह जानना बेहद जरूरी है कि सीने का यह अलग दिखने वाला दर्द भी दिल या शरीर की किसी बड़ी समस्या का इशारा हो सकता है। आइए जानते हैं कि ऐसा किस कारण से होता है?
क्या होता है एटीपिकल चेस्ट पेन?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, आम तौर पर दिल का पारंपरिक दर्द सीने के बीचों-बीच भारी दबाव, जकड़न या निचोड़े जाने जैसा होता है। कई बार सीने में ऐसा दर्द महसूस होता है जो भारीपन या जकड़न जैसा न होकर काफी अलग होता है जैसे तेज चुभन, जलन या सुई गड़ने जैसा अहसास। जब सीने का दर्द हार्ट अटैक के आम लक्षणों से मेल नहीं खाता, तो इसे डॉक्टरी भाषा में एटीपिकल चेस्ट पेन (Atypical Chest Pain) कहा जाता है। जब आप शारीरिक श्रम करते हैं तो स्थिति और भी खराब हो जाती है। इनमें से 66% लोगों के दर्द का कारण उनका हृदय नहीं होता है।
किन कारणों से हो सकता है यह दर्द?
- पाचन तंत्र की समस्या।
- मांसपेशियों या पसलियों में खिंचाव
- फेफड़ों की बीमारी।
- दिल से जुड़े कारण।
महिलाओं और शुगर के मरीजों के लिए क्यों है ज्यादा खतरा?
जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ( JAHA ) में प्रकाशित शोध के अनुसार, महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज (शुगर) के मरीजों में हार्ट अटैक के समय पारंपरिक दर्द के बजाय यही एटीपिकल लक्षण ज्यादा दिखाई देते हैं, यह दर्द आम हार्ट अटैक जैसा नहीं लगता, इसलिए मरीज इसे मामूली समझकर डॉक्टर के पास देर से पहुंचते हैं। अस्पताल पहुंचने पर भी लक्षण थोड़े अलग होने से ईसीजी (ECG) या जरूरी टेस्ट में देरी हो सकती।
कब तुरंत डॉक्टर के पास भागना चाहिए?
सीने के किसी भी दर्द को खुद से पहचानना या टालना खतरनाक हो सकता है। अगर दर्द के साथ ये लक्षण दिखें, तो बिना देर किए इमरजेंसी जाएं:
- सांस लेने में तकलीफ या घुटन महसूस होना।
- अचानक बहुत ज्यादा ठंडा पसीना आना।
- चक्कर आना, घबराहट या बेहोशी लगना।
- दर्द का फैलकर बाएं हाथ, कंधे, जबड़े या पीठ तक जाना।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

