गयाजी में एक युवक से 10.67 लाख की ठगी हुई है। बिजनेस में प्रॉफिट का लालच दिखाकर युवती ने निशाना बनाया है। इस मामले में पीड़ित ने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। केस दर्ज कर पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है। गुरुआ बाजार निवासी आत्मेश कुमार सुमन ने बताया कि फेसबुक के माध्यम से पल्लवी अग्रवाल से मार्च महीने में जान-पहचान हुई थी। शुरुआत में बातचीत सामान्य रही। फिर व्हाट्सएप के जरिए लगातार संपर्क बढ़ता चला गया। पल्लवी ने खुद को भरोसेमंद बताते हुए बिजनेस में निवेश करने पर अच्छा लाभ मिलने का झांसा दिया। धीरे-धीरे उसने अपने अन्य साथियों से भी संपर्क कराया, जो लगातार बड़े मुनाफे का लालच देकर मानसिक दबाव बनाते रहे। पार्टनर के रूप में काम करने की बात कही गई थी। शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए कुछ रकम पर रिटर्न भी दिया गया। इससे उसे लगा कि बिजनेस असली है। इसी भरोसे में आकर उसने पांच मार्च से 18 मार्च के बीच यूपीआई, एनईएफटी और आरटीजीएस के जरिए अलग-अलग खातों में कुल 10 लाख 67 हजार 270 रुपए ट्रांसफर कर दिए। जब बड़ी रकम जमा हो गई तो ठगों का असली चेहरा सामने आने लगा। कर्ज लेकर निवेश किया था पीड़ित ने आगे कहा कि प्रॉफिट रिटर्न भी बंद हो गया। रकम वापस मांगने पर टालमटोल करते रहे। कभी प्रोसेसिंग का बहाना, तो कभी बिजनेस में और निवेश की मांग की जाने लगी। गिरोह के लोग लगातार और पैसे डालने का दबाव बना रहे थे। इसके बाद ठगी का एहसास हुआ। यह रकम उसने कर्ज लेकर लगाई थी। पैसे डूबने के बाद से वह मानसिक तनाव में है। ज्यादा मुनाफे के झांसे से बचने की अपील साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर मोबाइल नंबर, बैंक खातों और सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के बिजनेस ऑफर, निवेश योजना और जल्दी मुनाफे के झांसे में आने से बचें, क्योंकि एक छोटी सी गलती बड़ी आर्थिक तबाही में बदल सकती है। गयाजी में एक युवक से 10.67 लाख की ठगी हुई है। बिजनेस में प्रॉफिट का लालच दिखाकर युवती ने निशाना बनाया है। इस मामले में पीड़ित ने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। केस दर्ज कर पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है। गुरुआ बाजार निवासी आत्मेश कुमार सुमन ने बताया कि फेसबुक के माध्यम से पल्लवी अग्रवाल से मार्च महीने में जान-पहचान हुई थी। शुरुआत में बातचीत सामान्य रही। फिर व्हाट्सएप के जरिए लगातार संपर्क बढ़ता चला गया। पल्लवी ने खुद को भरोसेमंद बताते हुए बिजनेस में निवेश करने पर अच्छा लाभ मिलने का झांसा दिया। धीरे-धीरे उसने अपने अन्य साथियों से भी संपर्क कराया, जो लगातार बड़े मुनाफे का लालच देकर मानसिक दबाव बनाते रहे। पार्टनर के रूप में काम करने की बात कही गई थी। शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए कुछ रकम पर रिटर्न भी दिया गया। इससे उसे लगा कि बिजनेस असली है। इसी भरोसे में आकर उसने पांच मार्च से 18 मार्च के बीच यूपीआई, एनईएफटी और आरटीजीएस के जरिए अलग-अलग खातों में कुल 10 लाख 67 हजार 270 रुपए ट्रांसफर कर दिए। जब बड़ी रकम जमा हो गई तो ठगों का असली चेहरा सामने आने लगा। कर्ज लेकर निवेश किया था पीड़ित ने आगे कहा कि प्रॉफिट रिटर्न भी बंद हो गया। रकम वापस मांगने पर टालमटोल करते रहे। कभी प्रोसेसिंग का बहाना, तो कभी बिजनेस में और निवेश की मांग की जाने लगी। गिरोह के लोग लगातार और पैसे डालने का दबाव बना रहे थे। इसके बाद ठगी का एहसास हुआ। यह रकम उसने कर्ज लेकर लगाई थी। पैसे डूबने के बाद से वह मानसिक तनाव में है। ज्यादा मुनाफे के झांसे से बचने की अपील साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर मोबाइल नंबर, बैंक खातों और सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के बिजनेस ऑफर, निवेश योजना और जल्दी मुनाफे के झांसे में आने से बचें, क्योंकि एक छोटी सी गलती बड़ी आर्थिक तबाही में बदल सकती है।


