World Anaesthesia Day 2026: सर्जरी का नाम सुनते ही लोगों के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। असल में, मरीज को ऑपरेशन के चीर-फाड़ से ज्यादा डर उस बेहोशी के इंजेक्शन यानी एनेस्थीसिया से लगता है। क्या मैं ऑपरेशन के बाद वापस जाग पाऊंगा?, कहीं बीच में ही मेरी आंख खुल गई तो? या क्या इससे मेरी याददाश्त कमजोर हो जाएगी? अस्पतालों में एनेस्थीसिया रूम के बाहर खड़े मरीजों और उनके तीमारदारों के मन में ऐसे अनगिनत सवाल कौंधते रहते हैं।
आज वर्ल्ड एनेस्थीसिया डे 2026 (World Anaesthesia Day 2026) के मौके पर इस खौफ को मन से निकाल फेंकना बेहद जरूरी है। मेयो क्लिनिक ( Mayo Clinic) के मुताबिक, आधुनिक मेडिकल साइंस ने एनेस्थीसिया को इतना सुरक्षित बना दिया है कि आज इसके बिना किसी बड़े ऑपरेशन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। तो चलिए समझते हैं कि एनेस्थीसिया असल में क्या है, यह कैसे काम करता है।
क्या है एनेस्थीसिया और यह शरीर में कैसे काम करता है?
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के रिसर्च डेटा के मुताबिक, एनेस्थीसिया एक ऐसी मेडिकल प्रक्रिया है, जो किसी भी सर्जिकल प्रोसीजर या ऑपरेशन के दौरान मरीज को दर्द महसूस नहीं होने देती। एनेस्थीसिया मुख्य रूप से हमारे तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर असर डालता है। यह नसों के जरिए दिमाग तक पहुंचने वाले दर्द के सिग्नल को कुछ समय के लिए पूरी तरह ब्लॉक कर देता है। जब दिमाग तक दर्द का मैसेज पहुंचेगा ही नहीं, तो आपको तकलीफ का अहसास भी नहीं होगा।
एनेस्थीसिया 4 प्रकार का होता है
1.जनरल एनेस्थीसिया (General Anesthesia)- इसमें मरीज को पूरी तरह से गहरी नींद (बेहोशी) में सुला दिया जाता है। बड़े ऑपरेशनों जैसे हार्ट या ब्रेन सर्जरी में इसका इस्तेमाल होता है।
2. इसमें शरीर के किसी एक बड़े हिस्से (जैसे कमर के नीचे का भाग) को सुन्न किया जाता है। रीढ़ की हड्डी में इंजेक्शन (एपिड्यूरल या स्पाइनल) देकर यह दिया जाता है। सिजेरियन डिलीवरी में अमूमन यही इस्तेमाल होता है।
3. लोकल एनेस्थीसिया (Local Anesthesia)- शरीर के केवल एक छोटे से हिस्से (जैसे दांत निकालना या कट लगने पर टांके लगाना) को सुन्न करने के लिए इंजेक्शन या स्प्रे के रूप में दिया जाता है।
4. सिडेशन (Sedation/Monitored Anesthesia Care)- इसमें मरीज पूरी तरह बेहोश नहीं होता, बल्कि एक हल्की और आरामदायक नींद में रहता है।
ऑपरेशन थिएटर जाने से पहले मरीज इन बातों का रखें ध्यान
यदि आपको बीपी, शुगर, थायरॉइड, दमा है या आप कोई खून पतला करने की दवा खाते हैं, तो एनेस्थेटिस्ट को साफ-साफ बताएं। बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू या शराब की आदत के बारे में डॉक्टर से कुछ न छिपाएं, क्योंकि इससे एनेस्थीसिया की डोज तय होती है। अगर आपके नकली दांत (Denture) हैं या शरीर पर कोई मेटल/जेवर है, तो उसे ओटी में जाने से पहले उतार दें।
ऑपरेशन से पहले पेट खाली रखना क्यों जरूरी है?
डॉक्टर आपको सर्जरी से 6 से 8 घंटे पहले खाली पेट रहने (NPO – Nothing by Mouth) की सलाह क्यों देते हैं। बेहोशी या सुन्न होने की स्थिति में पेट का खाना या पानी सांस की नली में जा सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए डॉक्टर के बताए नियमों का कड़ाई से पालन करें पानी की एक घूंट भी बिना पूछे न पिएं!
मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो एनेस्थीसिया कोई डरावना केमिकल नहीं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा का एक ऐसा वरदान है जो मरीज को दर्दमुक्त सर्जरी की सुविधा देता है। डरने के बजाय अपने एनेस्थेटिस्ट से खुलकर बात करें और अपनी हर शंका का समाधान करें। जब मन से अनजाना खौफ निकल जाएगा, तो आपकी रिकवरी भी दोगुनी तेजी से होगी!

