Women Death After Angioplasty: भोपाल में एंजियोप्लास्टी कराते समय एक महिला की मौत हो गई। ऐसी खबर सुनकर डर लगना जाहिर सी बात है। हम सोचते हैं कि जो इलाज जान बचाने के लिए है, उससे जान चली कैसे गई? सच तो यह है कि यह तकनीक बहुत काम की है, लेकिन कभी-कभी शरीर का साथ न देना या कोई और दिक्कत इसे मुश्किल बना देती है। आइए डॉक्टर सुनील कुमार जैन (हृदय रोग विशेषज्ञ) से समझते हैं यह है क्या।
क्या होती है एंजियोप्लास्टी?
इसे आप ऐसे समझिए जैसे घर के सिंक का पाइप जाम हो जाए, तो हम एक लचीली तार डालकर उसे खोल देते हैं। डॉक्टर भी यही करते हैं। वे हाथ या जांघ की नस के रास्ते एक बहुत पतली सी नली दिल की नसों तक भेजते हैं। इसमें कोई बड़ी चीर-फाड़ नहीं होती, बस एक सुई जैसा छेद होता है।
यह कब करानी पड़ती है?
अगर किसी की नस अचानक पूरी बंद हो जाए, तो जान बचाने के लिए इसे तुरंत करना पड़ता है। अगर थोड़ा सा चलने पर भी सांस फूलने लगे और सीने में भारीपन या दर्द महसूस हो। जब टेस्ट में पता चले कि दिल को पूरा खून नहीं मिल पा रहा है और आगे चलकर बड़ा खतरा हो सकता है।
ये कितनी सुरक्षित होती है?
ज्यादातर मामलों में यह बहुत सुरक्षित है और मरीज अगले ही दिन घर चला जाता है। लेकिन हां, चूंकि बात ‘दिल’ की है, तो थोड़ा रिस्क तो हमेशा रहता है। अगर मरीज बहुत बुजुर्ग है या उसे पहले से कोई और गंभीर बीमारी है, तो कभी-कभी दिक्कत आ सकती है। जो महिला वाली घटना हुई, वह बहुत दुखद है, लेकिन आमतौर पर यह तकनीक लाखों लोगों की जान बचाती है और उन्हें नई जिंदगी देती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


