बिहार में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन का विरोध शुरू हो गया है। AIMIM ने सभी सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों (स्कूल-कॉलेज) में वंदे मातरम का गायन करने के फैसले का विरोध किया है। वहीं, केंद्र की मोदी सरकार ने एक संशोधन को मंजूरी दी, जिसके तहत वंदे मातरम का अपमान अब दंडनीय अपराध माना जाएगा। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में वंदे मातरम का बिहार में विरोध क्यों। नहीं गाने पर क्या सजा होगी। कहां-कहां गाना अनिवार्य। सवाल-1ः बिहार में वंदे मातरम का विरोध कौन कर रहा है? जवाबः 13 मई को बिहार AIMIM अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा- ‘किसी तरह का आदेश देने के पहले सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का ध्यान रखाना चाहिए। मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को पढ़ना चाहिए। सरकार के फैसले के खिलाफ सड़क से सदन तक हमारी पार्टी आंदोलन करेगी।’ ईमान ने कहा, ‘मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संबंधित मंत्रालय को ज्ञापन सौंपकर आपत्ति दर्ज कराएंगे। वंदे मातरम का गायन हमारी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है, क्योंकि हम लोग एक ही ईश्वर को पूजते हैं। हम मूर्ति पूजा नहीं करते।’ सरकार के आदेश को सेकुलरिज्म के खिलाफ बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी आस्था का आदर होना चाहिए। सरकार अपने फैसले पर रोक लगाए। सवाल-2ः AIMIM वंदे मातरम का विरोध क्यों कर रही? जवाबः राज्य में 17.7% मुस्लिम आबादी है। AIMIM की पैठ सीमांचल एरिया में बढ़ रही है। मुस्लिमों का भरोसा बढ़ रहा है। वंदे मातरम के गायन के फैसले का खुलकर विरोध विपक्षी दल कांग्रेस-RJD करने से बचेगी। उसको राज्य में हिन्दू-मुस्लिम होने का डर सताएगा। जबकि, इन दोनों पार्टियां ही राज्य में मुस्लिमों का वोट लेती हैं। RJD-कांग्रेस वाली स्थिति AIMIM के साथ नहीं है। उसका पूरा जनाधार ही मुस्लिम समाज का है। ऐसे में वह खुलकर विरोध कर अपनी पार्टी का विस्तार सीमांचल से बाहर उत्तर-दक्षिण बिहार में करना चाहती है। चूंकि काफी समय से मुस्लिमों की वंदे मातरम पर आपत्ति रही है। मुस्लिम वंदे मातरम का विरोध क्यों करते हैं? आजादी के आंदोलन से लेकर अब तक मुस्लिम नेताओं ने इसका विरोध किया, खासकर मुस्लिम लीग ने। उन्हें वंदे मातरम से 2 दिक्कतें हैं… इतिहासकार आर. सी. मजूमदार वंदे मातरम को एंटी मुस्लिम तो नहीं बताते, लेकिन वो कहते हैं, ‘आनंदमठ में बंकिम चंद्र ने जिस तरह देवी काली का चित्रण किया है, उससे यह तो साफ है कि उनका राष्ट्रवाद हिंदू था भारतीय नहीं।’ इतिहासकार राम पुनियानी बताते हैं, ‘मुसलमानों के एक धड़े को वंदे मातरम से परेशानी उसके बाद के 4 छंदों की वजह से है, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र है। इसके अलावा आनंदमठ में मुसलमानों के प्रति जिस तरह की हिंसा के भाव लिखे हैं, वो परेशान करने वाले हैं।’ सवाल-3ः वंदे मातरम का अपमान किया तो क्या होगा? जवाबः राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की सेक्शन 3 में राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के अपमान या इसे गाने में रूकावट पैदा करने पर 3 साल तक की सजा या जुर्माना लगता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 5 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन करने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत वंदे मातरम को इस अधिनिमयम शामिल किया जाएगा। इसका मतलब कि अब सरकार वंदे मातरम को जन-गण-मन के समकक्ष दर्जा देने वाली है। इसलिए माना जा रहा है कि सजा और जुर्माने के प्रावधान भी एक जैसे होंगे। यानी वंदे मातरम का अपमान या उसे गाने में बाधा डालने पर 3 साल तक की सजा या जुर्माना लग सकता है। सवाल-4ः तो क्या अब मुस्लिमों को भी वंदे मातरम गाना पड़ेगा? जवाबः जरूरी नहीं है। इसके लिए आपको 1986 के ‘बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समझना होगा। सवाल-5ः वंदे मातरम को कब और कहां गाना अनिवार्य है? जवाबः सम्राट सरकार ने 26 अप्रैल 2026 को एक आदेश जारी किया। इसके मुताबिक… फरवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम को लेकर गाइडलाइन जारी की थी। इसमें बताया गया था कि… ये नियम कहां लागू नहीं होंगे? बिहार में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन का विरोध शुरू हो गया है। AIMIM ने सभी सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों (स्कूल-कॉलेज) में वंदे मातरम का गायन करने के फैसले का विरोध किया है। वहीं, केंद्र की मोदी सरकार ने एक संशोधन को मंजूरी दी, जिसके तहत वंदे मातरम का अपमान अब दंडनीय अपराध माना जाएगा। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में वंदे मातरम का बिहार में विरोध क्यों। नहीं गाने पर क्या सजा होगी। कहां-कहां गाना अनिवार्य। सवाल-1ः बिहार में वंदे मातरम का विरोध कौन कर रहा है? जवाबः 13 मई को बिहार AIMIM अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा- ‘किसी तरह का आदेश देने के पहले सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का ध्यान रखाना चाहिए। मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को पढ़ना चाहिए। सरकार के फैसले के खिलाफ सड़क से सदन तक हमारी पार्टी आंदोलन करेगी।’ ईमान ने कहा, ‘मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संबंधित मंत्रालय को ज्ञापन सौंपकर आपत्ति दर्ज कराएंगे। वंदे मातरम का गायन हमारी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है, क्योंकि हम लोग एक ही ईश्वर को पूजते हैं। हम मूर्ति पूजा नहीं करते।’ सरकार के आदेश को सेकुलरिज्म के खिलाफ बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी आस्था का आदर होना चाहिए। सरकार अपने फैसले पर रोक लगाए। सवाल-2ः AIMIM वंदे मातरम का विरोध क्यों कर रही? जवाबः राज्य में 17.7% मुस्लिम आबादी है। AIMIM की पैठ सीमांचल एरिया में बढ़ रही है। मुस्लिमों का भरोसा बढ़ रहा है। वंदे मातरम के गायन के फैसले का खुलकर विरोध विपक्षी दल कांग्रेस-RJD करने से बचेगी। उसको राज्य में हिन्दू-मुस्लिम होने का डर सताएगा। जबकि, इन दोनों पार्टियां ही राज्य में मुस्लिमों का वोट लेती हैं। RJD-कांग्रेस वाली स्थिति AIMIM के साथ नहीं है। उसका पूरा जनाधार ही मुस्लिम समाज का है। ऐसे में वह खुलकर विरोध कर अपनी पार्टी का विस्तार सीमांचल से बाहर उत्तर-दक्षिण बिहार में करना चाहती है। चूंकि काफी समय से मुस्लिमों की वंदे मातरम पर आपत्ति रही है। मुस्लिम वंदे मातरम का विरोध क्यों करते हैं? आजादी के आंदोलन से लेकर अब तक मुस्लिम नेताओं ने इसका विरोध किया, खासकर मुस्लिम लीग ने। उन्हें वंदे मातरम से 2 दिक्कतें हैं… इतिहासकार आर. सी. मजूमदार वंदे मातरम को एंटी मुस्लिम तो नहीं बताते, लेकिन वो कहते हैं, ‘आनंदमठ में बंकिम चंद्र ने जिस तरह देवी काली का चित्रण किया है, उससे यह तो साफ है कि उनका राष्ट्रवाद हिंदू था भारतीय नहीं।’ इतिहासकार राम पुनियानी बताते हैं, ‘मुसलमानों के एक धड़े को वंदे मातरम से परेशानी उसके बाद के 4 छंदों की वजह से है, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र है। इसके अलावा आनंदमठ में मुसलमानों के प्रति जिस तरह की हिंसा के भाव लिखे हैं, वो परेशान करने वाले हैं।’ सवाल-3ः वंदे मातरम का अपमान किया तो क्या होगा? जवाबः राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की सेक्शन 3 में राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के अपमान या इसे गाने में रूकावट पैदा करने पर 3 साल तक की सजा या जुर्माना लगता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 5 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन करने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत वंदे मातरम को इस अधिनिमयम शामिल किया जाएगा। इसका मतलब कि अब सरकार वंदे मातरम को जन-गण-मन के समकक्ष दर्जा देने वाली है। इसलिए माना जा रहा है कि सजा और जुर्माने के प्रावधान भी एक जैसे होंगे। यानी वंदे मातरम का अपमान या उसे गाने में बाधा डालने पर 3 साल तक की सजा या जुर्माना लग सकता है। सवाल-4ः तो क्या अब मुस्लिमों को भी वंदे मातरम गाना पड़ेगा? जवाबः जरूरी नहीं है। इसके लिए आपको 1986 के ‘बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समझना होगा। सवाल-5ः वंदे मातरम को कब और कहां गाना अनिवार्य है? जवाबः सम्राट सरकार ने 26 अप्रैल 2026 को एक आदेश जारी किया। इसके मुताबिक… फरवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम को लेकर गाइडलाइन जारी की थी। इसमें बताया गया था कि… ये नियम कहां लागू नहीं होंगे?


