पोस्टमार्टम कर्मी के नहीं मिलने पर महिला ने संभाला मोर्चा:चतरा में महिला ने किया पोस्टमॉर्टम, कहा- लोगों की मदद करना अच्छा लगता है

पोस्टमार्टम कर्मी के नहीं मिलने पर महिला ने संभाला मोर्चा:चतरा में महिला ने किया पोस्टमॉर्टम, कहा- लोगों की मदद करना अच्छा लगता है

चतरा सदर अस्पताल में अवैध वसूली के आरोप और जांच के डर से पोस्टमार्टम कर्मी फरार हो गए। इसके बाद अस्पताल की सफाईकर्मी ममता देवी ने दो शवों का पोस्टमॉर्टम कर मानवता और नारी शक्ति की मिसाल पेश की। यह घटना तब सामने आई जब शवों का पोस्टमार्टम रुका हुआ था। यह पूरा मामला बीते रविवार से शुरू हुआ। भजन गांव में मां-बेटी की मौत के बाद उनके पोस्टमॉर्टम के लिए कर्मियों द्वारा 5000 रुपए की अवैध वसूली का आरोप लगा। इस मामले के तूल पकड़ने और जांच की आशंका के चलते पोस्टमॉर्टम कर्मी अस्पताल छोड़कर फरार हो गए। कोई भी शव को हाथ लगाने को तैयार नहीं था
कर्मियों के फरार होने का खामियाजा उन परिजनों को भुगतना पड़ा, जो रोजगार सेवक राजेश शर्मा का शव लेकर अस्पताल पहुंचे थे। सुबह से दोपहर 12 बजे तक कोई भी शव को हाथ लगाने को तैयार नहीं था। परिजनों ने थक-हारकर कर्मियों के घर तक जाकर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मिले। परिजनों की परेशानी देख चतरा के सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने इस संकट की घड़ी में ममता देवी को याद किया। ममता ने कोरोना काल के दौरान आउटसोर्सिंग कर्मचारी के रूप में सराहनीय कार्य किया था।
बिना किसी हिचकिचाहट के इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया बुलाए जाने पर ममता देवी ने बिना किसी हिचकिचाहट के इस जिम्मेदारी को स्वीकार कर लिया। उन्होंने मंगलवार को दो शवों का पोस्टमॉर्टम किया। पहला पोस्टमॉर्टम रोजगार सेवक राजेश शर्मा का और दूसरा लावालौंग से आए एक युवक। ममता देवी ने कहा- अगर हम घर के काम अच्छे से कर सकते हैं, तो पीड़ितों की सेवा क्यों नहीं? मैं इस काम को लेकर उत्साहित हूं, मुझे लोगों की मदद करना अच्छा लगता है। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. पंकज कुमार ने इसे जिले की बड़ी उपलब्धि बताया है। सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने कहा कि ममता को अब आउटसोर्सिंग के आधार पर नियुक्त कर लिया गया है। चतरा सदर अस्पताल में अवैध वसूली के आरोप और जांच के डर से पोस्टमार्टम कर्मी फरार हो गए। इसके बाद अस्पताल की सफाईकर्मी ममता देवी ने दो शवों का पोस्टमॉर्टम कर मानवता और नारी शक्ति की मिसाल पेश की। यह घटना तब सामने आई जब शवों का पोस्टमार्टम रुका हुआ था। यह पूरा मामला बीते रविवार से शुरू हुआ। भजन गांव में मां-बेटी की मौत के बाद उनके पोस्टमॉर्टम के लिए कर्मियों द्वारा 5000 रुपए की अवैध वसूली का आरोप लगा। इस मामले के तूल पकड़ने और जांच की आशंका के चलते पोस्टमॉर्टम कर्मी अस्पताल छोड़कर फरार हो गए। कोई भी शव को हाथ लगाने को तैयार नहीं था
कर्मियों के फरार होने का खामियाजा उन परिजनों को भुगतना पड़ा, जो रोजगार सेवक राजेश शर्मा का शव लेकर अस्पताल पहुंचे थे। सुबह से दोपहर 12 बजे तक कोई भी शव को हाथ लगाने को तैयार नहीं था। परिजनों ने थक-हारकर कर्मियों के घर तक जाकर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मिले। परिजनों की परेशानी देख चतरा के सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने इस संकट की घड़ी में ममता देवी को याद किया। ममता ने कोरोना काल के दौरान आउटसोर्सिंग कर्मचारी के रूप में सराहनीय कार्य किया था।
बिना किसी हिचकिचाहट के इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया बुलाए जाने पर ममता देवी ने बिना किसी हिचकिचाहट के इस जिम्मेदारी को स्वीकार कर लिया। उन्होंने मंगलवार को दो शवों का पोस्टमॉर्टम किया। पहला पोस्टमॉर्टम रोजगार सेवक राजेश शर्मा का और दूसरा लावालौंग से आए एक युवक। ममता देवी ने कहा- अगर हम घर के काम अच्छे से कर सकते हैं, तो पीड़ितों की सेवा क्यों नहीं? मैं इस काम को लेकर उत्साहित हूं, मुझे लोगों की मदद करना अच्छा लगता है। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. पंकज कुमार ने इसे जिले की बड़ी उपलब्धि बताया है। सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने कहा कि ममता को अब आउटसोर्सिंग के आधार पर नियुक्त कर लिया गया है।  

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