Valley Fever Symptoms: अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल चिरंजीवी कोल्ला की मौत के बाद वैली फीवर नाम की बीमारी चर्चा में आ गई है। शुरुआत में उन्हें सामान्य वायरल और निमोनिया जैसे लक्षण महसूस हुए, लेकिन बाद में जांच में पता चला कि उन्हें एक खतरनाक फंगल इंफेक्शन हुआ था।
अमेरिका की स्वास्थ्य एजेंसी CDC (Centers for Disease Control and Prevention) के मुताबिक, वैली फीवर एक फेफड़ों से जुड़ा फंगल संक्रमण है, जो मिट्टी में मौजूद फंगस के छोटे कण सांस के जरिए शरीर में जाने से होता है।
क्या होता है वैली फीवर?
वैली फीवर को मेडिकल भाषा में कोक्सीडियोइडोमाइकोसिस कहा जाता है। यह बीमारी कोक्सीडियोइड्स नाम के फंगस से होती है, जो मुख्य रूप से अमेरिका के कैलिफोर्निया, एरिजोना और कुछ सूखे इलाकों की मिट्टी में पाया जाता है। जब तेज हवा, धूलभरी आंधी, खेती या निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी उड़ती है, तो फंगस के बेहद छोटे कण हवा में फैल जाते हैं। इन्हें सांस के जरिए अंदर लेने पर संक्रमण हो सकता है।
क्यों पहचानना मुश्किल होता है?
CDC के अनुसार, वैली फीवर के शुरुआती लक्षण फ्लू, वायरल इंफेक्शन या निमोनिया जैसे लगते हैं। इसी वजह से कई मरीजों में सही बीमारी का पता देर से चलता है।
वैली फीवर के आम लक्षण
- लगातार बुखार
- सूखी या लगातार खांसी
- सीने में दर्द
- सांस लेने में तकलीफ
- बहुत ज्यादा थकान
- सिरदर्द
- रात में पसीना आना
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
CDC का कहना है कि कुछ लोगों में लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
क्या यह बीमारी जानलेवा हो सकती है?
ज्यादातर लोग बिना इलाज के ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। दुर्लभ मामलों में यह संक्रमण शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे दिमाग, हड्डियों और त्वचा तक फैल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कमजोर इम्यूनिटी, डायबिटीज, प्रेग्नेंसी या पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में गंभीर संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।
कैसे करें बचाव?
CDC लोगों को धूलभरी जगहों से बचने की सलाह देता है। बचाव के लिए धूलभरे इलाकों में मास्क पहनें। तेज धूलभरी आंधी के समय घर के अंदर रहें साथ ही मिट्टी और धूल के ज्यादा संपर्क से बचें।
क्यों जरूरी है जागरूकता?
लगातार खांसी, बुखार और सांस लेने में दिक्कत को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। CDC की रिसर्च के मुताबिक वैली फीवर के कई मामले शुरुआत में गलत तरीके से निमोनिया या वायरल बीमारी समझ लिए जाते हैं, जिससे इलाज में देरी हो सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


