Work From Home: क्या भारत में फिर से बड़े पैमाने पर वर्क फ्रॉम होम लौट सकता है? मिडिल ईस्ट संकट और बढ़ती तेल कीमतों के बीच अब यह सवाल तेजी से उठने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद आईटी कर्मचारियों के संगठन ने सरकार से मांग की है कि कंपनियों को दोबारा वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह दी जाए। आईटी कर्मचारियों के संगठन Nascent Information Technology Employees Senate यानी NITES ने श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर कहा है कि देश के करीब 58 लाख आईटी और ITES कर्मचारियों के लिए जहां संभव हो, वहां वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाए। संगठन का कहना है कि इससे पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी और लोगों को रोजाना घंटों के ट्रैफिक से भी राहत मिलेगी।
WFH से प्रोडक्टिविटी पर नहीं पड़ता खास असर
NITES ने अपने पत्र में साफ कहा कि कोविड महामारी के दौरान आईटी सेक्टर ने साबित कर दिया था कि घर से काम करते हुए भी कंपनियों का कामकाज बिना किसी बड़े नुकसान के चलता रह सकता है। संगठन के मुताबिक, उस दौर में टेक्नोलॉजी और डिजिटल सिस्टम की मदद से प्रोडक्टिविटी पर खास असर नहीं पड़ा था।
पीएम मोदी ने की है अपील
दरअसल, रविवार को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने लोगों से ईंधन बचाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि मौजूदा वैश्विक हालात और वेस्ट एशिया में जारी तनाव की वजह से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में देश को बचत और संयम की जरूरत है। पीएम ने सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने और जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम अपनाने की बात भी कही थी।
मेट्रो सिटीज में कई घंटे ट्रैफिक में फंसे रहते हैं लोग
आईटी कर्मचारी संगठन ने इसी बयान का हवाला देते हुए सरकार से कहा है कि लाखों कर्मचारियों को हर दिन ऑफिस बुलाना तब सही नहीं लगता, जब डिजिटल विकल्प पहले से मौजूद हैं। खासकर बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों में लोग रोज कई घंटे ट्रैफिक में फंसते हैं। इससे न सिर्फ ईंधन ज्यादा खर्च होता है, बल्कि प्रदूषण और शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी दबाव बढ़ता है।
ईंधन बचाने में मिलेगी मदद
संगठन का कहना है कि अगर कुछ समय के लिए बड़े पैमाने पर वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाता है, तो इससे देश को काफी मात्रा में ईंधन बचाने में मदद मिल सकती है। साथ ही कर्मचारियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। कोविड के बाद कई कंपनियों ने कर्मचारियों को दोबारा ऑफिस बुलाना शुरू कर दिया था। कुछ कंपनियां हाइब्रिड मॉडल पर काम कर रही हैं, जबकि कई बड़ी कंपनियां फुल टाइम ऑफिस मोड में लौट चुकी हैं। लेकिन अब वैश्विक संकट और महंगे तेल ने फिर से वर्क फ्रॉम होम की बहस को हवा दे दी है।


