Guillain Barre Syndrome: महाराष्ट्र के पुणे जिले के पास नीरा गांव में 50 साल के एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार यह मामला गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) से जुड़ा हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्यक्ति को इस महीने की शुरुआत में तब अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जब उसकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई थी।
डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की हालत गंभीर होने के कारण उसे अस्पताल के आईसीयू में रखा गया था। इलाज के दौरान उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी और ब्लड प्रेशर भी लगातार बढ़ रहा था, इसलिए उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। शुरुआत में उसकी हालत कुछ समय के लिए स्थिर हो गई थी, लेकिन बाद में अचानक ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ गया, जिससे उसे हार्ट अटैक आ गया और उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज को GBS का गंभीर रूप था और इसी से जुड़ी जटिलताओं के कारण उसकी जान चली गई। वहीं इसी गांव की 47 साल की एक महिला को भी GBS के शक में अस्पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन इलाज के बाद उसकी हालत ठीक हो गई और उसे 4 मार्च को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
गांव में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी
गांव में GBS के चार मामले सामने आने के बाद महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। एहतियात के तौर पर गांव में निगरानी बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं ताकि अगर किसी में इसके लक्षण दिखाई दें तो समय रहते इलाज शुरू किया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक अब तक आठ स्वास्थ्य टीमों ने लगभग 600 घरों का सर्वे किया है। इस दौरान 2307 परिवारों और करीब 12,511 लोगों की जानकारी जुटाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम घबराहट फैलाने के लिए नहीं बल्कि सावधानी के तौर पर उठाया गया है।
क्या है गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS)
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ लेकिन गंभीर तंत्रिका संबंधी बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से नसों पर हमला करने लगता है। इसके कारण शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और कई बार लकवा जैसी स्थिति भी बन सकती है। यह बीमारी तेजी से बढ़ सकती है, इसलिए समय पर इलाज बहुत जरूरी होता है। ज्यादातर मामलों में सही समय पर इलाज मिलने से मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों में नसों को लंबे समय तक नुकसान हो सकता है।
GBS होने की वजह क्या होती है
विशेषज्ञों के मुताबिक GBS का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। लेकिन कई मामलों में यह बीमारी किसी संक्रमण के बाद दिखाई देती है। अक्सर यह समस्या वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कुछ दिन या हफ्तों बाद शुरू हो सकती है। जैसे कि सांस से जुड़ा संक्रमण, पेट का संक्रमण, फूड पॉइजनिंग या फ्लू जैसी वायरल बीमारी। एक बैक्टीरिया कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी को भी कई मामलों में इससे जुड़ा माना जाता है। हालांकि डॉक्टर बताते हैं कि यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डॉक्टरों का कहना है कि अगर शरीर में कुछ असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। GBS के शुरुआती लक्षणों में हाथ या पैरों में झनझनाहट, मांसपेशियों में कमजोरी, चलने में परेशानी और शरीर का संतुलन बिगड़ना शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में चेहरे की मांसपेशियां भी कमजोर हो सकती हैं या निगलने में दिक्कत हो सकती है। अगर बीमारी ज्यादा बढ़ जाए तो सांस लेने वाली मांसपेशियां भी प्रभावित हो सकती हैं, जो जानलेवा साबित हो सकती हैं। इसलिए ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज करवाना जरूरी है।


