West Bengal CM: पश्चिम बंगाल के नौ में से 8 सीएम ब्राह्मण या कायस्थ

West Bengal CM: पश्चिम बंगाल के नौ में से 8 सीएम ब्राह्मण या कायस्थ

Suvendu Adhikari, West Bengal CM Oath Ceremony: पश्चिम बंगाल में नौ में से 8 सीएम ब्राह्मण या कायस्थ रहे हैं। राज्य के पहले सीएम ही एक मात्र ओबीसी थे। इस बार भी बीजेपी यह पुरानी परंपरा तोड़ नहीं पाई। पढ़ें पूरी खबर… 

Suvendu Adhikari Oath Ceremony: पश्चिम बंगाल देश के कुछ गिने-चुने राज्यों में है, जहां आजादी के बाद मुख्यमंत्रियों की संख्या दस या उससे कम रही हो। यहां 9 मई 2026 से भाजपा के शुभेन्दु अधिकारी मुख्यमंत्री होंगे। लेकिन, बंगाल में एक अपवाद को छोड़ कर सारे सीएम अगड़ी जाति (कायस्थ या ब्राह्मण) के ही हुए हैं। यह परंपरा 2026 में भी नहीं टूटी है।

पश्चिम बंगाल में सारे सीएम के अगड़ी जाति के होने के पीछे शायद एक वजह यह हो कि वहां चुनावों में जातिगत समीकरण उतना हावी नहीं होता जितना बिहार-उत्तर प्रदेश या दक्षिण के राज्यों में होता है।

पश्चिम बंगाल: एक को छोड़ सारे सीएम ब्राह्मण या कायस्थ

नाम आयु (शपथ के समय) जाति कार्यकाल
प्रफुल्ल चंद्र घोष 55 वर्ष ओबीसी 1947–1948, 1967–1968
बिधान चंद्र रॉय ~65 वर्ष कायस्थ 1948–1962
प्रफुल्ल चंद्र सेन 65 वर्ष वैद्य (कायस्थ) 1962–1967
अजय कुमार मुखर्जी 65 वर्ष ब्राह्मण 1967, 1969–1970, 1971
सिद्धार्थ शंकर राय 51 वर्ष कायस्थ 1972–1977
ज्योति बसु 62 वर्ष कायस्थ 1977–2000
बुद्धदेव भट्टाचार्य 56 वर्ष ब्राह्मण 2000–2011
ममता बनर्जी 56 वर्ष ब्राह्मण 2011–2026
शुभेंदु अधिकारी 55 वर्ष ब्राह्मण 2026–वर्तमान

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 1977 तक (कुछ साल छोड़ कर) पूरी तरह कांग्रेस का दबदबा रहा था। फिर वामपंथियों का दौर शुरू हुआ, जो 2011 में ममता बनर्जी के आने तक जारी रहा। इस दौर को 2026 में बीजेपी ने खत्म किया। नीचे टेबल में देख सकते हैं कि किस चुनाव में कितनी सीटें लाकर किस पार्टी ने अपना दबदबा रखा:

चुनाव वर्ष पहला दल (सीटें) दूसरा दल (सीटें) तीसरा दल (सीटें) चौथा दल (सीटें) अन्य कुल सीटें
1952 🔵 INC (150) 🔴 CPI (28) 🟠 KMPP (15) 🟤 AIFB (11) 34 238
1957 🔵 INC (152) 🔴 CPI (46) 💗 PSP (21) 🔵 AIFB (8) 25 252
1962 🔵 INC (157) 🔴 CPI (50) 🟤 AIFB (13) 🔵 RSP (9) 23 252
1967 🔵 INC (127) 🔴 CPI(M) (43) 🔵 BC (34) 🔴 CPI (16) 60 280
1969 🔴 CPI(M) (80) 🔵 INC (55) 🔵 BC (33) 🔴 CPI (30) 82 280
1971 🔴 CPI(M) (113) 🟢 INC(R) (105) 🔴 CPI (13) 🔵 SUCI (7) 56 280
1972 🟢 INC(R) (216) 🔴 CPI (35) 🔴 CPI(M) (14) 🔵 RSP (3) 26 280
1977 🔴 CPI(M) (178) 🔵 JP (29) 🔵 AIFB (25) 🟢 INC(R) (20) 42 294
1982 🔴 CPI(M) (174) 🟢 INC(I) (49) 🔵 AIFB (28) 🔵 RSP (19) 24 294
1987 🔴 CPI(M) (187) 🟢 INC(I) (40) 🔵 AIFB (26) 🔵 RSP (18) 23 294
1991 🔴 CPI(M) (182) 🔵 INC (43) 🔵 AIFB (29) 🔵 RSP (18) 22 294
1996 🔴 CPI(M) (153) 🔵 INC (82) 🔵 AIFB (21) 🔵 RSP (18) 20 294
2001 🔴 CPI(M) (143) 🟢 AITC (60) 🟢 INC (26) 🟤 AIFB (25) 40 294
2006 🔴 CPI(M) (176) 🟢 AITC (30) 🔵 AIFB (23) 🔵 INC (21) 44 294
2011 🟢 AITC (184) 🔵 INC (42) 🔴 CPI(M) (40) 🟤 AIFB (11) 17 294
2016 🔵 AITC (211) 🔵 INC (44) 🔴 CPI(M) (26) 🟠 BJP (3) 10 294
2021 🟢 AITC (215) 🟠 BJP (77) 🔵 ISF (1) 🟢 GJM (1) 0 294
2026 🟠 BJP (207) 🟢 AITC (80) 🔵 INC (2) 🔵 AJUP (2) 🔴 CPI(M) (1) 293

2026 में पश्चिम बंगाल में सत्ता का नया दौर (दक्षिणपंथी भाजपा शासन का) तो शुरू हो गया है, लेकिन सत्ता पर अगड़ी जाति के नियंत्रण का दौर नहीं बदला है। हालांकि पश्चिम बंगाल ऐसा इकलौता राज्य नहीं है। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने एक रिसर्च किया है। इसमें बताया गया है कि किस राज्य में किस समुदाय का मुख्यमंत्री औसतन कितने दिन शासन में रहा है। इसमें चार समुदाय को जेनेरल, मुस्लिम, एससी और ओबीसी के रूप में लिया गया है। जेनेरल कैटेगरी (मुख्यतः अगड़ी जातियां) में बंगाल भले सबसे ऊपर है, लेकिन आंध्र प्रदेश, हरियाणा, ओड़ीशा, पंजाब भी आस-पास ही हैं। देखिए ये टेबल

राज्य (State) सामान्य (GEN) मुस्लिम (Muslim) अनुसूचित जाति (SC) अनुसूचित जनजाति (ST) अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
पश्चिम बंगाल 99.7 0.3
आंध्र प्रदेश 97 3
हरियाणा 95.4 4.6
ओडिशा 92 4.4
पंजाब 91.5 0.7
राजस्थान 74.9 1.5 23.6
केरल 73.9 26.1
महाराष्ट्र 73.6 2.7 23.7
मध्य प्रदेश 69 31
गुजरात 63.8 36.2
उत्तर प्रदेश 63.1 36.9
छत्तीसगढ़ 59 41
तमिलनाडु 45.1 54.9
असम 42.8 57.2
बिहार 41.2 3.5 55.3
कर्नाटक 25 75
झारखंड 87 13
इसमें मुख्यमंत्री पद पर रहे अलग-अलग वर्ग के व्यक्तियों के कुल ‘पर्सन-डेज़’ (दिनों की संख्या) का प्रतिशत बताया गया है।

नौ में से 7 सीएम कोलकाता के

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों की बात करें तो एक बात और नजर आती है। इस पद पर शहरी लोगों का ही कब्जा रहा है। उसमें भी ज़्यादातर कोलकाता (कलकत्ता) के लोगों का ही। नौ में से सात मुख्यमंत्री कोलकाता के ही रहे हैं। जबकि, विधान सभा में कोलकाता की सीटें महज 3.75 प्रतिशत हैं। यह 2011 के आधार पर है। 1977 से 2011 के बीच की बात करें, तब भी यह 7.14 प्रतिशत था।

पश्चिम बंगाल भारत का इकलौता राज्य है जहां नौ में से सात सीएम राजधानी या एक ही शहर से हुए हैं। हालांकि, इस मामले में शुभेन्दु अधिकारी अलग हैं, वह कोलकाता से नहीं हैं। अधिकारी के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।

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सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के पहले भाजपाई सीएम बन सकते हैं। (AI Generated Photo).

  

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