पिता नोट्स बनाते थे,मां ने घरेलू काम से दूर रखा:एक ही परिवार में सफलता की हैट्रिक, 2 भाइयों के बाद बहन का भी RAS में सिलेक्शन

पिता नोट्स बनाते थे,मां ने घरेलू काम से दूर रखा:एक ही परिवार में सफलता की हैट्रिक, 2 भाइयों के बाद बहन का भी RAS में सिलेक्शन

कहते हैं- पढ़ाई त्याग मांगती है। जब यह त्याग पूरा परिवार मिलकर करे, तो सफलता कदम चूमती है। पाली के बीसलपुर गांव के रहने वाले चंदन सिंह चौहान के घर में आज खुशियां ही खुशियां हैं। उनकी बेटी मोनिका सिंह चौहान ने RAS परीक्षा में 39वीं रैंक हासिल कर अपने दोनों भाइयों की तरह प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया है। यह कहानी उस पिता की है, जो रिटायरमेंट के बाद खुद ‘गुरु’ बने और उस मां की है जिसने बेटी की पढ़ाई के लिए खुद की नींद और आराम त्याग दिया। मोनिका की यह जीत महज एक सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि एक ही घर में तीन-तीन आरएएस (RAS) अफसरों की ‘सफलता की हैट्रिक’ है। मोनिका वर्तमान में लूणी में VDO (ग्राम विकास अधिकारी) के पद पर तैनात हैं। 651वीं रैंक से 39वीं तक का सफर
जोधपुर के लाचू कॉलेज से बीएससी करने वाली मोनिका का यह दूसरा प्रयास था। साल 2023 की RAS परीक्षा में उन्हें 651वीं रैंक मिली थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। VDO की नौकरी की जिम्मेदारी के साथ उन्होंने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की और इस बार टॉप-50 में जगह बनाई। पिता के नोट्स और मां का त्याग
मोनिका की सफलता के पीछे उनके माता-पिता की तपस्या की कहानी भावुक करने वाली है। मोनिका के पिता चंदन सिंह चौहान खुद प्रशासनिक सेवाओं से रिटायर्ड हैं। उन्होंने घर में ही क्लासरूम जैसा माहौल बनाया। मोनिका बताती हैं- पापा ने हम तीनों भाई-बहनों को खुद नोट्स बनाकर दिए। वे हमें सिर्फ पढ़ाते नहीं थे, बल्कि इंटरव्यू की बारीकियों की तैयारी भी घर पर ही करवाते थे। एक तरफ जहां पिता ने पढ़ाई का मोर्चा संभाला, वहीं मां संतोष कंवर ने मोनिका को घरेलू जिम्मेदारियों से पूरी तरह आजाद रखा। मां (गृहिणी) हमेशा कहती थीं- तू बस अफसर बनने का सपना देख, रसोई का काम तो मैं कर लूंगी। एक ही घर में तीन-तीन RAS
मोनिका के दोनों भाइयों का चयन पहले ही RAS में हो चुका है। अब बहन की 39वीं रैंक ने खुशियों को तिगुना कर दिया है। रिटायर्ड पिता के लिए इससे बड़ा गर्व का दिन नहीं हो सकता कि उनकी उंगली पकड़कर चलने वाले तीनों बच्चे आज उसी सिस्टम का हिस्सा हैं, जिसमें उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बिता दी। मोनिका कहती हैं- सफलता के लिए शॉर्टकट नहीं, अनुशासन और परिवार का विश्वास जरूरी है। अगर आपको अपनों का साथ मिले, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। पापा की वो बात आज भी याद है। पापा कहते थे- पढ़ाई त्याग मांगती है, अगर आज फोकस कर लिया तो कल मुकाम तुम्हारा होगा। किराए के फ्लैट में 4 साल का ‘अज्ञातवास’ मोनिका के पिता चंदन सिंह चौहान नवम्बर 2025 में अतिरिक्त निदेशक, राज्य बीमा सेवा उदयपुर से रिटायर हुए थे। वह बताते हैं- बच्चों की पढ़ाई में कोई खलल न पड़े, इसके लिए उन्होंने फैमिली को जोधपुर के कुड़ी एरिया रखा था। करीब 4 साल तक तीनों भाई-बहन (महेंद्र, ईश्वर और मोनिका) वहीं रहकर पढ़ाई करते रहे। बड़ा बेटा: महेंद्र सिंह (RAS 2021 चयन), वर्तमान में जोधपुर में श्रम निरीक्षक (लेबर इंस्पेक्टर)। छोटा बेटा : ईश्वर सिंह चौहान, वर्तमान में देचू (फलोदी) में BDO। बेटी : मोनिका सिंह, अब 39वीं रैंक के साथ बनेगी RAS (वर्तमान में लूणी में VDO)। जब इंटरव्यू बोर्ड ने पूछा- ‘सरपंच पति’ आए तो क्या करोगी?
वर्तमान में लूणी में ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के पद पर तैनात मोनिका से इंटरव्यू बोर्ड ने उनके काम से जुड़ा दिलचस्प सवाल पूछा। सवाल-अगर महिला सरपंच का पति ऑफिस में काम लेकर आए, तो उसे कैसे हैंडल करोगी? जवाब- सर, मेरी ग्राम पंचायत में ऐसा कोई केस नहीं है। वहां महिला सरपंच खुद जागरूक हैं और ग्राम सभा व पंचायत की बैठकों में हिस्सा लेती हैं। इस स्पष्ट जवाब ने बोर्ड को प्रभावित किया। मां की ममता और पिता का अनुशासन रात 2 बजे तक ‘मैगी और चाय’: मोनिका ने बताया कि वह रातभर पढ़ाई करती थीं। उनकी मां संतोष कंवर उनके साथ जागती रहती थीं। कभी रात 1 बजे तो कभी 2 बजे मां उन्हें चाय या मैगी बनाकर खिलाती थीं, ताकि पढ़ाई में मन लगा रहे। रसोई से रखा दूर: मां का एक ही लक्ष्य था, तू बस RAS बन जा, रसोई का काम मैं संभाल लूंगी। रिटायर्ड पिता बने कोच: पिता चंदन सिंह ने खुद नोट्स तैयार किए। वे बच्चों का इंटरव्यू तक की तैयारी कराते थे। उन्हें संभावित सवालों के लिए तैयार करते थे।

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