US-Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर पश्चिम एशिया का एक नक्शा साझा किया, जिसमें अमेरिकी झंडे के साथ ईरान की ओर कई दिशाओं से लाल तीर जाते हुए दिखाए गए। हालांकि ट्रंप ने पोस्ट में कुछ नहीं कहा है। लेकिन इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं।
यह पोस्ट उस चेतावनी के कुछ ही समय बाद सामने आई, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान के पास अमेरिका समर्थित शांति प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए बहुत कम समय बचा है। इस बयान के बाद अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ईरान को ट्रंप की सख्त चेतावनी
हालांकि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा- ईरान के लिए समय तेजी से खत्म हो रहा है। उन्हें तुरंत फैसला लेना होगा, वरना उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा। समय बेहद महत्वपूर्ण है।
बता दें कि ट्रंप का यह बयान उस बैठक के बाद आया, जिसमें ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से बातचीत की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच ईरान और जारी संघर्ष को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
ट्रंप-नेतन्याहू बातचीत से बढ़ी अटकलें
नेतन्याहू पहले ही संकेत दे चुके थे कि ट्रंप के हालिया चीन दौरे के बाद दोनों नेताओं की बातचीत होगी और ईरान इस चर्चा का प्रमुख मुद्दा रहेगा। दोनों नेताओं की बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ एक और सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर सकते हैं। ट्रंप की ताजा सोशल मीडिया पोस्ट ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।
नाजुक संघर्षविराम के बीच तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से एक नाजुक संघर्षविराम लागू है। हालांकि, व्यापक शांति समझौते को लेकर जारी बातचीत में अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है। हाल के हफ्तों में कूटनीतिक वार्ता फिर से शुरू कराने की कोशिशें भी सफल नहीं हो पाई हैं।
ईरान का दावा- अमेरिका ने नहीं दी बड़ी रियायत
सोमवार को ईरानी मीडिया ने दावा किया कि वॉशिंगटन ने बातचीत के दौरान कोई बड़ी रियायत नहीं दी। ईरान की समाचार एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका ने पांच बिंदुओं वाला प्रस्ताव रखा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान केवल एक परमाणु केंद्र को ही चालू रखे। साथ ही, ईरान के पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने की भी मांग की गई है।


