Trump Xi Jinping Meeting: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में गुरुवार को दो घंटे तक द्विपक्षीय बैठक हुई। यह बैठक तय समय से एक घंटे ज्यादा तक चली। बैठक में जिनपिंग ने ताइवान मुद्दे पर अमरीका को संभावित ‘टकराव’ की चेतावनी दी है। जिनपिंग ने कहा, ‘अगर इस मुद्दे को सही तरीके से संभाला गया तो द्विपक्षीय संबंध सामान्य रूप से स्थिर रह सकते हैं, लेकिन अगर इसे ठीक से नहीं संभाला गया तो दोनों देश टकराव या यहां तक कि संघर्ष की स्थिति में पहुंच सकते हैं, जिससे पूरे चीन-अमेरिका संबंध बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच जाएंगे।’ उन्होंने कहा कि ताइवान की स्वतंत्रता ताइवान स्ट्रेट में शांति के बिल्कुल उलट है। दरअसल, पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने ताइवान को 11 अरब डॉलर के हथियार बेचने का एलान किया था।
होर्मुज स्ट्रेट और ऊर्जा आपूर्ति पर भी चर्चा
वहीं, व्हाइट हाउस ने बताया कि ईरान और होर्मुज स्ट्रेट पर भी ट्रंप और जिनपिंग की बात हुई। बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि होर्मुज खुला रहना चाहिए ताकि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो। एक अधिकारी ने कहा कि जिनपिंग ने होर्मुज के सैन्यीकरण और वहां किसी प्रकार का शुल्क लगाए जाने का विरोध किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चीन भविष्य में होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका से अधिक तेल खरीदने में रुचि रखता है। व्हाइट हाउस ने बताया कि अमेरिकी कंपनियों के लिए चीन के दरवाजे और खोलने पर भी बात हुई।
ट्रंप ने की जिनपिंग की जमकर तारीफ
इससे पहले अपने भव्य स्वागत से खुश ट्रंप ने जिनपिंग को महान नेता बताते हुए कहा कि हमारे संबंध पहले से कहीं बेहतर होने जा रहे हैं। वहीं, जिनपिंग ने कहा कि इस समय दुनिया में ऐसा बदलाव तेज हो रहा है जैसा पिछले सौ सालों में नहीं देखा गया। अमेरिका और चीन को साझेदार होना चाहिए, प्रतिद्वंद्वी नहीं।
नाम बदलकर चीन पहुंचे मार्को रूबियो
प्रतिबंधों के बावजूद अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो चीन पहुंचे हैं। उन्हें एंट्री देने के लिए चीन को उनका नाम बदलना पड़ा। चीन ने आधिकारिक दस्तावेजों में उनके उपनाम रूबियो का चीनी अनुवाद कर उसे ‘मार्को लू’ के रूप में दर्ज किया गया, जिससे बिना प्रतिबंध हटाए उन्हें एंट्री मिल सकी। हांगकांग में चीन की सख्ती और शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों पर अत्याचारों के खिलाफ बोलने पर चीन ने 2020 में रूबियो पर प्रतिबंध लगाए थे।
‘क्लीन डिवाइस’ के साथ पहुंचे अमेरिकी अधिकारी
ट्रंप के साथ चीन गए कई अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और बड़े सीईओ को अपने निजी फोन और लैपटॉप छोड़ने पड़े हैं। इनकी जगह उन्हें सीमित एक्सेस वाले ‘क्लीन डिवाइस’ दिए गए। ऐसा इसलिए ताकि चीन हैकिंग या डेटा न चुरा ले। एक पूर्व सीक्रेट सर्विस एजेंट ने कहा कि अमरीकी अधिकारियों को पहले से ही यह मानकर चलने को कहा जाता है कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है। हालांकि, चीन के दूतावास ने इन आरोपों को खारिज किया है।


